डूसू चुनाव 2026 में छात्र आवास, कैंपस सुरक्षा, फीस, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप, उपस्थिति और परिवहन जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। सत्या निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना के बाद सुरक्षित और किफायती आवास भी प्रमुख मुद्दा बना।
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। जारी चुनाव नतीजों के अनुसार यश डबास ने अध्यक्ष, रिया छावड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष चुने गए। इस तरह इस बार के केंद्रीय पैनल में ABVP के तीन और एक निर्दलीय उम्मीदवार विजेता रहे।
डूसू चुनाव के लिए मतदान 18 सितंबर 2026 को हुआ था और मतगणना 19 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में शुरू हुई। इस बार करीब 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 39.45 प्रतिशत से अधिक था।

अध्यक्ष पद पर यश डबास की जीत
अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास और NSUI के विजय शंकर मीणा के बीच मुख्य मुकाबला था। AISA-SFI गठबंधन से अनन्या रतूड़ी भी मैदान में थीं। चुनाव से पहले कुल सात उम्मीदवार अध्यक्ष पद के लिए मैदान में थे।
अंतिम परिणाम के मुताबिक यश डबास ने 1,044 वोट के अंतर से अध्यक्ष पद के लिए जीत दर्ज की।
हालांकि मतगणना के दौरान दोनों के बीच मुकाबला कई बार बदलता रहा। शुरुआती दौर में डबास आगे थे, दूसरे दौर में मीणा ने बढ़त बनाई और बाद के राउंड में भी दोनों के बीच अंतर काफी कम रहा। 14वें राउंड में मीणा केवल एक वोट से आगे थे, जबकि 15वें और 16वें राउंड में डबास फिर आगे निकल गए। 16वें राउंड के बाद डबास के 18,786 और मीणा के 18,707 वोट दर्ज किए गए थे।
यश डबास दिल्ली के कंझावला इलाके के रहने वाले हैं और फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग से मास्टर्स कर रहे हैं। ABVP के अनुसार, वह टेनिस में भी सक्रिय रहे हैं और स्पेन, ऑस्ट्रेलिया तथा सर्बिया में आयोजित ITF प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत
उपाध्यक्ष पद का परिणाम इस चुनाव की प्रमुख घटनाओं में रहा। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। उनके सामने ABVP के ईशू मौर्य, NSUI के वीर चतरथ और AISA-SFI के अक्षत शिखर सहित अन्य उम्मीदवार थे।
जारी अंतिम परिणाम के अनुसार दीपांशु शौकीन ने 13,527 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम ने चारों केंद्रीय पदों में एक सीट को संगठन से बाहर के उम्मीदवार के खाते में पहुंचाया।
मतगणना के शुरुआती राउंड से ही शौकीन लगातार आगे चल रहे थे। छठे राउंड में उन्हें 9,379 वोट मिले थे, जबकि ABVP के ईशू मौर्य के 4,845 वोट थे। सातवें राउंड में शौकीन के वोट बढ़कर 11,347 हो गए। दसवें राउंड तक वह 15,591 वोट के साथ आगे थे।
शौकीन के चुनाव अभियान की चर्चा इसलिए भी हुई क्योंकि उन्होंने पारंपरिक छात्र संगठनों के पैनल के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने प्रचार के दौरान नंगे पैर कैंपेन किया और छात्र जीवन से जुड़े मुद्दों को अपने अभियान का हिस्सा बनाया।
सचिव पद पर रिया छावड़ी विजयी
सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी ने जीत दर्ज की। उनके मुख्य मुकाबले में NSUI की नम्रता चौधरी थीं। AISA-SFI की स्टांजिन देसक्यॉन्ग भी इस पद की प्रमुख उम्मीदवारों में थीं।
नतीजों के अनुसार रिया छावड़ी ने 5,883 वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
मतगणना के शुरुआती राउंड से ही रिया बढ़त बनाए हुए थीं। सातवें राउंड में उनके 7,584 वोट थे, जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 5,445 वोट मिले थे। दसवें राउंड तक रिया के खाते में 9,953 और नम्रता के खाते में 7,712 वोट दर्ज किए गए।
रिया छावड़ी श्री अरबिंदो कॉलेज की BA प्रोग्राम की छात्रा हैं और इंटर-कॉलेज स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुकी हैं।
लक्ष्य राज सिंह बने संयुक्त सचिव
संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की। इस पद पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा क्योंकि ABVP के लक्ष्य राज सिंह के साथ NSUI के गोपाल चौधरी और समाजवादी छात्र सभा (SCS) से जुड़े विशेष यादव भी मजबूत दावेदार थे।
इस चुनाव में लक्ष्य राज सिंह ने 129 वोट के अंतर से जीत हासिल की। यानी यह चारों केंद्रीय पदों में सबसे करीबी अंतर वाला मुकाबला रहा।
मतगणना के दौरान इस सीट पर बढ़त कई बार बदलती रही। सातवें राउंड में विशेष यादव 6,165 वोट के साथ आगे थे, जबकि लक्ष्य राज सिंह 5,386 और गोपाल चौधरी 5,339 वोट पर थे। 13वें राउंड में गोपाल चौधरी आगे निकल गए थे और विशेष यादव भी लक्ष्य से आगे थे। 15वें और 16वें राउंड तक मुकाबला फिर बदलता रहा। 16वें राउंड में गोपाल चौधरी 12,647 वोट के साथ लक्ष्य राज सिंह से आगे थे, जबकि विशेष यादव 12,638 वोट पर थे।
लक्ष्य राज सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। ABVP के मुताबिक, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हैंडबॉल खेल चुके हैं और एशियाई खेलों के साथ-साथ विश्व चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
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इस बार के चुनाव में कौन से मुद्दे रहे अहम?
