बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में ड्रेस कोड लागू कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों को दी है। DEO को शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के औपचारिक पहनावे के साथ स्कूल परिसरों में अनुशासन बनाए रखने के निर्देशों की निगरानी करनी होगी।
पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को अब ड्यूटी के दौरान औपचारिक कपड़े पहनकर आना होगा। राज्य के शिक्षा विभाग ने स्कूलों में जींस और टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक परिधानों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। यह नियम केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों में काम करने वाले गैर-शिक्षण कर्मचारियों पर भी लागू होगा। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी है।
शिक्षा विभाग की ओर से यह निर्देश शुक्रवार, 30 अक्टूबर को जारी किया गया। अपर मुख्य सचिव (ACS) सीके अनिल ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि सरकारी विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक तथा शिक्षकेतर कर्मी शिक्षण और कार्यालय अवधि के दौरान औपचारिक परिधान में ही उपस्थित रहें। विभाग ने स्कूल परिसरों में अनुशासन और गरिमापूर्ण माहौल बनाए रखने पर भी जोर दिया है।
जींस और टी-शर्ट पहनकर स्कूल आने पर रोक
बिहार शिक्षा विभाग के जारी निर्देशों के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक और अन्य कर्मचारी ड्यूटी के दौरान जींस और टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक कपड़े पहनकर नहीं आ सकेंगे। विभाग ने इन परिधानों को कैजुअल ड्रेस की श्रेणी में रखते हुए शिक्षण और कार्यालय अवधि के दौरान स्कूल परिसर में प्रतिबंधित किया है। निर्देश में कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों का पहनावा उनकी पेशेवर जिम्मेदारियों और स्कूल के अनुशासित वातावरण के अनुरूप होना चाहिए।
यह आदेश केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकेतर कर्मचारियों पर भी लागू होगा। इसमें प्रशासनिक और गैर-शिक्षण कार्यों से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। यानी स्कूल में ड्यूटी करने वाले सभी संबंधित कर्मचारियों को विभाग के ड्रेस संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य विद्यालयों में कामकाज के दौरान औपचारिक माहौल बनाए रखना और कर्मचारियों के लिए निर्धारित आचार-व्यवहार के मानकों को लागू करना है।
पहले भी जारी हो चुके हैं ड्रेस कोड संबंधी निर्देश
बिहार शिक्षा विभाग का यह निर्देश पूरी तरह नया नहीं है। विभाग इससे पहले भी सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान औपचारिक कपड़े पहनकर आने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद कई विद्यालयों में इन नियमों का नियमित रूप से पालन नहीं किया जा रहा था। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ शिक्षक और कर्मचारी जींस, टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक परिधान पहनकर स्कूल पहुंच रहे थे। इससे विभाग के पहले जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर सवाल उठ रहे थे।
इसी स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने पुराने आदेशों को दोबारा दोहराते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। नए निर्देश के जरिए जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी शिक्षण तथा कार्यालय अवधि में औपचारिक परिधान पहनें। विभाग का उद्देश्य केवल नियमों को फिर से जारी करना नहीं, बल्कि स्कूलों में उनका नियमित पालन सुनिश्चित करना है। अब जिला स्तर पर अधिकारियों की निगरानी में यह देखा जाएगा कि विद्यालयों में निर्देशों का कितना अनुपालन हो रहा है।
डीजे और डिस्को जैसी गतिविधियों पर भी रोक
ड्रेस कोड के साथ-साथ बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूल परिसरों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी सख्ती दिखाई है। विभाग ने डीजे, डिस्को और इस तरह की अन्य गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं, जिन्हें शैक्षणिक संस्थानों के अनुशासन और गरिमा के अनुकूल नहीं माना जाता। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्कूल परिसर में ऐसे आयोजन न हों, जिनसे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो या संस्थान की मर्यादा पर सवाल उठे।
विभाग के निर्देशों का दायरा केवल शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों के स्वरूप को भी इसमें शामिल किया गया है। इसके तहत किसी भी आयोजन की योजना बनाते समय यह ध्यान रखना होगा कि उसकी प्रकृति और प्रस्तुति शैक्षणिक संस्थान के वातावरण के अनुरूप हो। स्कूल प्रशासन को भी इस संबंध में सतर्क रहने और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
निर्देशों की अनदेखी या उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, डीजे और डिस्को जैसी गतिविधियों पर रोक का अर्थ सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बंद करना नहीं है। शिक्षा कैलेंडर के तहत निर्धारित अवसरों पर अनुशासित तरीके से सांस्कृतिक आयोजन किए जा सकेंगे।
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क्या स्कूलों में नृत्य और संगीत कार्यक्रम भी बंद होंगे?
