Thursday, 01 October 2026
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PNB के करेंसी चेस्ट में ₹17.29 करोड़ की नकली करेंसी! NIA ने बैंक मैनेजर को किया गिरफ्तार, नेपाल कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता

एक कैश शॉर्टेज से शुरू हुई जांच ने PNB के करेंसी चेस्ट में ₹17.29 करोड़ की कथित नकली करेंसी का राज खोल दिया। ऑडिट और CCTV के बाद जांच एजेंसियों को कई अहम सुराग मिले।

नई दिल्ली/सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से बरामद करीब ₹17.29 करोड़ की कथित नकली भारतीय मुद्रा के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मामले में फरार चल रहे बैंक कर्मचारी अमित कुमार को गिरफ्तार किया है। वे उस समय करेंसी चेस्ट के संयुक्त संरक्षक (Joint Custodian) और बैंक मैनेजर के पद पर तैनात थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।

यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि नकली नोट किसी व्यक्ति के पास, किसी वाहन से या किसी सीमा चौकी पर नहीं, बल्कि बैंक के करेंसी चेस्ट के भीतर मिले। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित नकली करेंसी बैंकिंग सिस्टम तक कैसे पहुंची और क्या इसका कुछ हिस्सा बैंक शाखाओं या एटीएम के जरिए बाजार में भी पहुंचा था। हालांकि, इस बात की अभी पुष्टि नहीं हुई है कि कितनी नकली मुद्रा वास्तव में चलन में पहुंची।

मामले में संभावित नेपाल कनेक्शन की भी जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक जांचकर्ताओं ने नेपाल से किसी निश्चित लिंक की पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल जांच की एक दिशा के तौर पर ही देखा जा रहा है।

चंडीगढ़ से हुई अमित कुमार की गिरफ्तारी

NIA ने अमित कुमार को सोमवार, 7 सितंबर को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे चंडीगढ़ स्थित विशेष NIA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी, ताकि उसे आगे की कार्रवाई के लिए लखनऊ स्थित विशेष NIA अदालत के अधिकार क्षेत्र में ले जाया जा सके।

अमित कुमार इस मामले में नामजद आरोपियों में शामिल था और घटना सामने आने के बाद से फरार था। NIA के मुताबिक वह उस समय सहारनपुर स्थित PNB करेंसी चेस्ट का मैनेजर और उसका संयुक्त संरक्षक था।

एजेंसी अब उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद नकदी की निगरानी और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किस तरह तय थी और संदिग्ध नोट वहां तक पहुंचने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

PNB के तीन अधिकारी जांच के घेरे में

प्रारंभिक जांच के दौरान तीन PNB अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई। इनमें रवि कुमार कांसे, सुशील कुमार और अमित कुमार शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बैंक ने प्रारंभिक जांच में इन तीनों की कथित भूमिका सामने आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया था।

रवि कुमार कांसे वरिष्ठ डिविजनल मैनेजर बताए गए हैं, जबकि सुशील कुमार सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट से जुड़े मैनेजर और अमित कुमार जगाधरी करेंसी चेस्ट के मैनेजर थे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किए थे, क्योंकि आशंका जताई गई थी कि वे नेपाल की ओर जा सकते हैं।

जांच के दौरान विशेष जांच दल (SIT) और क्राइम ब्रांच ने तीनों से जुड़े परिसरों की तलाशी भी ली। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए। जांच एजेंसियां इन सामग्रियों के जरिए आरोपियों के संपर्क, गतिविधियों और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही हैं।

29 अगस्त को सामने आया पूरा मामला

इस मामले की शुरुआत 29 अगस्त 2026 को हुई। सहारनपुर के सदर बाजार थाने में PNB के करेंसी चेस्ट से करीब ₹17.29 करोड़ की कथित नकली भारतीय मुद्रा मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया। शुरुआती एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 178 लगाई गई थी।

इसके बाद शुरुआती जांच में बैंक के तीन कर्मचारियों की कथित भूमिका सामने आई और PNB ने उन्हें निलंबित कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे चलकर NIA ने जांच अपने हाथ में ले ली और 3 सितंबर 2026 को मामले को दोबारा दर्ज किया। यह मामला NIA में RC-02/2026/NIA/LKW के रूप में दर्ज है।

