Tuesday, 29 September 2026
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सत्य निकेतन PG बिल्डिंग हादसा: अब तक 6 लोगों की मौत, 13 का रेस्क्यू; अवैध निर्माण और बेसमेंट में मरम्मत पर उठे गंभीर सवाल

दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने से 6 मौतों के बाद सवाल है कि अवैध निर्माण की जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। MCD और बिल्डिंग मालिक की भूमिका जांच के केंद्र में है।

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर को भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत ने राजधानी में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित इस इमारत में छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG की सुविधा थी। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान 13 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया।

सोमवार को भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी रहीं कि कहीं कोई व्यक्ति मलबे में फंसा तो नहीं है।

हादसे के बाद सामने आई शुरुआती जानकारी ने दुर्घटना को महज एक इमारत गिरने की घटना से आगे बढ़ाकर अवैध निर्माण, बिना मंजूरी मरम्मत, पुराने ढांचे और प्रशासनिक निगरानी का मामला बना दिया है। MCD के शुरुआती आकलन के मुताबिक, इमारत का कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान नहीं था और बेसमेंट में किया जा रहा निर्माण भी कथित तौर पर अनधिकृत था। पांचवीं मंजिल को लेकर भी नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है।

सत्य निकेतन में आखिर हुआ क्या?

हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। यह इमारत छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के बिल्कुल नजदीक होने के कारण यहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं।

इमारत के गिरते ही आसपास धूल का बड़ा गुबार छा गया और मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका पैदा हो गई। शुरुआती घंटों में अधिकारियों ने करीब 30 से 40 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई थी। बाद में रेस्क्यू टीमों ने लगातार अभियान चलाकर कई लोगों को बाहर निकाला।

मौके पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दल पहुंचे। तंग गली और आसपास के निर्माण के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं था। स्थानीय छात्रों और लोगों ने भी शुरुआती राहत कार्य में मदद की और मलबा हटाने के लिए मानव श्रृंखला तक बनाई।

मलबे में फंसे छात्र का दर्दनाक वीडियो

हादसे के बाद सामने आया एक वीडियो इस त्रासदी की भयावहता दिखाता है। मलबे के नीचे फंसे एक छात्र ने मदद के लिए फोन किया और उसका छोटा वीडियो सामने आया। वह कई परतों के बीच फंसा हुआ दिखाई दिया और मदद की गुहार लगाता नजर आया। ऐसे कई लोगों के बारे में भी जानकारी सामने आई जिन्होंने मलबे के नीचे से फोन कर अपने परिचितों को अपनी स्थिति बताई।

रेस्क्यू टीमों ने ऐसे संकेतों के आधार पर उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया जहां लोगों के जिंदा होने की संभावना थी। NDRF और अन्य एजेंसियों ने मलबे की जांच के लिए आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ खोजी कुत्तों और लाइफ डिटेक्टर का भी इस्तेमाल किया। डायमंड चेन सॉ, हाइड्रोलिक जैक और कॉम्बी कटर जैसे उपकरणों की मदद से मलबे में रास्ता बनाया गया।

6 लोगों की मौत, कई घायल

सोमवार सुबह तक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गई। शुरुआती घंटों में मौतों का आंकड़ा लगातार बदलता रहा क्योंकि बचाव दल मलबे के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। कुछ घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर समेत अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

हादसे में जान गंवाने वालों में छात्र और इमारत में काम करने वाले मजदूर भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मृतकों में 21 वर्षीय छात्र पवन यादव भी शामिल थे, जो मोतीलाल नेहरू कॉलेज के छात्र थे। उनके परिवार और दोस्त हादसे के बाद AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और घंटों तक उनके बारे में जानकारी तलाशते रहे।

हालांकि, अधिकारियों ने शुरुआत में यह स्पष्ट किया था कि मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या तत्काल पता नहीं चल पा रही थी। इसलिए रेस्क्यू अभियान को तब तक जारी रखा गया जब तक प्रभावित हिस्सों की पूरी तरह जांच न हो जाए।

बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम

हादसे की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इमारत गिरने से ठीक पहले वहां क्या काम चल रहा था।

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण का काम चल रहा था। कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि बेसमेंट में पानी जमा था और निर्माण कार्य के दौरान ढांचे पर दबाव बढ़ा। हालांकि, शुरुआत में MCD ने कहा था कि मलबा हटाए जाने तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकता कि हादसे के समय किस तरह का काम चल रहा था।

सोमवार को सामने आए शुरुआती आकलन में बेसमेंट में अनधिकृत निर्माण, पुराने ढांचे और संरचनात्मक कमजोरी को लेकर गंभीर सवाल उठे। एक MCD अधिकारी के मुताबिक, खड़े ढांचे में बेसमेंट में बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

इसलिए जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि मरम्मत के दौरान किसी स्तंभ या अन्य महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्से को प्रभावित किया गया था या नहीं।

बिल्डिंग प्लान भी नहीं था मंजूर?

