Thursday, 25 June 2026
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Sleep Paralysis : रात में अचानक खुल जाती हैं आंखें, लेकिन शरीर नहीं हिलता? जानिए क्या है इसका कारण और क्यों बढ़ रहे हैं मामले

जब नींद में व्यक्ति की आंखें खुल जाती हैं लेकिन शरीर कुछ समय तक काम नहीं करता। अगर आपको भी होती है यह परेशानी, तो जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव।

कल्पना कीजिए कि आप गहरी नींद में हैं। अचानक आपकी आंख खुल जाती है, आपको कमरे की हर चीज दिखाई दे रही है। आप सब कुछ महसूस कर पा रहे हैं, लेकिन शरीर का एक भी हिस्सा हिल नहीं रहा है। आप बोलना चाहते हैं, मदद के लिए गुहार लगाना चाहते हैं, लेकिन आवाज नहीं निकल रही है। आपको ऐसा भी लगता है कि कमरे में कोई मौजूद है या कोई उन्हें दबा रहा है। यह अनुभव इतना डरावना हो सकता है कि व्यक्ति कई दिनों तक इसके बारे में सोचकर परेशान रहता है।

चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को स्लीप पैरालिसिस (Sleep Paralysis) कहते हैं। हालांकि यह सुनने में किसी रहस्यमयी या अलौकिक घटना जैसा लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञ इसे नींद से जुड़ी एक वैज्ञानिक स्थिति मानते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में इस विषय में जागरूकता भी बढ़ी है।

क्या है स्लीप पैरालिसिस?

स्लीप पैरालिसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की चेतना तो जाग जाती है, लेकिन उसका शरीर कुछ समय के लिए निष्क्रिय रहता है। दूसरे शब्दों में कहें तो दिमाग जाग जाता है, लेकिन शरीर अब भी नींद में होता है।

यह स्थिति आमतौर पर दो समय पर होती है। पहला जब व्यक्ति सोने जा रहा होता है और दूसरा जब वह नींद से जाग रहा होता है। इस दौरान कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक व्यक्ति अपने हाथ-पैर नहीं हिला पाता और न ही ठीक से बोल पाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति आमतौर पर खतरनाक नहीं होती, लेकिन इसका अनुभव बेहद भयावह हो सकता है।

क्यों होता है ऐसा?

नींद के दौरान हमारा शरीर कई चरणों से गुजरता है। इनमें से एक महत्वपूर्ण चरण REM (Rapid Eye Movement) नींद कहलाता है। इसी दौरान अधिकतर सपने आते हैं। REM नींद में शरीर की मांसपेशियां अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाती हैं। इसका उद्देश्य यह होता है कि व्यक्ति सपनों में जो कुछ भी देख रहा है, उन्हें वास्तविक जीवन में न दोहराए।

कभी-कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति का दिमाग REM अवस्था से बाहर आ जाता है, लेकिन शरीर अभी भी उसी निष्क्रिय स्थिति में रहता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति जाग तो जाता है, लेकिन कुछ समय तक हिल-डुल नहीं पाता। यही स्थिति स्लीप पैरालिसिस कहलाती है।

महसूस होती है कमरे में किसी की मौजूदगी

स्लीप पैरालिसिस से जुड़ा सबसे दिलचस्प और डरावना पहलू भ्रम या हैलुसिनेशन है। इस समस्या से जूझ रहे कई लोगों का कहना है कि उन्हें इस अवस्था के दौरान कमरे में किसी अजनबी के होने का आभास होता है। कुछ लोगों को किसी के कदमों की आवाज सुनाई देती है, जबकि कुछ को ऐसा लगता है कि कोई उनके सीने पर बैठा हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह दिमाग और सपनों की अवस्था के बीच होने वाले असामान्य तालमेल का परिणाम है। जब व्यक्ति आधा जागा हुआ और आधा सपनों की अवस्था में होता है, तब दिमाग वास्तविक और काल्पनिक अनुभवों को अलग-अलग पहचानने में भ्रमित हो सकता है। यही वजह है कि कई लोगों को डरावने दृश्य या आवाजें महसूस होती हैं।

क्या स्लीप पैरालिसिस कोई मानसिक बीमारी है?

