Thursday, 17 September 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
टाटा संस में बढ़ते नेतृत्व विवाद के बीच चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का नया कार्यकाल, नोएल टाटा ने वोट को बताया अवैध Operation Sohan: उधमपुर में रातभर चली मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ की मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग PM Modi Birthday: आज एक नहीं, दो दीये जलाएं… एक ‘आशीर्वाद’ के लिए, दूसरा ‘जवाबदेही’ के लिए! EPFO Wage Ceiling Hike: अब ₹25,000 तक की सैलरी पर PF, जानें कर्मचारियों पर क्या होगा असर टीम इंडिया को लगा बड़ा झटका, एशियन गेम्स से पहले चोट के कारण बाहर हुए वरुण चक्रवर्ती मेसी के केरलम दौरे पर बढ़ता विवाद, ‘रिपोर्टर टीवी’ के कार्यालय पर पुलिस ने छापा मारा पारुल सिंह और राकेश कुमार सिंह उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल टाटा संस में बढ़ते नेतृत्व विवाद के बीच चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का नया कार्यकाल, नोएल टाटा ने वोट को बताया अवैध Operation Sohan: उधमपुर में रातभर चली मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी दिशा सालियान केस: आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख को ₹500 करोड़ की मानहानि नोटिस, 7 दिन में माफी की मांग PM Modi Birthday: आज एक नहीं, दो दीये जलाएं… एक ‘आशीर्वाद’ के लिए, दूसरा ‘जवाबदेही’ के लिए! EPFO Wage Ceiling Hike: अब ₹25,000 तक की सैलरी पर PF, जानें कर्मचारियों पर क्या होगा असर टीम इंडिया को लगा बड़ा झटका, एशियन गेम्स से पहले चोट के कारण बाहर हुए वरुण चक्रवर्ती मेसी के केरलम दौरे पर बढ़ता विवाद, ‘रिपोर्टर टीवी’ के कार्यालय पर पुलिस ने छापा मारा पारुल सिंह और राकेश कुमार सिंह उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल

टाटा संस में बढ़ते नेतृत्व विवाद के बीच चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का नया कार्यकाल, नोएल टाटा ने वोट को बताया अवैध

टाटा संस के बोर्ड की मंजूरी के बाद चंद्रशेखरन की निदेशक के तौर पर पुनर्नियुक्ति से जुड़ी शेयरधारक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66% हिस्सेदारी के कारण AGM पर नजर रहेगी।

मुंबई: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह के भीतर नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। TATA Sons के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रशेखरन ने पिछले महीने ही मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन बनने की पेशकश नहीं करने का फैसला किया था। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है।

हालांकि, बोर्ड के फैसले के बाद टाटा समूह के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट किया और इस फैसले को ‘अवैध’ बताया है।

बोर्ड में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के पक्ष में 4-1 से वोट हुआ और नोएल टाटा इसके खिलाफ रहे। नोएल टाटा ने कहा कि उन्होंने चंद्रशेखरन की नियुक्ति का विरोध किया था और उनका कहना था कि उनकी आपत्ति को कानूनी राय के आधार पर गलत तरीके से दरकिनार किया गया।

चंद्रशेखरन ने किया था पद छोड़ने का फैसला

मौजूदा घटनाक्रम को समझने के लिए पिछले महीने का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। 12 अगस्त 2026 को एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड को ईमेल के जरिए जानकारी दी थी कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद चेयरमैन पद के लिए दोबारा अपना नाम पेश नहीं करेंगे।

टाटा ट्रस्ट्स ने 13 अगस्त को जारी अपने आधिकारिक बयान में उनके फैसले का सम्मान करने की बात कही थी।

सिर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने उस समय चंद्रशेखरन के योगदान की सराहना करते हुए नए चेयरमैन के चयन के लिए एक चयन समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया था। ट्रस्ट ने कहा था कि वह टाटा संस और टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुचारु और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का समर्थन करेगा।

इस घटनाक्रम के बाद माना जा रहा था कि टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन करीब एक महीने के भीतर तस्वीर बदल गई और 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन को ही अगले पांच साल के लिए फिर से चेयरमैन बनाए रखने का फैसला कर लिया।

बोर्ड के फैसले से बदली पूरी तस्वीर

17 सितंबर की बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार, नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की सिफारिश के बाद बोर्ड ने उनके नए कार्यकाल को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के खिलाफ सिर्फ नोएल टाटा ने वोट किया।

चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। 2022 में उन्हें दूसरा पांच साल का कार्यकाल मिला था। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद उन्हें एक और पांच साल का कार्यकाल देने का प्रस्ताव सामने आया है।

हालांकि, नोएल टाटा की आपत्ति के बाद अब कंपनी के शेयरधारकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। चंद्रशेखरन का निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त होना भी संबंधित कॉरपोरेट प्रक्रियाओं और शेयरधारक मंजूरी से जुड़ा है। इसलिए बोर्ड के फैसले के बावजूद आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

नोएल टाटा ने उठाये सवाल?

नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं और टाटा संस में ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी लगभग 66 प्रतिशत है।

यही वजह है कि TATA Sons के बोर्ड में ट्रस्ट्स के प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर नोएल टाटा की असहमति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह सिर्फ व्यक्तिगत मतभेद का मामला नहीं, बल्कि कंपनी के बोर्ड गवर्नेंस और ट्रस्ट्स की भूमिका से जुड़ा विवाद बन गया है।

नोएल टाटा का कहना है कि उन्होंने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट किया था और उनकी आपत्ति के बावजूद प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने बोर्ड के फैसले को ‘अवैध’ बताया है।

टाटा ट्रस्ट्स ने भी बोर्ड के फैसले को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे ‘कानूनी रूप से अमान्य’ बताया है। विवाद का एक अहम बिंदु टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में मौजूद उन प्रावधानों से जुड़ा है, जो ट्रस्ट्स द्वारा नामित निदेशकों की भूमिका और कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी मंजूरी से संबंधित हैं।

ये भी पढ़ें :- Operation Sohan: उधमपुर में रातभर चली मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी

अब AGM पर टिकी नजर

इस पूरे मामले में टाटा संस की आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) महत्वपूर्ण हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रशेखरन का निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त होना शेयरधारकों के विचार के लिए आ सकता है। टाटा संस में ट्रस्ट्स की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

टाटा संस की AGM पहले भी ट्रस्ट्स से जुड़े एक अलग मुद्दे के कारण प्रभावित हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, दो प्रमुख टाटा ट्रस्ट्स के बीच आवश्यक प्रतिनिधि को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण पहले निर्धारित बैठक को स्थगित करना पड़ा था। इससे संकेत मिलता है कि ट्रस्ट्स से जुड़े प्रशासनिक और निर्णय लेने वाले मुद्दे पहले से ही कंपनी के लिए संवेदनशील बने हुए हैं।

ऐसे में अब चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के मामले में बोर्ड के फैसले के बाद शेयरधारकों की प्रक्रिया अगला महत्वपूर्ण चरण बन सकती है।

टाटा संस की लिस्टिंग पर भी बड़ा फैसला

चंद्रशेखरन की नियुक्ति के साथ ही 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में टाटा संस की संभावित पब्लिक लिस्टिंग का मुद्दा भी सामने आया। बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक के लागू नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने और इस संबंध में आरबीआई से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया है।

यह फैसला टाटा संस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी पिछले काफी समय से स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग से बचने का रास्ता तलाश रही थी। कंपनी ने अपनी स्थिति बदलने के लिए कर्ज चुकाने और RBI के नियामकीय ढांचे से बाहर निकलने की कोशिश की थी।

लेकिन RBI ने TATA Sons के उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कंपनी ने अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) की पंजीकरण स्थिति छोड़ने की मांग की थी। इससे कंपनी पर Upper Layer NBFC के लिए लागू नियामकीय आवश्यकताओं का दबाव बना रहा।

RBI ने 2024-25 के लिए जारी अपनी अपर लेयर एनबीएफसी सूची में टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर शामिल किया था। केंद्रीय बैंक के नियामकीय ढांचे के अनुसार इस श्रेणी की कंपनियों पर अतिरिक्त नियामकीय आवश्यकताएं लागू होती हैं।

क्या खुलेगा IPO का रास्ता?

टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। उसके पास समूह की कई बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी है। टाटा की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, TATA Sons Group की प्रमुख निवेश होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। समूह की अलग-अलग कंपनियां अपने-अपने बोर्ड के निर्देशन और निगरानी में स्वतंत्र रूप से काम करती हैं।

TATA Sons की लिस्टिंग का मतलब होगा कि समूह की इस होल्डिंग कंपनी के शेयर सार्वजनिक बाजार में कारोबार के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, यह किसी सामान्य कंपनी के IPO से अलग प्रक्रिया हो सकती है क्योंकि टाटा संस के पास समूह की कई बड़ी सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।

टाटा संस ने पहले लिस्टिंग से बचने के लिए बाहरी कर्ज चुकाया और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण खत्म करने की कोशिश की थी। लेकिन आरबीआई के रुख के बाद कंपनी के सामने अब नियामकीय अनुपालन का रास्ता प्रमुख विकल्प बन गया है।   

नोएल टाटा ने लिस्टिंग का भी विरोध किया

17 सितंबर की बोर्ड बैठक में सिर्फ चंद्रशेखरन की नियुक्ति ही विवाद का विषय नहीं थी। टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग के मुद्दे पर भी नोएल टाटा की असहमति सामने आई।

नोएल टाटा ने बोर्ड के सामने टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। दूसरी तरफ बोर्ड ने आरबीआई के नियमों के अनुपालन की दिशा में कदम उठाने और केंद्रीय बैंक से मार्गदर्शन लेने का फैसला किया।

इस तरह कंपनी के सामने अब दो समानांतर मुद्दे हैं। पहला, चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की नई नियुक्ति और दूसरा, RBI के नियामकीय ढांचे के तहत टाटा संस की संभावित लिस्टिंग।

कैसा रहा चंद्रशेखरन का कार्यकाल?

एन. चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल के दौरान समूह ने कई बड़े कारोबारी फैसले लिए। इनमें एयर इंडिया का अधिग्रहण और नए कारोबारों में बड़े निवेश शामिल हैं।

टाटा समूह ने पिछले वर्षों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, डिजिटल कारोबार और अन्य नए क्षेत्रों में विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद टाटा समूह ने विमानन कारोबार को दोबारा व्यवस्थित करने की कोशिश भी की।

हालांकि, समूह इस समय कई कारोबारी चुनौतियों से भी गुजर रहा है। इसमें एयर इंडिया में बढ़ते नुकसान, जगुआर लैंड रोवर के कारोबार में गिरावट और साइबर डेटा ब्रीच से जुड़ी चुनौतियां शामिल हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बोर्ड का फैसला शेयरधारकों के स्तर पर किस तरह आगे बढ़ता है, टाटा ट्रस्ट्स अपनी आपत्ति को किस मंच पर ले जाते हैं और आरबीआई के नियामकीय निर्देशों के तहत टाटा संस की लिस्टिंग की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

Home » टाटा संस में बढ़ते नेतृत्व विवाद के बीच चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का नया कार्यकाल, नोएल टाटा ने वोट को बताया अवैध
शेयर करें: Facebook X WhatsApp

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version