हादसे के बाद MCD की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शुरुआती प्रशासनिक आकलन के अनुसार, जिस इमारत में PG चल रहा था, उसका कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं था। MCD के मुताबिक यह ढांचा करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बना था और इसमें बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं, जबकि अतिरिक्त निर्माण को लेकर भी सवाल हैं।

MCD के अधिकारियों ने यह भी कहा कि पांचवीं मंजिल नियमों के तहत अनुमत नहीं थी। यानी मामला केवल अचानक ढांचा कमजोर होने तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं, यह भी जांच का प्रमुख विषय है।

यही सवाल अब प्रशासन के सामने है कि अगर निर्माण और अतिरिक्त मंजिलें नियमों के अनुरूप नहीं थीं तो संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई?

अवैध निर्माण पर उठते सवाल

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास छात्रों के लिए एक प्रमुख आवासीय इलाका है। यहां बड़ी संख्या में PG, हॉस्टल, मेस और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। समय के साथ इलाके की पुरानी और अपेक्षाकृत छोटी इमारतों में अतिरिक्त मंजिलें जुड़ती गईं और कई संपत्तियां छात्र आवास में बदल गईं।

यही कारण है कि सत्य निकेतन की घटना ने केवल एक इमारत की सुरक्षा नहीं, बल्कि पूरे इलाके में PG और हॉस्टल भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच की जरूरत को सामने ला दिया है।

छात्रों के लिए सस्ता और कॉलेज के पास रहने का विकल्प होने के कारण ऐसे इलाकों में PG की मांग लगातार रहती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर ऐसी संपत्ति में अग्नि सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती, स्वीकृत नक्शे और अन्य जरूरी मानकों की नियमित जांच होती है?

पड़ोस की इमारतें भी खाली कराई गई

हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि एहतियात के तौर पर पास की इमारत को खाली कराया गया। MCD ने एक निकटवर्ती PG को सील भी किया और वहां रहने वाले लोगों को दूसरी जगह भेजा गया।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्य इमारत के गिरने के बाद आसपास के ढांचे पर भी दबाव पड़ने या उन्हें नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई थी।

MCD ने अब राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ व्यापक कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

अवैध ढांचों पर MCD की सख्ती

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने कहा कि दिल्ली में चार मंजिल से ज्यादा वाले अवैध निर्माणों को तुरंत सील किया जाएगा। निगम ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बर्खास्तगी तक शामिल हो सकती है।

यह फैसला हादसे के बाद उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदमों में से एक है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जांच केवल घोषणा तक सीमित रहती है या दिल्ली के छात्र इलाकों में मौजूद ऐसे सभी ढांचों का वास्तविक सर्वे भी किया जाता है।

PG मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए थे।

यह कार्रवाई इस बात की ओर इशारा करती है कि जांच में केवल तकनीकी कारणों के साथ-साथ संभावित लापरवाही और नियमों के उल्लंघन की भी पड़ताल होगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के बाद घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। सोमवार को उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बेसमेंट में पानी भरने को हादसे से जोड़कर देखा जा रहा है और सरकार भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई नीति पर काम कर रही है।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा था कि सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर बचाव अभियान चला रही हैं और प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्य निकेतन हादसे पर दुख जताया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी घटनास्थल पर काम कर रहे हैं और प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

हादसे के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल और अस्पतालों का दौरा किया।

DU छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन की घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से कुछ ही दूरी पर है। बड़ी संख्या में छात्र यहां PG और किराये के कमरों में रहते हैं। ऐसे में भवन सुरक्षा सीधे छात्रों की जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है।

घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि छात्र जब कॉलेज के आसपास रहने के लिए PG चुनते हैं तो क्या उन्हें उस इमारत की संरचनात्मक स्थिति, अग्नि सुरक्षा और वैध निर्माण की जानकारी मिलती है?

अगर किसी भवन में अतिरिक्त मंजिलें अवैध तरीके से बनाई गई हों या बेसमेंट में बिना अनुमति संरचनात्मक बदलाव किए गए हों तो वहां रहने वाले छात्रों के पास अक्सर इसकी जानकारी नहीं होती। जिम्मेदारी इसलिए केवल मकान मालिक की नहीं, बल्कि नियामक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।

अब जांच के सामने सबसे बड़े सवाल

सत्य निकेतन हादसे की जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशने होंगे—

  • इमारत का स्वीकृत नक्शा था या नहीं?
  • अतिरिक्त मंजिलें कब और कैसे बनाई गईं?
  • बेसमेंट में किस तरह का काम चल रहा था?
  • क्या निर्माण या मरम्मत के लिए कोई अनुमति ली गई थी?
  • क्या ढांचे की पहले कभी जांच हुई थी?
  • PG के रूप में इमारत के इस्तेमाल के लिए जरूरी सुरक्षा मानक पूरे किए गए थे या नहीं?
  • MCD या अन्य संबंधित विभाग को अवैध निर्माण की जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • आसपास की दूसरी PG इमारतों की स्थिति क्या है?

इन सवालों के जवाब ही यह स्पष्ट करेंगे कि हादसा केवल अचानक हुई संरचनात्मक विफलता थी या इसके पीछे लंबे समय से चल रहा नियमों का उल्लंघन और निगरानी की कमी भी जिम्मेदार थी।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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