विशेषज्ञों की मानें तो सामान्य परिस्थितियों में स्लीप पैरालिसिस को मानसिक बीमारी नहीं कहा जा सकता। दुनिया भर में लाखों लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार इस स्थिति का अनुभव जरूर करते हैं। अधिकांश मामलों में यह अपने आप ठीक हो जाती है और किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। हालांकि यदि यह बार-बार नींद को प्रभावित करे या दिनचर्या में परेशानी पैदा करे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

किन लोगों में अधिक पाई जाती है यह समस्या

हालांकि स्लीप पैरालिसिस किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक पाया गया है। इनमें मुख्य रूप से –

  • अनियमित नींद
  • देर रात तक जागना
  • अत्यधिक तनाव
  • चिंता और अवसाद
  • अत्यधिक दवाइयों का सेवन
  • शिफ्ट में काम करना
  • कुछ प्रकार के स्लीप डिसऑर्डर (जैसे नार्कोलेप्सी या स्लीप एपनिया)
  • शराब का सेवन शामिल है

युवाओं में बढ़ रही है समस्या

डिजिटल युग में देर रात तक मोबाइल फोन, लैपटॉप और सोशल मीडिया का उपयोग आम हो गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सोने से ठीक पहले किसी भी प्रकार के मोबाइल या लैपटौप स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता पर बुरा असर डालता है। यह नींद के चक्र को बिगाड़ता है, जिससे स्लीप पैरालिसिस जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। कॉलेज छात्रों और युवा पेशेवरों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जा रही है क्योंकि उनकी नींद का समय अक्सर अनियमित होता है।

क्या स्लीप पैरालिसिस में मौत का खतरा होता है?

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या स्लीप पैरालिसिस से किसी व्यक्ति की मौत भी हो सकती है? तो जवाब है, नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य स्लीप पैरालिसिस जानलेवा नहीं होती। हालांकि उस समय व्यक्ति को बेहद डर महसूस हो सकता है, लेकिन यह स्थिति आमतौर पर कुछ सेकंड या मिनट के भीतर समाप्त हो जाती है। इस दौरान सांस लेने में कठिनाई भी हो सकती है, लेकिन अधिकांश मामलों में शरीर सामान्य रूप से काम कर रहा होता है। व्यक्ति को केवल ऐसा महसूस होता है कि वह सांस नहीं ले पा रहा।

अगर स्लीप पैरालिसिस हो जाए तो क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति को स्लीप पैरालिसिस का अनुभव हो रहा हो, तो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें घबराना नहीं है। विशेषज्ञ अक्सर यह सलाह देते हैं कि व्यक्ति खुद को यह याद दिलाने की कोशिश करे कि यह एक अस्थायी स्थिति है और कुछ ही क्षणों में समाप्त हो जाएगी। कुछ लोगों को उंगलियों या पैरों की छोटी मांसपेशियों पर ध्यान केंद्रित करने से मदद मिलती है। धीरे-धीरे शरीर दोबारा सामान्य नियंत्रण में आ जाता है। एक तरह से यह पूरा द्वंद्व दिमाग से शुरू होता है और इसे दिमाग पर काबू पाकर ही ठीक किया जा सकता है।

कैसे संभव है बचाव?

हालांकि हर मामले को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ आदतें जोखिम को कम कर सकती हैं।

  • रोज एक ही समय पर सोएं और जागें।
  • 7 से 9 घंटे की पर्याप्त नींद लें।
  • सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग कम करें।
  • तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें।
  • कैफीन और एनर्जी ड्रिंक का सीमित उपयोग करें।
  • नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी नींद की आदतें स्लीप पैरालिसिस के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

अंधविश्वास और मान्यताएं

दुनिया के कई देशों में स्लीप पैरालिसिस को लेकर अलग-अलग मान्यताएं रही हैं। कहीं इसे भूत-प्रेत से जोड़ा गया, तो कहीं इसे किसी अलौकिक शक्ति का प्रभाव माना गया। भारत के कई इलाकों में आज भी कुछ लोग इसे रहस्यमयी घटना मानते हैं। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे पूरी तरह नींद और मस्तिष्क से जुड़ी एक जैविक प्रक्रिया के रूप में देखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता बढ़ने से इस स्थिति को लेकर फैले कई भ्रम दूर हो सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि स्लीप पैरालिसिस कभी-कभार होता है तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन कई स्थितियों में विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है –

  • बार-बार स्लीप पैरालिसिस होना
  • नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ना
  • अत्यधिक दिन में नींद आना
  • गंभीर चिंता या तनाव महसूस होना
  • अन्य स्लीप डिसऑर्डर के लक्षण दिखाई देना

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MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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