NIA अब केवल नकली नोट बरामद होने तक जांच सीमित नहीं रख रही है। एजेंसी यह पता लगाने की भी कोशिश कर रही है कि नकली नोटों का स्रोत क्या था, उन्हें किस तरह हासिल किया गया, करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचाया गया और क्या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

ऐसे खुला नकली करेंसी का राज

मामले की शुरुआत एक कैश शॉर्टेज से हुई। सहारनपुर के घंटाघर स्थित PNB शाखा से जयपुर स्थित RBI करेंसी चेस्ट को भेजी गई मुद्रा में कमी का पता चला। इसके बाद बैंक स्तर पर जांच शुरू हुई।

इसके बाद 9 अगस्त से ऑडिट शुरू हुआ। ऑडिट के दौरान अधिकारियों को 500 रुपये के नोटों की 148 गड्डियां संदिग्ध मिलीं। प्रत्येक गड्डी में 1,000 नोट बताए गए हैं। शुरुआती गणना के अनुसार इन नोटों की कीमत करीब ₹7.40 करोड़ थी।

लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ संदिग्ध नकली नोटों की कुल अनुमानित कीमत बढ़ती गई और यह आंकड़ा करीब ₹17.29 करोड़ तक पहुंच गया। इस तरह शुरुआती तौर पर सामने आए आंकड़े से कहीं बड़ा मामला सामने आया।

CCTV फुटेज ने बढ़ाया शक

जांच में CCTV फुटेज भी महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक फुटेज में पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को करेंसी चेस्ट के भीतर मुद्रा की गड्डियों से नोट निकालते हुए देखा गया। इससे जांचकर्ताओं को बैंक के अंदर नकदी की आवाजाही और संभावित हेरफेर की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली।

यही कारण है कि NIA अब दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों को जोड़कर कथित पूरी साजिश की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।

₹111 करोड़ की खेप भी जांच के केंद्र में

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 6 जुलाई 2026 को सहारनपुर से RBI के जयपुर कार्यालय भेजी गई करीब ₹111 करोड़ की मुद्रा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस खेप में ₹500 के 1,900 बंडल और ₹200 के 800 बंडल थे।

अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस रकम की पैकिंग और डिस्पैच की प्रक्रिया कैसी थी और संदिग्ध नोट करेंसी चेन में किस चरण पर शामिल हुए।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस खेप से जुड़े कुछ काम एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर को सौंपे गए थे। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि करेंसी चेस्ट के भीतर नकदी तक किस-किस व्यक्ति की पहुंच थी और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।

क्या नकली नोट बैंक शाखाओं और ATM तक भी पहुंचे?

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल यही है कि ₹17.29 करोड़ की कथित नकली करेंसी में से कितना हिस्सा करेंसी चेस्ट से बाहर गया।

जांच एजेंसियां इस संभावना को भी देख रही हैं कि संदिग्ध नोटों में से कुछ रकम का इस्तेमाल बैंक शाखाओं या एटीएम में भी हो सकता है। लेकिन फिलहाल ऐसी मुद्रा की वास्तविक मात्रा के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

यही वजह है कि जांचकर्ता करेंसी चेस्ट से जुड़े पुराने लेन-देन, नकदी की आवाजाही, शाखाओं को भेजी गई रकम और एटीएम में डाली गई नकदी के रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहे हैं।

अगर जांच में यह साबित होता है कि नकली नोट बैंकिंग चैनल के जरिए बाहर तक पहुंचे, तो मामला केवल बैंक के अंदर नकदी की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कथित तौर पर नकली मुद्रा के प्रसार का बड़ा मामला बन सकता है।

नेपाल कनेक्शन की भी पड़ताल

इस पूरी जांच में नेपाल एंगल भी सामने आया है। पुलिस ने तीनों बैंक अधिकारियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था और उनके नेपाल भागने की आशंका जताई गई थी। इसी वजह से जांचकर्ताओं ने उनके संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

सहारनपुर की भौगोलिक स्थिति और नकली भारतीय मुद्रा से जुड़े पुराने सीमा-पार नेटवर्क की संभावना को देखते हुए जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपियों के ऐसे किसी व्यक्ति या समूह से संपर्क थे, जो नेपाल सीमा के आसपास या उसके पार सक्रिय हो सकते हैं।

क्या होती है करेंसी चेस्ट?

