Monday, 05 October 2026
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Imran Khan 74th Birthday: क्रिकेट के मैदान का चैंपियन और जेल में बैठकर भाषण देने वाला नेता, जानिए इमरान खान की राष्ट्रीय नायक से विलेन बनने की कहानी

2019 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान में पकड़े गए भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को इमरान खान सरकार ने रिहा किया था। संसद में इमरान ने इसे शांति की पहल बताया था। जानें पूरा घटनाक्रम।

लाहौर: एक दौर में क्रिकेट की दुनिया में जिस नाम को तेज गेंदबाजी, शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन और कप्तानी की मिसाल माना जाता था, वही नाम बाद में पाकिस्तान की सत्ता के केंद्र में पहुंचा और आज जेल की सलाखों के पीछे से अपने मुल्क की राजनीति को प्रभावित कर रहा है।

यह कहानी है इमरान खान की, जो 5 अक्टूबर 1952 को लाहौर में पैदा हुए और आज 74 साल के गो चुके हैं। क्रिकेटर, कप्तान, समाजसेवी, राजनेता, पूर्व प्रधानमंत्री और वर्तमान में एक कैदी और देशद्रोही के रूप में इमरान खान की जिंदगी कई बिल्कुल अलग-अलग पड़ावों से गुजरी है।

आज उनके जन्मदिन के मौके पर समझते हैं उनके जीवन के इस सभी पड़ावों और उनके द्वारा लिए गए फैसलों ने आखिर कैसे उनकी और पाकिस्तान की दिशा बदली।

क्रिकेट से शुरू हुई पहचान

इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 1971 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच से शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के लिए 88 टेस्ट और 175 वनडे मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 3,807 रन और 362 विकेट हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 3,709 रन और 182 विकेट लिए। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में शामिल रहे।

उनके करियर में कप्तानी का दौर भी खास रहा। उन्होंने पाकिस्तान की टीम की कमान कई चरणों में संभाली और 1980 के दशक में टीम को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाईं। 1987 में पाकिस्तान के विश्व कप सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद इमरान ने संन्यास की घोषणा की थी, लेकिन बाद में वापसी की और 1992 के विश्व कप को अपना बड़ा लक्ष्य बनाया।

1992 विश्व कप ने बना दिया राष्ट्रीय नायक

इमरान खान के क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि 1992 का विश्व कप है। पाकिस्तान उस टूर्नामेंट में एक समय लगभग बाहर होने की स्थिति में था, लेकिन टीम ने वापसी की और फाइनल तक पहुंची। मेलबर्न में खेले गए फाइनल में पाकिस्तान ने इंग्लैंड को 22 रन से हराकर पहली बार विश्व कप अपने नाम किया।

फाइनल में इमरान ने खुद को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजा और 72 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उन्होंने जावेद मियांदाद के साथ पारी को संभाला और पाकिस्तान को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। गेंदबाजी में भी उन्होंने इंग्लैंड की पारी का आखिरी विकेट हासिल किया।

यही वह क्षण था जिसने इमरान को पाकिस्तान में केवल क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय नायक बना दिया। उनकी कप्तानी, दबाव में फैसले लेने की क्षमता और टीम से बेहतर प्रदर्शन कराने की शैली को उनके खेल करियर की बड़ी ताकत माना गया।

न्यूट्रल अंपायर का विचार भी चर्चा में रहा

इमरान खान की रणनीतिक सोच का एक उदाहरण क्रिकेट में न्यूट्रल अंपायरों की व्यवस्था को लेकर उनके प्रयासों को भी माना जाता है। 1986 में पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज के दौरान भारतीय अंपायर वीके रामास्वामी और पिलू रिपोर्टर को अंपायरिंग के लिए बुलाया था। इसका उद्देश्य घरेलू अंपायरों को लेकर उठने वाले पक्षपात के आरोपों को कम करना था।

बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में न्यूट्रल अंपायरों की व्यवस्था को व्यापक रूप से अपनाया गया।

 ‘टाइगर टी-शर्ट’ का संदेश

25 मार्च 1992 को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप फाइनल से पहले टॉस के समय इमरान खान एक बार फिर टाइगर वाली टी-शर्ट पहनकर मैदान पर उतरे। यह वही प्रतीक था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने टूर्नामेंट के मुश्किल दौर में अपनी टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए किया था।

टॉस के दौरान जब उनसे इस टी-शर्ट के बारे में पूछा गया, तो इमरान ने कहा कि अगर उनकी टीम बाघों की तरह लड़ती है, तो उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ेगा कि टीम जीतती है या हारती है। उनके इस बयान में परिणाम से ज्यादा टीम के जुझारूपन और आत्मविश्वास पर जोर था।

