उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पैतृक मकान को गिराए जाने के पीछे परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति विवाद भी सामने आया है। मकान की जर्जर हालत और पुनर्निर्माण के फैसले पर आपत्ति के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा था।
वाराणसी: भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने वाले शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की संगीत विरासत एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह उनका संगीत नहीं, बल्कि वाराणसी स्थित उनका पैतृक मकान है। मकान के एक हिस्से को गिराए जाने का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत रत्न से सम्मानित कलाकार की साझा विरासत को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया।
इस पूरे मामले में एक तरफ कलाकार की विरासत को संरक्षित करने का सवाल है, तो दूसरी ओर निजी संपत्ति, परिवार के बीच पुराने विवाद और नगर निगम की संग्रहालय बनाने की योजना भी जुड़ी हुई है।
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर लगाए आरोप
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार, 7 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को लेकर पोस्ट किया। उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के मकान के एक हिस्से को गिराए जाने का वीडियो साझा किया और बीजेपी पर निशाना साधा।
अखिलेश ने अपनी पोस्ट में लिखा, ”जिनके लिए शहनाई नहीं बजी, उनसे और क्या उम्मीद करना?” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी कला और कलाकारों के हमेशा खिलाफ रहते हैं। उनके मुताबिक, रचनात्मक लोग समाज में बदलाव की जमीन तैयार करते हैं और सकारात्मक कला लोगों में संवेदनशीलता तथा सहिष्णुता को बढ़ावा देती है।
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति की साझा विरासत को नष्ट करना केवल उनकी गरिमा और सम्मान को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि देश के सम्मान को भी ठेस पहुंचाना है। उन्होंने बीजेपी पर नफरत की राजनीति के जरिए देश को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की संगीत विरासत को संरक्षित करने के लिए एक ‘श्रवण संग्रहालय’ बनाएगी। उनके इस बयान के बाद मकान को गिराए जाने का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
वाराणसी नगर निगम ने क्या सफाई दी?
अखिलेश यादव के आरोपों के बाद वाराणसी नगर निगम ने अपना पक्ष रखा। निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि शहर की प्रमुख हस्तियों और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए नगर निगम ने एक विशेष परियोजना शुरू की है। इसके तहत इन हस्तियों के घरों तक जाने वाली सड़कों को उनके जीवन और उपलब्धियों से जुड़ी थीम पर विकसित करने और उनके घरों के एक कमरे को संग्रहालय के रूप में तैयार करने की योजना बनाई गई है।
इसी योजना के तहत नगर निगम ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के परिवार से उनके पैतृक मकान में संग्रहालय बनाने के संबंध में बातचीत की थी। हालांकि, निगम के मुताबिक परिवार ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी। परिवार ने मकान की जर्जर हालत का हवाला देते हुए उसे खुद गिराकर अपने स्तर पर दोबारा विकसित करने की इच्छा जताई थी।
संदीप श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि परिवार की सहमति नहीं मिलने के कारण नगर निगम इस मकान में संग्रहालय बनाने की परियोजना आगे नहीं बढ़ा सका। उन्होंने कहा कि मकान को गिराने की कार्रवाई में नगर निगम की कोई भूमिका नहीं थी और परिवार ने अपने स्तर पर यह काम कराया।
परिवार के भीतर संपत्ति को लेकर विवाद?
इस मामले का एक अहम पहलू उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पैतृक मकान को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच हुआ विवाद भी है। 3 नवंबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, मकान की जर्जर हालत को देखते हुए उसे गिराकर नया भवन बनाने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि, परिवार के कुछ सदस्यों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया।
बिस्मिल्लाह खान के पोते मोहम्मद सिब्तैन ने बताया था कि पुराना मकान काफी खराब स्थिति में था और उसका पुनर्निर्माण जरूरी हो गया था। सिब्तैन उनके बड़े बेटे दिवंगत मेहताब हुसैन के पुत्र हैं। उनके मुताबिक, परिवार के एक सदस्य ने मकान गिराने का विरोध किया था। इसके बाद दोनों पक्षों को चौक थाने बुलाया गया और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मांगे गए।
सिब्तैन ने पुलिस के सामने मकान की रजिस्ट्री के कागजात पेश किए और दावा किया कि इसके बाद विवाद सुलझ गया। करीब 670 वर्ग फुट में बने इस मकान की रजिस्ट्री मेहताब हुसैन के नाम पर थी, जिनका निधन 2016 में हुआ था। परिवार के सदस्यों के अनुसार, बिस्मिल्लाह खान ने 2006 में निधन से पहले अपनी संपत्तियां बेटों के बीच बांट दी थीं। सिब्तैन का कहना था कि विवाद खत्म होने के बाद मकान के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई।
ये भी पढ़ें :- पश्चिमी दिल्ली में अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने तेज की मुहिम
क्या मकान में बनेगा संग्रहालय?