DUSU चुनाव केवल छात्र संगठनों के बीच राजनीतिक मुकाबला नहीं रहा। इस बार छात्र आवास, कैंपस सुरक्षा, फीस, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप, उपस्थिति, परिवहन और विश्वविद्यालय की सुविधाएं प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सोशल मीडिया की पहुंच, जातीय और क्षेत्रीय लामबंदी तथा चुनावी प्रचार में मुफ्त सामान बांटे जाने की चर्चा भी चुनाव के दौरान रही।
छात्र आवास का मुद्दा विशेष रूप से चर्चा में रहा। सत्या निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शामिल थे। इस घटना के बाद सुरक्षित और किफायती छात्र आवास को लेकर सवाल चुनावी बहस में भी प्रमुखता से आए।
ABVP ने अपने चुनावी घोषणापत्र में छात्र आवास, सुरक्षा, अकादमिक सुधार और करियर से जुड़े अवसरों पर जोर दिया था।
इस बार के मतदान की आंकड़ा
2026 के चुनाव में करीब 1.51 लाख से अधिक छात्र मतदान के लिए पात्र थे। मतदान दो चरणों में हुआ। दिन की कक्षाओं के छात्रों के लिए मतदान सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम की कक्षाओं के लिए 3 बजे से शाम 7:30 बजे तक मतदान कराया गया।
कुल मतदान प्रतिशत 40.46 फीसदी रहा, जो 2025 के करीब 39.45 फीसदी मतदान से अधिक था।
हालांकि DUSU चुनाव में दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को मतदान का अधिकार नहीं है। School of Open Learning और Non-Collegiate Women’s Education Board के करीब छह लाख छात्रों को मतदान अधिकार दिए जाने की मांग को लेकर क्रांतिकारी युवा संगठन ने चुनाव के दिन विरोध प्रदर्शन भी किया था।
चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप
DUSU चुनाव से ठीक पहले ABVP और NSUI के बीच हमले और धमकी के आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए थे। ABVP ने आरोप लगाया था कि NSUI से जुड़े लोग उसके सदस्यों के एक आवासीय बैठक स्थल पर पहुंचे और हमला किया।
NSUI ने दूसरी तरफ ABVP पर अपने उम्मीदवारों विजय शंकर मीणा और गोपाल चौधरी के आवासों को निशाना बनाने और उन्हें डराने-धमकाने का आरोप लगाया था। दोनों संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की मांग की थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
इस साल के DUSU चुनाव में चुनावी आचार संहिता और प्रचार के तरीके को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणियां भी महत्वपूर्ण रहीं। कोर्ट ने प्रचार के दौरान कथित हिंसा, बाहरी लोगों की मौजूदगी, बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों, बड़े काफिलों और अन्य नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई।
18 सितंबर को अदालत ने 140 छात्र उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए और चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी। पुलिस ने अदालत को बताया कि कार्रवाई के दौरान 49 वाहन जब्त किए गए, 5,400 से अधिक चालान किए गए और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले अदालत ने यह भी कहा था कि छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ नियमों का पालन जरूरी है। कोर्ट ने DU प्रशासन और दिल्ली पुलिस से चुनावी नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
DUSU की कहानी कितनी पुरानी?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का इतिहास आजादी के शुरुआती वर्षों से जुड़ा है। उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार 6 अगस्त 1947 को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने कार्यकारी परिषद के सामने छात्रों की ओर से विश्वविद्यालय छात्रसंघ बनाने की इच्छा का उल्लेख किया था। इसके लिए शुरुआती स्तर पर 150 रुपये की आर्थिक सहायता का प्रस्ताव भी रखा गया था।
DUSU का पहला चुनाव 1954 में हुआ था। इसके बाद छात्रसंघ दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण मंच बनता गया। 1972-73 में छात्र प्रतिनिधित्व और चुनाव प्रक्रिया को लेकर बड़ा आंदोलन हुआ था। 1990-91 में देश की राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों का असर भी DUSU चुनाव पर पड़ा और चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
समय के साथ DUSU का चुनाव केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा। ABVP और NSUI जैसे संगठनों से जुड़े छात्र नेताओं की सक्रियता ने इसे राष्ट्रीय राजनीति की नर्सरी के तौर पर भी चर्चा में रखा है।
