दिल्ली के शालीमार बाग में गिग वर्कर्स के लिए Gig Worker’s Rest Area शुरू किया गया। CM रेखा गुप्ता ने इसका उद्घाटन किया। सुविधा का उद्देश्य डिलीवरी एजेंट और अन्य गिग वर्कर्स को काम के दौरान आराम की जगह देना है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर दिल्ली में गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को कई जनसेवा और कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मौके पर रक्तदान किया और अंगदान का संकल्प लेते हुए दिल्ली सरकार के नए ऑर्गन डोनेशन पोर्टल की शुरुआत की। इसके अलावा राजधानी में श्रमिकों के लिए ‘NaMo Shramik Seva Kendra’ और गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट एरिया भी शुरू किया गया।
दिल्ली सरकार की ओर से इन कार्यक्रमों को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित किया गया है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। सरकार के अनुसार, अभियान का उद्देश्य श्रमिकों को सरकारी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ-साथ रक्तदान और अंगदान जैसी सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
अंगदान के लिए पोर्टल लॉन्च
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर दिल्ली सरकार की प्रमुख पहलों में अंगदान से जुड़ा नया डिजिटल पोर्टल लॉन्च करना रहा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पोर्टल की शुरुआत करते हुए खुद अंगदान का संकल्प लिया और पंजीकरण कराया।
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 14 अंगों को दान करने का संकल्प लिया है। इनमें हृदय, लीवर, किडनी और फेफड़ों समेत अन्य अंग शामिल हैं। उन्होंने लोगों से भी अंगदान के लिए आगे आने और इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से दिल्ली सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऑनलाइन अंगदान प्रतिज्ञा पोर्टल शुरू किया गया। इस माध्यम से दिल्लीवासी ऑनलाइन अंगदान का संकल्प ले सकते हैं। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिजिटल प्रतिज्ञा प्रमाण-पत्र तैयार होने की जानकारी भी सामने आई है।
अंगदान अभियान के प्रमुख बिंदु
- दिल्ली सरकार ने ऑर्गन डोनेशन प्लेज पोर्टल लॉन्च किया।
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद अंगदान का संकल्प लेकर पंजीकरण कराया।
- मुख्यमंत्री ने 14 अंगों को दान करने की प्रतिज्ञा ली।
- पोर्टल के जरिए दिल्लीवासी ऑनलाइन अंगदान का संकल्प ले सकेंगे।
- पंजीकरण पूरा होने के बाद डिजिटल प्रतिज्ञा प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाएगा।
- अंग और ऊतक दान से जुड़े कार्यों के समन्वय के लिए SOTTO को सक्रिय किया गया है।
- अभियान का उद्देश्य अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक लोगों को इससे जोड़ना है।
SOTTO और NOTTO के बीच समन्वय
अंगदान से जुड़ी इस पहल को दिल्ली में अंग और ऊतक प्रत्यारोपण की व्यवस्था के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में State Organ and Tissue Transplant Organisation (SOTTO) को सक्रिय किया गया है। यह व्यवस्था अंग और ऊतक दान से संबंधित गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए काम करेगी।
दिल्ली सरकार की पहल में SOTTO और National Organ and Tissue Transplant Organisation (NOTTO) के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य अंगदान और प्रत्यारोपण से संबंधित व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।
सरकार की ओर से अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के अलावा शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य संस्थानों और सामुदायिक स्तर पर गतिविधियां आयोजित करने की योजना भी बताई गई है। इसका मकसद लोगों को अंगदान की प्रक्रिया और इसके महत्व के बारे में जानकारी देना है।
CM रेखा गुप्ता ने किया रक्तदान
अंगदान अभियान के साथ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर आयोजित मेगा ब्लड डोनेशन कैंप में भी हिस्सा लिया और रक्तदान किया। यह शिविर दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित मेगा ब्लड डोनेशन कैंप में रक्तदान किया। इस अभियान के जरिए रक्तदान को भी जनसेवा से जोड़ने की कोशिश की गई है।
रक्तदान कार्यक्रम में लोगों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता बढ़ाने और लोगों के बीच स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर जागरूकता पैदा करना रहा।
इस तरह एक ही दिन में मुख्यमंत्री ने रक्तदान और अंगदान, दोनों सामाजिक अभियानों में व्यक्तिगत रूप से भाग लिया।
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शालीमार बाग में NaMo Shramik Seva Kendra शुरू
प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर दिल्ली सरकार ने श्रमिकों से जुड़ी एक नई सुविधा की भी शुरुआत की। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग में NaMo Shramik Seva Kendra का उद्घाटन किया।
सरकार के अनुसार, इस केंद्र का उद्देश्य श्रमिकों को सरकारी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। केंद्र के माध्यम से कामगारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी तथा उनसे जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
