Sunday, 04 October 2026
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पूर्वोत्तर भारत के विकास पर HRDS India और Arcadis का फोकस, 1 अरब यूरो कार्यक्रम की संभावना

HRDS India और Arcadis पूर्वोत्तर भारत में ग्रामीण विकास, जनजातीय आवास, कचरा प्रबंधन और टिकाऊ बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं

नई दिल्ली: पूर्वोत्तर भारत में सतत और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए एचआरडीएस इंडिया और नीदरलैंड स्थित आर्काडिस ने सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा तेज कर दी है। दोनों संगठन आवास, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

एचआरडीएस इंडिया प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय विकास कार्यक्रम के तहत 1 अरब यूरो तक के निवेश और विकास कार्यों की योजना पर काम कर रहा है। इस कार्यक्रम में पूर्वोत्तर भारत को विशेष प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही टिकाऊ कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण को भी प्रमुख क्षेत्र बनाया जाएगा।

प्रस्तावित साझेदारी एचआरडीएस इंडिया के स्थानीय और जमीनी अनुभव को आर्काडिस की अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता से जोड़ सकती है। आर्काडिस इंजीनियरिंग, डिजाइन, पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और परियोजना विकास के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखता है।

एचआरडीएस इंडिया के संस्थापक और सचिव अजी कृष्णन ने आर्काडिस के मुख्य परिचालन अधिकारी हंस डेकर के साथ एम्स्टर्डम में बैठक की। इस दौरान एचआरडीएस इंडिया की विकास परियोजनाओं, स्थानीय समुदायों और संगठन की जमीनी मौजूदगी पर चर्चा हुई।

प्रस्तावित सहयोग में जनजातीय और ग्रामीण आवास को विशेष महत्व दिया जा सकता है। एचआरडीएस इंडिया की जनजातीय आवास परियोजना के तहत समुदायों के लिए किफायती और पर्यावरण अनुकूल घर विकसित करने की योजना है।

आर्काडिस इस तरह की परियोजनाओं में टिकाऊ निर्माण, डिजाइन, बुनियादी ढांचे की योजना और तकनीकी सहायता के जरिए योगदान दे सकता है। दोनों पक्ष सामुदायिक सुविधाओं, कृषि विकास, मिट्टी की जांच और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर भी काम करने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

आर्काडिस ने नई दिल्ली स्थित एचआरडीएस इंडिया मुख्यालय में अपने विशेषज्ञों और सहयोगियों की टीम भेजने में रुचि दिखाई है। प्रस्तावित यात्रा के दौरान मौजूदा परियोजनाओं का आकलन किया जाएगा और तकनीकी जरूरतों की पहचान की जाएगी।

कचरा प्रबंधन भी प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। दोनों संगठन बेहतर कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और पर्यावरण अनुकूल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक मॉडल विकसित करने पर विचार कर रहे हैं।

अजी कृष्णन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और स्थानीय अनुभव का संयोजन समुदायों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार टिकाऊ समाधान विकसित करने में मदद कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत में विकास के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया।

अब दोनों संगठन शुरुआती परियोजनाओं और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए ऐसे मॉडल तैयार करने का लक्ष्य है जिन्हें भविष्य में बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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