बाद में पाकिस्तान ने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर पहली बार विश्व कप का खिताब जीता। इस तरह ‘Cornered Tigers’ वाली सोच पाकिस्तान की ऐतिहासिक जीत की कहानी का यादगार हिस्सा बन गई।

जब इमरान खान ने वसीम अकरम को खुद लड़ना सिखाया

वेस्टइंडीज के खिलाफ एक मैच में युवा वसीम अकरम ने सर विव रिचर्ड्स को तेज बाउंसर मारी, जिससे उनकी कैप गिर गई। इसके बाद अकरम ने रिचर्ड्स को स्लेज भी किया। रिचर्ड्स ने मैदान पर ही उन्हें चेतावनी दी।

दिन का खेल खत्म होने के बाद मामला और गरमा गया। रिचर्ड्स पैड पहने, बिना शर्ट के और हाथ में बल्ला लेकर पाकिस्तान के ड्रेसिंग रूम के बाहर अकरम का इंतजार कर रहे थे।

घबराए अकरम इमरान खान के पास पहुंचे और मदद मांगी। लेकिन इमरान ने उन्हें बचाने के बजाय कहा कि यह उनकी अपनी लड़ाई है और उन्हें खुद जाकर इसका सामना करना होगा। अकरम ने रिचर्ड्स के सामने जाकर माफी मांगी और मामला शांत हुआ।

इमरान का यह फैसला उनकी कप्तानी की सोच दिखाता है। वह खिलाड़ियों को हर मुश्किल से निकालने के बजाय उन्हें दबाव में खड़े रहना सिखाते थे। उनके लिए निडर खिलाड़ी बनाना, सिर्फ मैदान पर रणनीति बनाने से ज्यादा जरूरी था।

क्रिकेट के बाद समाजसेवा

क्रिकेट से संन्यास के बाद इमरान ने अपनी लोकप्रियता को सामाजिक कार्यों में लगाया। उनकी मां शौकत खानम की कैंसर से मृत्यु के बाद उन्होंने पाकिस्तान में कैंसर अस्पताल बनाने का संकल्प लिया। लंबे फंडरेसिंग अभियान के बाद शौकत खानम मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, लाहौर 29 दिसंबर 1994 को शुरू हुआ। अस्पताल के मुताबिक इसकी स्थापना में आम लोगों से लेकर बड़े दानदाताओं तक ने योगदान दिया।

बाद में इसका दूसरा अस्पताल पेशावर में 2015 में शुरू हुआ। शौकत खानम के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2026 में संस्था का वार्षिक बजट करीब 43.3 अरब पाकिस्तानी रुपये है और इसके 75 प्रतिशत मरीजों को वित्तीय सहायता मिलती है।

इमरान की दूसरी बड़ी पहल शिक्षा के क्षेत्र में रही। नमाल विश्वविद्यालय (Namal University) की शुरुआत 2008 में हुई, जिसका उद्देश्य खासकर ग्रामीण और कम सुविधा वाले युवाओं को उच्च शिक्षा का अवसर देना था।

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1996 में राजनीति में उतरे इमरान

क्रिकेट से अलग पहचान बनाने के बाद इमरान खान ने 1996 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की स्थापना की। शुरुआत में पार्टी का राजनीतिक प्रभाव सीमित रहा, लेकिन इमरान ने भ्रष्टाचार विरोध, सुशासन और एक नए पाकिस्तान की राजनीति को अपना मुख्य मुद्दा बनाया।

कई चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने राजनीतिक संघर्ष जारी रखा। 2013 के आम चुनाव में PTI एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और खैबर पख्तूनख्वा में सरकार बनाने में सफल रही।

इसके बाद 2018 के आम चुनाव में PTI सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और गठबंधन के साथ इमरान खान प्रधानमंत्री बने।

2018 से 2022 तक प्रधानमंत्री

इमरान खान ने अगस्त 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार विरोध, कल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक सुधारों को प्रमुख मुद्दा बनाया। हालांकि कार्यकाल के दौरान महंगाई, आर्थिक दबाव और राजनीतिक विरोध उनकी सरकार के लिए बड़ी चुनौतियां बने रहे।

अप्रैल 2022 में विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 10 अप्रैल 2022 को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ और इमरान खान प्रधानमंत्री पद से हट गए। वह पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद गंवाना पड़ा।

2019 भारत-पाकिस्तान तनाव में लिया बड़ा फैसला

इमरान खान के प्रधानमंत्री कार्यकाल की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौती फरवरी 2019 में सामने आई, जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ गया। भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान पाकिस्तान में पकड़े गए।