उद्घाटन कार्यक्रम में दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा समेत बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस दौरान श्रमिकों से बातचीत की और उनके अनुभवों तथा सुझावों के बारे में जानकारी ली।
दिल्ली सरकार ने श्रमिकों को राजधानी के निर्माण और विकास में योगदान देने वाला महत्वपूर्ण वर्ग बताते हुए उनके सम्मान, सुविधा और कल्याण से जुड़ी पहलों पर जोर दिया है।
गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट एरिया भी शुरू
NaMo Shramik Seva Kendra के साथ ही शालीमार बाग में गिग वर्कर्स के लिए एक अलग Gig Worker’s Rest Area की शुरुआत की गई।
इस सुविधा का उद्देश्य डिलीवरी एजेंट और अन्य गिग वर्कर्स को काम के दौरान आराम करने के लिए जगह उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस सुविधा का भी उद्घाटन किया।
दिल्ली सरकार के अनुसार, गिग इकॉनमी से जुड़े कामगारों के लिए काम के दौरान बुनियादी सुविधाओं और आराम की जगह उपलब्ध कराना जरूरी है। नई सुविधा इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए NaMo Shramik Seva Kendra और Gig Workers Rest Centre के उद्घाटन की जानकारी साझा की।
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान
दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शुरू किए गए कार्यक्रमों को सिर्फ 17 सितंबर तक सीमित नहीं रखा है। इसके तहत ‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलाया जाएगा।
अभियान के दौरान श्रमिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से संबंधित गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
रिपोर्ट के अनुसार, अभियान का प्रमुख फोकस श्रमिकों के कल्याण और उन्हें सरकारी सेवाओं से सीधे जोड़ने पर है। इसी क्रम में NaMo Shramik Seva Kendra और गिग वर्कर्स के लिए रेस्ट एरिया की शुरुआत की गई।
108 कुंडीय हवन में भी शामिल हुईं मुख्यमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दिल्ली में जनसेवा कार्यक्रमों के अलावा धार्मिक आयोजन भी किए गए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने GT Karnal Road स्थित खाटू श्याम मंदिर में 108 कुंडीय हवन में हिस्सा लिया।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की गई। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में यह धार्मिक आयोजन भी शामिल रहा।
इस प्रकार 17 सितंबर को राजधानी में दिनभर अलग-अलग तरह की गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें धार्मिक कार्यक्रम, रक्तदान, अंगदान, श्रमिक कल्याण और गिग वर्कर्स के लिए सुविधाओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख रहे।
अंगदान को लेकर लोगों से की गई अपील
दिल्ली सरकार की इस पहल में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का खुद अंगदान का संकल्प लेना एक प्रमुख हिस्सा रहा। सरकार की ओर से कहा गया कि अंगदान का फैसला प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
अंगदान प्रतिज्ञा पोर्टल के जरिए लोगों को ऑनलाइन संकल्प लेने का विकल्प उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए लोगों को डिजिटल माध्यम से पंजीकरण की सुविधा देने की कोशिश की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अंगदान अभियान को आगे बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी जानकारी दी गई है। इनमें स्कूल, कॉलेज, स्वास्थ्य संस्थान और सामुदायिक स्तर पर लोगों तक पहुंचने की योजना शामिल है।
दिल्ली में अंग दान की कितनी जरूरत?
दिल्ली सरकार की नई अंगदान पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब देश में ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध अंगों और जरूरतमंद मरीजों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। केंद्र सरकार के अनुसार, 3 मार्च 2026 तक देशभर में 89,839 मरीज प्रमुख अंगों के ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग लिस्ट में थे। इनमें किडनी के मरीजों की संख्या सबसे अधिक थी। 2025 में देशभर में 20,019 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए।
सरकार के नए ‘Aangdaan’ पोर्टल पर भी अंग प्रत्यारोपण की जरूरत को लेकर स्थिति की गंभीरता बताई गई है। पोर्टल के अनुसार, हर दिन 15 लोग ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हुए अपनी जान गंवाते हैं। पोर्टल यह भी बताता है कि एक डोनर ऑर्गन डोनेशन के जरिए 8 लोगों तक की जान बचाने में मदद कर सकता है, जबकि ऑर्गन, आंख और टिश्यू डोनेशन को मिलाकर एक डोनर से 75 लोगों तक को लाभ पहुंच सकता है।दिल्ली में अंगदान की जरूरत को समझने के लिए राष्ट्रीय स्तर के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। 2024 में देश में कुल 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट और 4,901 लिवर ट्रांसप्लांट हुए थे। इसके अलावा 253 हार्ट, 228 लंग और 44 पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट दर्ज किए गए।
ऐसे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का खुद अंगदान का संकल्प लेना इस अभियान का सार्वजनिक हिस्सा है, लेकिन इस पहल का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में इस बात से समझा जाएगा कि कितने लोग पंजीकरण करते हैं, कितने संभावित डोनर सिस्टम से जुड़ते हैं और उनमें से कितने मामलों में वास्तविक अंगदान और ट्रांसप्लांट तक प्रक्रिया पहुंचती है।
