Monday, 19 October 2026
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शिक्षा में AI और मानवीय मूल्यों के संतुलित समन्वय पर विशेषज्ञों का मंथन

नई दिल्ली: प्रबंधन शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एमईआरआई), जनकपुरी के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा 13 से 18 जुलाई तक आयोजित छह दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का समापन इस निष्कर्ष के साथ हुआ कि शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उसके साथ मानवीय मूल्य, नैतिकता और स्वतंत्र सोच का संतुलन भी कायम रखा जाए।

कार्यक्रम में देश-विदेश के लगभग 70 शिक्षकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में त्रिवेणी एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष आई. पी. अग्रवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा जगत के लिए अनेक नई संभावनाएं लेकर आई है, लेकिन इसके उपयोग में विवेक और उत्तरदायित्व की भी उतनी ही आवश्यकता है। मेरी समूह के उपाध्यक्ष प्रो. ललित अग्रवाल ने कहा कि नई तकनीक को अपनाते समय शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में आलोचनात्मक दृष्टि, नैतिक चेतना और सृजनात्मक क्षमता का विकास होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षण, शोध और संस्थागत गुणवत्ता सुधार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों को अध्ययन-अध्यापन, शोध सामग्री के विश्लेषण, पाठ्यक्रम निर्माण, साहित्य समीक्षा तथा शैक्षणिक लेखन में सहायक विभिन्न डिजिटल साधनों का व्यावहारिक परिचय कराया गया। साथ ही शिक्षा में आंकड़ों के विश्लेषण, गुणवत्ता मूल्यांकन और संस्थागत मानकों की भूमिका पर भी विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़े नैतिक पक्ष, जवाबदेही, पारदर्शिता, व्यक्तिगत आंकड़ों की सुरक्षा और नियामकीय व्यवस्थाओं पर विशेष बल दिया। उनका कहना था कि तकनीक का उपयोग मानव हितों को केंद्र में रखकर ही किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में नेतृत्व क्षमता, भावनात्मक परिपक्वता, संवाद कौशल, विवाद प्रबंधन और सामूहिक कार्य संस्कृति जैसे विषयों पर भी संवाद हुआ। सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए नेतृत्व, अनुशासन और नैतिक निर्णय क्षमता के महत्व को रेखांकित किया।

प्रतिभागियों को आत्मचिंतन, सहयोगात्मक शिक्षण और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए।

समापन दिवस पर छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धति, उत्तरदायी डिजिटल आचरण और तकनीक के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी क्षमता को बढ़ाने वाला साधन है।

समापन समारोह में प्रो. ललित अग्रवाल, प्रो. (डॉ.) राकेश खुराना, लेफ्टिनेंट जनरल पी. जे. एस. पन्नू (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल मनजीत सिंह मोखा (सेवानिवृत्त), प्रो. रामाकांत द्विवेदी, डॉ. दीपशिखा कालरा, एयर कमोडोर हिमांशु गोपाल (सेवानिवृत्त) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वक्ताओं ने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षकों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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