Tuesday, 20 October 2026
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ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर शिकंजा, अब यूजर्स तय करेंगे क्या देखना है! नियम न मानने पर कंपनियों को देना होगा भारी जुर्माना

अब सोशल मीडिया पर क्या देखना है, यह फैसला एल्गोरिदम के बजाय यूजर कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया ने ऐसी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है, जिसमें फीड को नियंत्रित करने का विकल्प मिलेगा। जानिए पूरी खबर

कैनबरा: सोशल मीडिया पर आपकी स्क्रीन पर क्या दिखाई देगा, यह फैसला अब सिर्फ तकनीकी कंपनियों के एल्गोरिदम नहीं करेंगे। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और ऑनलाइन नुकसान को देखते हुए एक ऐसा प्रस्ताव सामने रखा है, जिसके तहत यूजर्स को यह चुनने का अधिकार दिया जाएगा कि वे एल्गोरिदम द्वारा सुझाई गई सामग्री देखना चाहते हैं या सिर्फ उन्हीं लोगों और क्रिएटर्स की पोस्ट देखेंगे, जिन्हें उन्होंने खुद फॉलो किया है।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की सरकार ने मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर’ कानून का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। इसी प्रस्ताव के तहत ‘माय फीड, माय वे’ (My Feed, My Way) नाम की पहल लाई गई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य इंटरनेट पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाना नहीं, बल्कि यूजर्स को अपने डिजिटल अनुभव पर ज्यादा नियंत्रण देना है।

यह कदम ऑस्ट्रेलिया के उस फैसले के बाद आया है, जिसके तहत देश ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया खातों पर दुनिया के सबसे कड़े नियमों में से एक लागू किया है। अब सरकार का लक्ष्य केवल बच्चों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वयस्कों को भी यह अधिकार देना है कि सोशल मीडिया कंपनियां उनके लिए सामग्री कैसे चुनती हैं, इसमें वे कितना नियंत्रण चाहते हैं।

क्या है ‘माय फीड, माय वे’?

नई प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा ‘माय फीड, माय वे’ है। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नए और मौजूदा यूजर्स को एक स्पष्ट विकल्प देना होगा।

अब 16 वर्ष से अधिक उम्र के यूजर्स के सामने दो विकल्प होंगे। पहला विकल्प होगा कि वे प्लेटफॉर्म के व्यक्तिगत अनुशंसा वाले एल्गोरिदम को अपने डिफॉल्ट फीड के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दें। ऐसे में प्लेटफॉर्म यूजर की गतिविधियों, पसंद और ऑनलाइन व्यवहार के आधार पर पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री सुझाता रहेगा।

दूसरा विकल्प एल्गोरिदम से बाहर निकलने का होगा। इसमें यूजर को मुख्य फीड में केवल उन्हीं दोस्तों, क्रिएटर्स और खातों की सामग्री दिखाई जाएगी, जिन्हें वह खुद फॉलो करता है। यानी प्लेटफॉर्म की ओर से पसंद का अनुमान लगाकर नई सामग्री लगातार धकेलने की भूमिका कम हो जाएगी।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि यह विकल्प सिर्फ एक बार दिखाकर खत्म नहीं होगा। यूजर्स को वास्तविक और लगातार उपलब्ध विकल्प देना होगा और प्लेटफॉर्म को उनके फैसले का सम्मान करना होगा।

एल्गोरिदम पर इतना विवाद क्यों?

आज के ज्यादातर बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म केवल लोगों द्वारा फॉलो किए गए खातों की पोस्ट नहीं दिखाते। वे मशीन लर्निंग और अनुशंसा प्रणालियों के जरिए यह अनुमान लगाते हैं कि यूजर किस सामग्री पर ज्यादा देर रुकेगा, किस वीडियो को देखेगा, किस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देगा और वह किस सामग्री को आगे साझा कर सकता है।

यही व्यवस्था सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बेहद प्रभावी है, क्योंकि ज्यादा आकर्षक सामग्री का मतलब अक्सर प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताना और ज्यादा विज्ञापन देखना होता है।

लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब किसी व्यक्ति की थोड़ी-सी रुचि उसे लगातार उसी तरह की सामग्री की ओर ले जाने लगे। ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी आयुक्त ने भी अपनी अनुशंसा में कहा है कि अनुशंसा प्रणालियां सकारात्मक सामग्री के साथ-साथ हानिकारक सामग्री को भी बढ़ा सकती हैं। यदि यूजर किसी हानिकारक सामग्री से जुड़ता है तो वही जुड़ाव भविष्य में उससे मिलती-जुलती या उससे ज्यादा तीखी सामग्री दिखाने का आधार बन सकता है।

यानी किसी व्यक्ति ने जिस सामग्री को केवल एक बार देखा, एल्गोरिदम उसे उसकी वास्तविक पसंद मान सकता है और आगे उसी विषय की कई पोस्ट दिखा सकता है।

‘डूम-स्क्रॉलिंग’ और लगातार स्क्रीन पर बने रहने का सवाल

सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर बहस केवल गलत सूचना या आपत्तिजनक सामग्री तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि क्या प्लेटफॉर्म का डिजाइन लोगों को जरूरत से ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है।

वीडियो खत्म होते ही दूसरा वीडियो शुरू हो जाता है। एक पोस्ट देखने के बाद उससे जुड़ी दस दूसरी पोस्ट सामने आ जाती हैं। यूजर ने जिस विषय को खोजा भी नहीं, वह भी उसके सामने आ सकता है।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार का तर्क है कि डिजिटल सेवाओं को भी दूसरे क्षेत्रों की तरह सुरक्षा की बुनियादी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। संचार मंत्री अनिका वेल्स ने इसकी तुलना कार, खिलौने और भोजन जैसी चीजों के लिए मौजूद सुरक्षा मानकों से की है।

सरकार चाहती है कि डिजिटल कंपनियां यह साबित करें कि उन्होंने अपने प्लेटफॉर्म से पैदा होने वाले संभावित नुकसान को पहचानने और कम करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं।

क्या है ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर’?