28 फरवरी 2019 को इमरान ने पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र में घोषणा की कि अभिनंदन को अगले दिन ‘peace gesture’ के तौर पर रिहा किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि वह तनाव को और बढ़ाना नहीं चाहते। बाद में अभिनंदन को भारत को सौंप दिया गया।

इस फैसले को इमरान के कार्यकाल के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में गिना गया, हालांकि भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव इसके बाद भी समाप्त नहीं हुआ।

COVID-19 के दौरान ‘स्मार्ट लॉकडाउन’

कोरोना महामारी के दौरान इमरान सरकार ने देशव्यापी लंबे लॉकडाउन के बजाय ‘स्मार्ट लॉकडाउन’ की नीति पर जोर दिया। इसके तहत संक्रमण वाले इलाकों में ज्यादा सख्ती और अन्य क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने की कोशिश की गई।

इमरान सरकार का तर्क था कि पाकिस्तान जैसे देश में पूरी तरह बंदी का सबसे ज्यादा असर गरीब और रोज कमाने वाले लोगों पर पड़ेगा। पाकिस्तान में WHO के प्रतिनिधि ने 2022 में देश की COVID-19 प्रतिक्रिया और National Command and Operation Centre के समन्वय की प्रशंसा भी की थी।

जेल से भी AI के जरिए राजनीति

इमरान खान की राजनीतिक रणनीति का सबसे आधुनिक उदाहरण जेल से चलाया गया डिजिटल अभियान है। 2023 में उनकी गिरफ्तारी के बाद PTI ने उनकी आवाज के AI-जनरेटेड वर्जन का इस्तेमाल करते हुए वर्चुअल रैली में भाषण प्रसारित किया।

रिपोर्टों के मुताबिक यह भाषण जेल से भेजे गए इमरान के हाथों से लिखे नोट्स पर आधारित था और AI से तैयार ऑडियो के जरिए समर्थकों तक पहुंचाया गया। यह घटना पाकिस्तान की राजनीति में डिजिटल कैंपेनिंग के एक नए दौर के उदाहरण के रूप में सामने आई।

इससे यह भी पता चला कि इमरान और PTI ने पारंपरिक रैलियों पर पाबंदियों और राजनीतिक दबाव के बीच सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया।

आज कहां हैं इमरान खान?

74वें जन्मदिन पर इमरान खान की कहानी का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि जिस व्यक्ति ने कभी मेलबर्न में विश्व कप ट्रॉफी उठाई थी और बाद में पाकिस्तान की सत्ता संभाली, वह आज जेल में है। वह अगस्त 2023 से हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कई मामले चल रहे हैं।

जनवरी 2025 में उन्हें अल-कादिर ट्रस्ट केस (Al-Qadir Trust Case) में 14 साल की सजा सुनाई गई थी। इमरान और उनकी पार्टी ने इस मामले में आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

दिसंबर 2025 में उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को तोशाखाना-II (Toshakhana-II) केस में भी 17-17 साल की सजा सुनाई गई। दोनों के पास फैसलों के खिलाफ अपील का विकल्प है।

हालांकि उनकी कानूनी स्थिति जटिल है। 5 अक्टूबर 2026 की रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक इमरान के खिलाफ कई मामलों में सजा पलटी या निलंबित की जा चुकी है, लेकिन वह जेल से बाहर नहीं आ सके हैं। इसी बीच उनकी पार्टी PTI के समर्थक उनकी रिहाई की मांग को लेकर खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च कर रहे हैं।

सरकार और PTI के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। PTI समर्थकों का मार्च ऐसे समय में शुरू हुआ है जब पाकिस्तान की राजनीति पहले से ही तनावपूर्ण है और सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी है।

अक्सर आती हैं मौत की खबरें

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के जेल में बंद होने के बाद से समय-समय पर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी मौत या तबीयत बेहद खराब होने की खबरें सामने आती रही हैं। इन दावों के पीछे अक्सर उनकी लंबे समय तक परिवार और पार्टी नेताओं से सीमित मुलाकात, जेल प्रशासन की ओर से जानकारी में देरी और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर उठती अटकलें रही हैं।

इमरान खान के समर्थक कई बार जेल में उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे माहौल में सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के दावे तेजी से फैल जाते हैं। हालांकि, किसी भी मौत की खबर को सही मानने से पहले पाकिस्तान सरकार, जेल प्रशासन, परिवार या उनकी पार्टी की आधिकारिक पुष्टि जरूरी होती है, जो कि फिलहाल अब तक सामने नहीं आई है।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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