मकान को लेकर विवाद के बीच संग्रहालय बनाने की योजना भी चर्चा में है। दरअसल, वाराणसी नगर निगम ने शहर की प्रमुख हस्तियों की विरासत को संरक्षित करने के लिए उनके घरों को संग्रहालय जैसे स्थानों में बदलने की योजना तैयार की थी। इसमें भारत रत्न और पद्म पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत हस्तियों के घर शामिल थे।
वाराणसी के नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने 3 नवंबर को बताया था कि निगम ने इस विरासत संरक्षण परियोजना की तैयारी करीब छह महीने पहले शुरू की थी। इसके लिए बजट का प्रावधान किया गया था और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), डिजाइन तथा नक्शे तैयार किए गए थे। जिन परिवारों की सहमति मिली, वहां टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम भी शुरू किया गया।
बिस्मिल्लाह खान के मकान के लिए प्रस्तावित परियोजना की लागत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई थी। लेकिन परिवार के भीतर संपत्ति को लेकर विवाद और सभी संबंधित पक्षों की सहमति नहीं मिलने के कारण निगम इस योजना को आगे नहीं बढ़ा सका।
हालांकि, परिवार की ओर से भी मकान में संग्रहालय बनाने की बात सामने आई है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि मकान में मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम उनकी आपसी सहमति से कराया जा रहा है। परिवार के अनुसार, पहली मंजिल पर संग्रहालय बनाया जाएगा, जबकि दूसरी मंजिल पर परिवार के सदस्य रह सकेंगे।
कहां स्थित है उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पैतृक मकान?
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पैतृक मकान उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हड़हा सराय इलाके की संकरी गलियों में स्थित है। यह क्षेत्र थोक कारोबार के लिए जाना जाता है, जहां सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू सजावट के सामान और दूसरी वस्तुओं का व्यापार होता है।
मकान के आसपास के इलाके में बीते कुछ समय से सड़क चौड़ीकरण और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण भी बदलाव हुए हैं। दलमंडी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए आसपास की करीब 190 इमारतें गिराई गई थीं। इसके बाद कई व्यापारियों को अपनी दुकानें आसपास के इलाकों में स्थानांतरित करनी पड़ीं।
ऐसे व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस मकान की संपत्ति से जुड़ी अहमियत भी है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में मकान गिराए जाने के पीछे किसी व्यावसायिक परियोजना को कारण नहीं बताया गया है। परिवार ने इमारत की जर्जर स्थिति और पुनर्निर्माण की जरूरत को इसकी वजह बताया है।
कौन थे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान?
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान शहनाई वादकों में से एक थे। उनका जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में संगीतकारों के परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम कमरुद्दीन खान था। बाद में वे बिस्मिल्लाह खान के नाम से प्रसिद्ध हुए।
बचपन में उनका परिवार वाराणसी आ गया, जहां उन्होंने अपने मामा उस्ताद अली बख्श ‘विलायतु’ से शहनाई बजाने की तालीम ली। अली बख्श काशी विश्वनाथ मंदिर से जुड़े शहनाई वादक थे। बिस्मिल्लाह खान ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से शहनाई को पारंपरिक आयोजनों से आगे बढ़ाकर शास्त्रीय संगीत के बड़े मंचों तक पहुंचाया।
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के अवसर पर उन्होंने दिल्ली के लाल किले से शहनाई वादन किया था। इस प्रस्तुति ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। उनकी शहनाई की गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी पहुंची।
संगीत में योगदान के लिए उन्हें 1956 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1961 में पद्मश्री, 1968 में पद्म भूषण और 1980 में पद्म विभूषण मिला। वर्ष 2001 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
21 अगस्त 2006 को वाराणसी में उनका निधन हो गया। वे आज भी अपनी कला, सादगी और गंगा-जमुनी तहजीब के प्रतीक के रूप में याद किए जाते हैं।
बिस्मिल्लाह खान की विरासत को संरक्षित करना क्यों जरूरी?
बिस्मिल्लाह खान की पहचान केवल एक महान संगीतकार के रूप में नहीं थी। उन्होंने शहनाई को भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनके संगीत में बनारस की सांस्कृतिक परंपरा, मंदिरों और गंगा से जुड़ा परिवेश तथा देश की साझा विरासत की झलक दिखाई देती थी।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण भी रहा कि कला धार्मिक और सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ सकती है। वे मुस्लिम परिवार में जन्मे थे, लेकिन मां सरस्वती और काशी विश्वनाथ के प्रति भी अपनी श्रद्धा व्यक्त करते थे। उनकी शहनाई ने देश के अलग-अलग समुदायों और संस्कृतियों के लोगों को एक साथ जोड़ा।
ऐसे कलाकार का पैतृक घर केवल एक निजी इमारत नहीं, बल्कि उनके जीवन और संगीत यात्रा से जुड़ी स्मृतियों का स्थान भी है। इसलिए इसके संरक्षण को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है। हालांकि, किसी निजी संपत्ति के पुनर्निर्माण का फैसला परिवार के अधिकारों और संबंधित नियमों के तहत ही होना चाहिए। साथ ही, यदि वहां संग्रहालय बनाने की योजना है, तो परिवार और प्रशासन के बीच सहमति बनना भी जरूरी होगा।
फिलहाल, मकान के एक हिस्से को गिराए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज है। अखिलेश यादव ने बीजेपी पर विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है, जबकि नगर निगम और परिवार की ओर से इसे निजी स्तर पर किया जा रहा पुनर्निर्माण बताया गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए भवन में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान से जुड़ी स्मृतियों और उनकी संगीत विरासत को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है।
