Sunday, 12 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
Shraddha Walkar Murder Case: MA की परीक्षा के कारण टली आफताब की पेशी, 20 जुलाई को होनी थी सुनवाई Monaco Diamond League 2026: सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जम्पर बने विश्व जनसंख्या दिवस 2026: 8.3 अरब की दुनिया में सबसे बड़ा सवाल आबादी नहीं, बेहतर भविष्य है FIFA Golden Boot Race: मेसी, एम्बाप्पे, हालैंड या हैरी केन…जानिए इस बार किसके नाम होगी गोल्डन बूट? TRAI vs Truecaller: आखिर 140 और 1600 नंबरों को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? जानिए पूरा मामला जहां गौरी के साथ की थी नई जिंदगी की शुरुआत, उसी घर को शाहरुख ने 37 करोड़ में खरीदा आईसीएमएआई और डीटीयू की साझेदारी से शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत होगा संबंध Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को 3 महीने की जेल, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका Shraddha Walkar Murder Case: MA की परीक्षा के कारण टली आफताब की पेशी, 20 जुलाई को होनी थी सुनवाई Monaco Diamond League 2026: सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जम्पर बने विश्व जनसंख्या दिवस 2026: 8.3 अरब की दुनिया में सबसे बड़ा सवाल आबादी नहीं, बेहतर भविष्य है FIFA Golden Boot Race: मेसी, एम्बाप्पे, हालैंड या हैरी केन…जानिए इस बार किसके नाम होगी गोल्डन बूट? TRAI vs Truecaller: आखिर 140 और 1600 नंबरों को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? जानिए पूरा मामला जहां गौरी के साथ की थी नई जिंदगी की शुरुआत, उसी घर को शाहरुख ने 37 करोड़ में खरीदा आईसीएमएआई और डीटीयू की साझेदारी से शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत होगा संबंध Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को 3 महीने की जेल, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

स्वस्थ उम्र बढ़ने का संदेश लेकर 86 वर्षीय राहुल सिंह निकले दिल्ली से कसौली की नॉन-स्टॉप यात्रा पर, गट बेला की अनूठी पहल

स्वर्गीय लेखक खुशवंत सिंह के पुत्र एवं वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह ने हेल्दी एजिंग और गट हेल्थ का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए दिल्ली से कसौली की यात्रा का शुभारंभ किया।

नई दिल्ली: अच्छी सेहत को लेकर आम धारणा रही है कि विटामिन और सप्लीमेंट्स सबसे अहम हैं, लेकिन गट बेला का मानना है कि स्वास्थ्य की असली शुरुआत गट हेल्थ से होती है। इसी संदेश के साथ कंपनी ने ‘गट-फर्स्ट वेलनेस’ अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य लोगों को गट मेटाबॉलिज्म और उसके महत्व के प्रति जागरूक करना है।

इसी संदेश को लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रख्यात लेखक स्वर्गीय खुशवंत सिंह के पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह (86 वर्ष) ने मंगलवार सुबह दिल्ली से कसौली तक की अपनी नॉन-स्टॉप कार यात्रा शुरू की। इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना है कि स्वस्थ उम्र बढ़ने का अर्थ केवल लंबी उम्र जीना नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र में भी ऊर्जा, मानसिक सजगता और शारीरिक सक्रियता बनाए रखना है।

राहुल सिंह ने बताया कि पिछले सात से आठ वर्षों से वे अपनी रोज़मर्रा की वेलनेस दिनचर्या में गट बेला के साथ कोवीवेदा एंटी-एजिंग टी का भी नियमित सेवन कर रहे हैं।

कंपनी के अनुसार यह कोई प्रचार अभियान नहीं है, बल्कि लोगों का ध्यान उस बढ़ती वैज्ञानिक समझ की ओर आकर्षित करने का प्रयास है, जिसके अनुसार गट हेल्थ केवल पाचन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर की ऊर्जा, रोग प्रतिरोधक क्षमता, हार्मोन संतुलन, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ उम्र बढ़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

क्या है गट बेला और कोवीवेदा?

गट बेला एक नई वेलनेस सोच को सामने लेकर आया है, जिसका मूल सिद्धांत है—”स्वस्थ गट, स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन।”

कंपनी का कहना है कि केवल विटामिन या सप्लीमेंट लेने से बेहतर स्वास्थ्य हासिल नहीं किया जा सकता। जब तक पाचन तंत्र, गट मेटाबॉलिज्म और आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया (माइक्रोबायोम) संतुलित नहीं होंगे, तब तक शरीर पोषक तत्वों का पूरा लाभ नहीं उठा पाएगा।

इसी सोच के आधार पर तैयार किया गया गट बेला आयुर्वेद की पारंपरिक जड़ी-बूटियों और आधुनिक पोषण विज्ञान का संयोजन है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने, गट मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने, माइक्रोबायोम को संतुलित रखने और भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में सहायता करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

वहीं कोवीवेदा को फेफड़ों और श्वसन तंत्र के स्वास्थ्य को सहयोग देने के लिए तैयार किया गया है, ताकि दैनिक जीवन में समग्र स्वास्थ्य और वेलनेस को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सके।