प्रस्तावित ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर’ का मूल विचार यह है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते कि यूजर्स ने खुद कोई सामग्री देखी या उस पर प्रतिक्रिया दी।

डिजिटल सेवाओं को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद जोखिमों की पहचान करनी होगी और उनसे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कदम उठाने होंगे।

सरकार के अनुसार, प्लेटफॉर्म को यह भी दस्तावेज तैयार करना होगा कि उसने ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स को होने वाले संभावित नुकसान की पहचान करने के बाद क्या कदम उठाए और वे कदम समय के साथ प्रभावी बने हुए हैं या नहीं।

बच्चों के लिए और सख्त नियम

प्रस्तावित कानून केवल सोशल मीडिया एल्गोरिदम तक सीमित नहीं है। सरकार ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए डिजिटल सेवाओं पर भी अतिरिक्त सुरक्षा प्रस्तावित की है।

ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, ऐप और एआई चैटबॉट जैसी डिजिटल सेवाओं को ऐसे डिजाइन फीचर्स से बच्चों की रक्षा करनी होगी, जो उनमें लत बढ़ा सकते हैं या उनके आत्मसम्मान पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

इसके अलावा बच्चों को ऐसी सामग्री से बचाने का प्रस्ताव है जो—

  • खाने के विकारों को बढ़ावा देती हो,
  • महिलाओं के खिलाफ शत्रुतापूर्ण विचारों को बढ़ावा देती हो,
  • अश्लील सामग्री हो,
  • अपराध या जानलेवा स्टंट को महिमामंडित करती हो,
  • गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट, दुर्व्यवहार या साइबर बुलिंग को बढ़ावा देती हो।

इसका मतलब यह है कि ऑस्ट्रेलिया डिजिटल सुरक्षा को केवल सोशल मीडिया ऐप्स का मुद्दा नहीं मान रहा। सरकार इसे पूरे डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ रही है।

16 साल से कम उम्र के बच्चों पर पहले ही लग चुका है प्रतिबंध

ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर ऐतिहासिक प्रतिबंध लागू किया था।

10 दिसंबर 2025 से उम्र-प्रतिबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के लोगों को खाते रखने से रोकने के लिए उचित कदम उठाना अनिवार्य हो गया। इस कानून के तहत बच्चों या उनके माता-पिता पर जुर्माना नहीं लगाया जाता, बल्कि जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की है। नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 337.90 करोड़ रुपये) तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी के अनुसार, दिसंबर 2025 के मध्य तक उम्र-प्रतिबंधित प्लेटफॉर्मों ने देशभर में 47 लाख से अधिक 16 साल से कम उम्र वाले खातों को हटा दिया या उनकी पहुंच बंद कर दी थी।

सरकार अब इसी नीति को आगे बढ़ाते हुए वयस्क यूजर्स के लिए भी डिजिटल सुरक्षा और नियंत्रण का दायरा बढ़ाना चाहती है।

पांच मिलियन से ज्यादा खाते हटाए गए

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने 8 सितंबर को कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों वाले सोशल मीडिया कानून के तहत 50 लाख से अधिक खाते हटाए या निष्क्रिय किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम समुदाय की उस मांग के जवाब में उठाया गया था, जिसमें बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्मों के लिए केवल उपभोक्ता या डेटा स्रोत की तरह देखे जाने का विरोध किया गया था।

सरकार के अनुसार, 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध के बाद अब अगला कदम डिजिटल सेवाओं के डिजाइन और उनके एल्गोरिदम से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना है।

नियम तोड़ने पर 109.2 मिलियन डॉलर तक का जुर्माना

प्रस्तावित डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 10.92 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। भारतीय मुद्रा में यह राशि विनिमय दर के अनुसार कई सौ करोड़ रुपये के बराबर बैठती है।

इस प्रावधान का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि सरकार केवल दिशा-निर्देश जारी करने के बजाय कंपनियों पर वास्तविक आर्थिक दबाव डालना चाहती है।

नियम लागू होने के बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर केवल स्वैच्छिक कदम उठाना पर्याप्त नहीं होगा।

भारत समेत दुनिया के लिए क्यों अहम है यह कदम?

ऑस्ट्रेलिया का प्रयोग केवल वहां के सोशल मीडिया यूजर्स तक सीमित नहीं रहेगा। यदि यह कानून लागू होता है और व्यवहार में प्रभावी साबित होता है, तो दूसरे देश भी इससे सीख ले सकते हैं।

भारत समेत दुनिया के कई देशों में सोशल मीडिया पर गलत सूचना, नफरत फैलाने वाली सामग्री, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, साइबर बुलिंग, एआई से बनी नकली सामग्री और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बहस चल रही है।

भारत में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के लिए नियम और आईटी कानूनों के तहत कई जिम्मेदारियां तय हैं, लेकिन एल्गोरिदम किस तरह सामग्री को प्राथमिकता देता है और यूजर को उसे नियंत्रित करने का कितना अधिकार मिलना चाहिए, यह बहस अभी भी विकसित हो रही है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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