बिहार शिक्षा विभाग के नए निर्देशों का मतलब यह नहीं है कि सरकारी स्कूलों में सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों या संगीत गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, शिक्षा विभाग के कैलेंडर में निर्धारित विशेष अवसरों पर स्कूलों में नृत्य और संगीत के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। हालांकि, इन आयोजनों के दौरान अनुशासन और स्कूल की गरिमा का ध्यान रखना अनिवार्य होगा।
इसका अर्थ है कि सांस्कृतिक गतिविधियां पहले की तरह जारी रह सकती हैं, लेकिन उनका आयोजन तय शैक्षणिक कार्यक्रमों और संस्थान की मर्यादा के अनुरूप होना चाहिए। विभाग की आपत्ति मुख्य रूप से डीजे, डिस्को और ऐसे आयोजनों पर है, जिन्हें स्कूल के शैक्षणिक माहौल के अनुकूल नहीं माना गया है। सामान्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अनुशासित संगीत गतिविधियों को इस श्रेणी में नहीं रखा गया है।
रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पारंपरिक संगीत की शिक्षा देने या वाद्ययंत्रों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है। यानी स्कूलों में संगीत और कला से जुड़ी गतिविधियां जारी रह सकती हैं, बशर्ते उनका संचालन निर्धारित नियमों और शैक्षणिक वातावरण को ध्यान में रखकर किया जाए।
जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य स्तर पर जारी ड्रेस कोड संबंधी निर्देशों को लागू कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को सौंपी है। उन्हें अपने-अपने जिलों के सभी सरकारी स्कूलों और संबंधित शैक्षणिक संस्थानों तक आदेश की जानकारी पहुंचाने के साथ इसके पालन की निगरानी भी करनी होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी शिक्षण तथा कार्यालय अवधि के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप औपचारिक परिधान पहनें। इसके लिए स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने को भी कहा गया है।
जिला स्तर पर अधिकारियों को स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने और विभागीय आदेशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करनी होगी। स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने यहां कार्यरत शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को नए निर्देशों की जानकारी दे और उन्हें इनका पालन करने के लिए जागरूक करे। विभाग का जोर इस बात पर है कि आदेश केवल कागजी कार्रवाई बनकर न रह जाए, बल्कि इसे सभी सरकारी स्कूलों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। निर्देशों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित स्तर पर इसकी जानकारी विभाग तक पहुंचाने और आवश्यक कदम उठाने की जिम्मेदारी भी अधिकारियों की होगी।
शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी विभाग की सख्ती
बिहार शिक्षा विभाग ने ड्रेस कोड के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति पर भी निगरानी बढ़ा दी है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) से शिक्षकों की उपस्थिति का विस्तृत ब्योरा मांगा है। अधिकारियों को यह जानकारी दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की नियमित मौजूदगी और उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था की समीक्षा करना है।
विभाग ने ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज दैनिक उपस्थिति का रिकॉर्ड मांगा है। इसमें स्कूलों में कितने शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की, कितने शिक्षक अनुपस्थित रहे या उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हुई और कितने कर्मचारियों ने ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ विकल्प का इस्तेमाल किया, इसका पूरा विवरण शामिल है। इस जानकारी के आधार पर विभाग उपस्थिति से जुड़े मामलों की समीक्षा करेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, अनियमितता पाए जाने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। इस कदम को सरकारी स्कूलों में जवाबदेही बढ़ाने और शैक्षणिक व्यवस्था को नियमित बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

