दिल्ली कोर्ट ने लंबी हिरासत पर जताई चिंता, कहा—व्यक्तिगत स्वतंत्रता सबसे अहम
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित ठग सुकैश चंद्रशेखर को AIADMK से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी है। स्पेशल जज विशाल गोगने ने उन्हें 5 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
हालांकि, राहत मिलने के बावजूद सुकैश फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि अन्य मामलों में वे अभी भी हिरासत में हैं।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 2017 के AIADMK चुनाव चिन्ह घोटाले से जुड़ा है। आरोप है कि सुकैश ने टी.टी.वी. दिनाकरन (शशिकला गुट) के लिए बिचौलिए का काम किया था।
उन पर आरोप है कि उन्होंने चुनाव आयोग के एक अधिकारी को 50 करोड़ रुपये की रिश्वत दिलाने में मदद की, ताकि पार्टी का ‘दो पत्तियां’ चुनाव चिन्ह बरकरार रखा जा सके।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। सुकैश को 2017 में गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान उनके पास से 1.30 करोड़ रुपये नकद और BMW व Mercedes जैसी लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई थीं।
कोर्ट ने क्यों दी जमानत
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुकैश पहले ही इस मामले में तय अधिकतम सजा के आधे से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं।
जज ने यह भी बताया कि केस की सुनवाई कई सालों से लंबित है, जिससे सुकैश को बिना ट्रायल के लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। इसे कोर्ट ने “अत्यधिक हिरासत” माना।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान में व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहुत महत्वपूर्ण है और सिर्फ इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि मामला आर्थिक अपराध या विशेष कानून से जुड़ा है।
अब तक 31 में से 27 मामलों में मिली जमानत
सुकैश चंद्रशेखर कई बड़े मामलों में आरोपी हैं, जिनमें धोखाधड़ी, उगाही और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं।
7 अप्रैल 2026 तक उन्हें 31 में से 27 मामलों में जमानत मिल चुकी है। इस फैसले से पहले वे 26 मामलों में जमानत पा चुके थे।
फिलहाल जेल में ही रहेंगे
इस केस में जमानत मिलने के बावजूद सुकैश अभी मंडोली जेल में ही रहेंगे, क्योंकि बाकी मामलों में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है।
फैसले का मतलब क्या है
कोर्ट का यह फैसला केवल इस बात पर आधारित है कि इस केस में सुकैश लंबे समय तक बिना ट्रायल के जेल में रहे। इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें निर्दोष माना गया है।
वे अभी भी कई मामलों में आरोपी हैं और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह फैसला एक बार फिर दिखाता है कि कानून में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बहुत महत्व दिया जाता है। चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो, किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
सुकैश चंद्रशेखर के लिए यह एक और राहत जरूर है, लेकिन उनकी कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
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