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‘विकसित भारत’ के लिए कॉस्ट ऑडिट जरूरी, लागत दक्षता से बनेगी मजबूत अर्थव्यवस्था: महाराष्ट्र राज्यपाल

सेमिनार में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और 500 से अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी, पारदर्शिता और सुशासन में कॉस्ट ऑडिट की भूमिका पर जोर

मुंबई, 11 अप्रैल 2026

इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) द्वारा यशवंतराव चव्हाण सेंटर, नरीमन पॉइंट, मुंबई में ““विकसित भारत के लिए कॉस्ट ऑडिट: वैल्यू, विश्वास और विजन” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और पेशेवरों ने भाग लिया और देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में कॉस्ट ऑडिट की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक ऐसी अर्थव्यवस्था जरूरी है जो पारदर्शी, दक्ष, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ हो।

उन्होंने कहा कि कॉस्ट ऑडिट को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण माना जाना चाहिए। यह विभिन्न क्षेत्रों में संसाधनों के सही उपयोग को सुनिश्चित करता है, अनावश्यक खर्च को कम करता है और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

राज्यपाल ने कहा कि आज के वैश्विक प्रतिस्पर्धा वाले दौर में गुणवत्ता के साथ लागत दक्षता भी उतनी ही जरूरी है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए लागत प्रतिस्पर्धा पर विशेष ध्यान देना होगा।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों में डॉ. रामाकांत पांडा, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के प्रबंध निदेशक; डॉ. राहुल मिर्चंदानी, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, एरिस एग्रो लिमिटेड; तथा डॉ. विजय सतबीर सिंह, आईएएस (सेवानिवृत्त), पूर्व मुख्य सचिव, महाराष्ट्र शामिल रहे।

सेमिनार में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। इनमें सीएमए प्रवीण निगम, सीएमए आशु माथुर, डॉ. नितिन करीर, श्री दिनेश कुमार खारा, सीएमए असीम कुमार मुखोपाध्याय और सीएमए पार्वती वेंकटेश शामिल थे। वक्ताओं ने कॉस्ट ऑडिट से जुड़े बदलते नियमों, उद्योग की चुनौतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों पर चर्चा की।

राज्यपाल ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, दूरसंचार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में, जहां मूल्य निर्धारण का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, वहां कॉस्ट ऑडिट पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। यह उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ सभी पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

उन्होंने कॉस्ट ऑडिट को एक महत्वपूर्ण नीतिगत साधन बताते हुए कहा कि यह मूल्य निर्धारण, सब्सिडी के युक्तिकरण और नियामकीय निगरानी के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराता है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि कंपनी अधिनियम के तहत कॉस्ट ऑडिट का दायरा बढ़ाकर सभी सूचीबद्ध कंपनियों, एफएमसीजी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और ऋण लेने वाली कंपनियों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

इस सेमिनार में कॉरपोरेट क्षेत्र, उद्योग संगठनों, सरकारी और नियामक संस्थाओं, वित्तीय संस्थानों और पेशेवरों सहित 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य फोकस विश्वास बढ़ाने, मूल्य सृजन को प्रोत्साहित करने और कॉस्ट ऑडिट को विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप बनाने पर रहा।

आईसीएमएआई ने पेशेवर मानकों को मजबूत करने, बेहतर कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में निरंतर सीखने की संस्कृति विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, संस्थान ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में पहुंच बढ़ाकर छात्रों के बीच कॉस्ट और मैनेजमेंट अकाउंटिंग में करियर के अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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