Thursday, 22 October 2026
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डॉ. के.ए. पॉल ने कहा – “निमिषा प्रिया की रिहाई के लिए प्रयास जारी रहेंगे, याचिका सिर्फ़ भ्रामक सूचनाओं पर रोक हेतु थी”

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. के.ए. पॉल की जनहित याचिका खारिज की, नई जानकारी के साथ पुनः दायर करने की अनुमति; पॉल बोले- निमिषा के अनुरोध पर निभाया कर्तव्य

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आज विश्व विख्यात शांति दूत और प्रजा शांति पार्टी के अध्यक्ष डॉ. के.ए. पॉल द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई की। यह याचिका यमन में मृत्युदंड का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले से संबंधित थी। डॉ. पॉल स्वयं पक्षकार के रूप में न्यायालय में उपस्थित हुए।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अटॉर्नी जनरल ने केंद्र सरकार की ओर से आश्वासन दिया कि मीडिया रिपोर्टिंग से जुड़ी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। इस आश्वासन के आधार पर डॉ. पॉल ने अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

सुनवाई के बाद डॉ. पॉल ने स्पष्ट किया कि उनकी याचिका का उद्देश्य कभी भी मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना नहीं था, बल्कि निमिषा प्रिया के पत्र के अनुसार, उनकी रिहाई के लिए चल रही संवेदनशील वार्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाली भ्रामक और झूठी सूचनाओं को रोकना था। उन्होंने कहा, “मेरा एकमात्र लक्ष्य निमिषा की जान बचाना और ऐसी गलत सूचनाओं को रोकना है, जो उनकी रिहाई की राह में बाधा बन रही हैं। यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो मैं इसके लिए जिम्मेदार नहीं हूं, क्योंकि मैंने उनकी रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया है।”

डॉ. पॉल ने इस बात पर जोर दिया कि उनका इस मामले में हस्तक्षेप स्व-प्रेरित नहीं था, बल्कि निमिषा प्रिया के व्यक्तिगत अनुरोध पर आधारित था। 13 अगस्त 2025 को सना, यमन से लिखे एक पत्र में निमिषा ने डॉ. पॉल के प्रति “गहरी कृतज्ञता और प्रशंसा” व्यक्त की थी। उन्होंने भारतीय मीडिया में प्रकाशित सनसनीखेज और गलत खबरों को रोकने के लिए कानूनी हस्तक्षेप की अपील की, जिन्हें उन्होंने अपनी रिहाई की नाजुक वार्ताओं के लिए “गंभीर बाधा” करार दिया। इस पत्र पर उनकी मां और पावर ऑफ अटॉर्नी ने भी हस्ताक्षर किए थे, जिसमें डॉ. पॉल को “उथल-पुथल के बीच आशा की किरण” बताया गया और उनसे इस प्रक्रिया की रक्षा करने का अनुरोध किया गया।

डॉ. पॉल ने यमन में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा, “हमारी प्रत्यक्ष और सतत वार्ताओं के परिणामस्वरूप जुलाई और अगस्त में निमिषा के निष्पादन को स्थगित किया गया। मैं यमनी नेताओं और सभी संबंधित पक्षों के निरंतर संपर्क में हूं और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह समर्पित हूं।” हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेश मंत्रालय सटीक जानकारी को गलत ठहराकर उनके इस मिशन में बाधा उत्पन्न कर रहा है।

अंत में, डॉ. पॉल ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनका वैश्विक शांति निर्माण का व्यापक अनुभव और निमिषा का उन पर अटूट विश्वास उन्हें इस मिशन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए सशक्त बनाता है। वह निमिषा की रिहाई और सुरक्षित वापसी के लिए अपने प्रयासों को अथक रूप से जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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MK

Manoj K Sharma

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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