अच्छी सेहत की शुरुआत गट से होती है

गट बेला और कोवीवेदा के संस्थापक पृथु नाथ ने कहा,

“पिछले कई दशकों से लोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए लगातार नए-नए विटामिन और सप्लीमेंट लेते रहे हैं। लेकिन हमारा मानना है कि अच्छी सेहत की असली शुरुआत गट से होती है। जब पाचन और मेटाबॉलिज्म बेहतर होते हैं, तो शरीर पोषक तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करता है। इससे ऊर्जा बढ़ती है, हार्मोन संतुलित रहते हैं, मानसिक स्पष्टता बेहतर होती है, शरीर अधिक सक्रिय महसूस करता है और व्यक्ति खुद को पहले से अधिक स्वस्थ और युवा अनुभव करता है। गट बेला आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान और मानव माइक्रोबायोम पर आधारित आधुनिक वैज्ञानिक शोध का एक संतुलित मेल है। कई लोगों को इसके सकारात्मक बदलाव दो सप्ताह के भीतर महसूस होने लगते हैं।”

गट हेल्थ क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

आज दुनिया भर में हो रहे वैज्ञानिक शोध यह साबित कर रहे हैं कि गट केवल भोजन पचाने का काम नहीं करता, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करता है। इसी कारण इसे अक्सर शरीर का “दूसरा मस्तिष्क” भी कहा जाता है।

  • गट और दिमाग का सीधा संबंध: आंतें सेरोटोनिन जैसे महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर के निर्माण में भूमिका निभाती हैं। बेहतर गट हेल्थ मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और बेहतर मनोदशा बनाए रखने में सहायक हो सकती है तथा ब्रेन फॉग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकती है।
  • बेहतर मेटाबॉलिज्म और दिनभर ऊर्जा: जब पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है, तो शरीर भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाता है। इससे ब्लड शुगर संतुलित रखने, थकान कम करने और पूरे दिन ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
  • हार्मोन संतुलन और समग्र स्वास्थ्य: स्वस्थ गट शरीर में सूजन को कम करने और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखने में भी सहयोग देता है। इसका सकारात्मक प्रभाव शरीर की कार्यक्षमता और समग्र स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
  • मजबूत प्रतिरोधक क्षमता और स्वस्थ उम्र: बेहतर गट हेल्थ नियमित पाचन, शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता और स्वस्थ उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

गट बेला को 100 प्रतिशत प्राकृतिक दैनिक सप्लीमेंट के रूप में तैयार किया गया है। यह कब्ज से राहत, बेहतर पाचन, माइक्रोबायोम के संतुलन और सम्पूर्ण गट हेल्थ को सहयोग देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है, ताकि लोग स्वयं को हल्का, ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस कर सकें।

गट-ब्रेन कनेक्शन: आंत और दिमाग का गहरा रिश्ता

पिछले कुछ वर्षों में हुए कई वैज्ञानिक अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि आंत और मस्तिष्क लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और प्रतिरक्षा प्रणाली के माध्यम से दोनों के बीच लगातार संवाद होता रहता है। यही कारण है कि गट हेल्थ का असर केवल पाचन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और शरीर की कार्यक्षमता पर भी दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गट की कार्यक्षमता बेहतर होने पर कई लोगों में पाचन संबंधी परेशानियाँ कम हो सकती हैं। साथ ही मानसिक स्पष्टता, बेहतर मनोदशा और पूरे दिन ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है।

चूँकि पाचन तंत्र ही शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण और हार्मोन संतुलन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए स्वस्थ गट समग्र शारीरिक क्षमता, बेहतर जीवन गुणवत्ता और स्वस्थ उम्र बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बीमारी का इंतज़ार नहीं, पहले से रखें सेहत का ख़याल

गट बेला का मानना है कि आज स्वास्थ्य के प्रति हमारी सोच में बदलाव की आवश्यकता है। अधिकतर लोग तब तक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते, जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए। जबकि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का उद्देश्य बीमारियों के आने का इंतज़ार करने के बजाय शरीर की प्राकृतिक क्षमता को पहले से मजबूत बनाना है।

कंपनी का कहना है कि यह अभियान लोगों के बीच इसी सोच को बढ़ावा देने का प्रयास है, ताकि स्वस्थ जीवन के लिए पाचन तंत्र और गट हेल्थ को प्राथमिकता दी जा सके।

86 की उम्र में भी पूरी ऊर्जा के साथ जीवन जी रहे हैं राहुल सिंह

दिल्ली से अपनी यात्रा शुरू करने से पहले राहुल सिंह ने कहा कि 86 वर्ष की आयु में भी वे स्वयं को पूरी तरह सक्रिय, ऊर्जावान और मानसिक रूप से सजग महसूस करते हैं।

उन्होंने कहा,

“उम्र कभी यह तय नहीं करनी चाहिए कि हम अपना जीवन कैसे जिएँ। आज भी मैं खुद को ऊर्जावान, तरोताज़ा और मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क महसूस करता हूँ। अपने गट का ध्यान रखना मेरी रोज़मर्रा की दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पिछले सात से आठ वर्षों से मैं नियमित रूप से गट बेला के साथ कोवीवेदा एंटी-एजिंग टी का भी सेवन कर रहा हूँ। यह दोनों अब मेरी वेलनेस लाइफस्टाइल का हिस्सा हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरी यह यात्रा लोगों को स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र को लेकर नए नज़रिए से सोचने के लिए प्रेरित करेगी।”

परंपरा और आधुनिक विज्ञान का संगम

गट बेला और कोवीवेदा के संस्थापक पृथु नाथ का कहना है कि गट बेला कई वर्षों के शोध और अध्ययन का परिणाम है। इसमें भारतीय आयुर्वेद की पारंपरिक जड़ी-बूटियों के ज्ञान को मानव माइक्रोबायोम पर आधारित आधुनिक वैज्ञानिक समझ के साथ जोड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं होगा, बल्कि लोगों को पहले से स्वस्थ बनाए रखना होगा। उनका मानना है कि यदि शरीर की प्राकृतिक प्रणालियाँ मजबूत हों, तो अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से पहले ही बचा जा सकता है।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।