इस मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि करेंसी चेस्ट सामान्य बैंक शाखा से अलग होता है। यह ऐसी व्यवस्था है जहां बड़ी मात्रा में नकदी को सुरक्षित रखा और अन्य बैंक शाखाओं तथा RBI के बीच मुद्रा की आवाजाही को व्यवस्थित किया जाता है।

यही वजह है कि किसी करेंसी चेस्ट के भीतर इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नकली नोटों का मिलना गंभीर सवाल खड़े करता है। बैंकिंग सिस्टम में प्रवेश करने से पहले नोटों की जांच और सुरक्षित तरीके से उनका प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है।

RBI के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, करेंसी चेस्ट और बैंक के बैक ऑफिस में आने वाली मुद्रा की मशीनों से जांच की जानी चाहिए। संदिग्ध नोटों को अलग करके उनकी मैनुअल जांच भी की जाती है।

RBI के नियम यह भी कहते हैं कि सही तरीके से जांचे और छांटे गए नोटों को ही ATM या जनता को भुगतान के लिए जारी किया जाना चाहिए। करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलना इसलिए बैंकिंग नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

क्या कहते हैं प्रावधान?

इस मामले में शुरुआती एफआईआर BNS की धारा 178 के तहत दर्ज की गई थी। यह धारा मुद्रा नोट या बैंक नोट की जालसाजी से संबंधित है।

भारतीय न्याय संहिता के अनुसार, किसी मुद्रा या बैंक नोट की नकली प्रति तैयार करना या जानबूझकर उसकी जालसाजी की प्रक्रिया में हिस्सा लेना गंभीर अपराध है। इसके लिए आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

वहीं BNS की धारा 179 नकली नोट को असली बताकर इस्तेमाल करने, खरीदने, बेचने या उसके कारोबार से संबंधित है, जबकि धारा 180 में नकली नोट को यह जानते हुए अपने पास रखने से जुड़े प्रावधान हैं कि वह नकली है।

नकली करेंसी क्यों है गंभीर खतरा?

नकली मुद्रा केवल आर्थिक धोखाधड़ी का मामला नहीं है। बड़े पैमाने पर नकली नोटों का प्रसार मुद्रा व्यवस्था और लोगों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।

अगर नकली नोट बैंकिंग चैनल में प्रवेश कर जाएं तो उन्हें पहचानना और उनकी आवाजाही का पता लगाना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इससे बैंकों, कारोबारियों और आम लोगों के लिए वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है।

NIA की जिम्मेदारियों में ऐसे मामलों की जांच भी शामिल है जिनमें नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी और प्रसार के अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय संबंध सामने आ सकते हैं। एजेंसी खुद बताती है कि नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी और उसका प्रसार कई मामलों में सीमा-पार नेटवर्क तथा अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़ सकता है।

जांच अभी जारी, कई कड़ियां बाकी

NIA ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और एजेंसी कथित पूरी साजिश का पता लगाने, अन्य आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।

अमित कुमार की गिरफ्तारी इस मामले में पहला बड़ा कदम जरूर है, लेकिन जांच की असली दिशा आगे मिलने वाले सबूत तय करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और करेंसी की आवाजाही से जुड़े डेटा की जांच के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹17.29 करोड़ की कथित नकली मुद्रा एक बैंक करेंसी चेस्ट के भीतर मिली और मामले में एक PNB मैनेजर गिरफ्तार हो चुका है। वहीं नेपाल कनेक्शन और नकली नोटों के संभावित प्रसार की जांच अभी जारी है। जब तक NIA की जांच पूरी नहीं होती, आरोपों में शामिल व्यक्तियों की भूमिका को अंतिम रूप से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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