Friday, 02 October 2026
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‘भीलवाड़ा सुर संगम 2026’ का शानदार समापन, नई दिल्ली में यादगार प्रस्तुतियों ने बांधा समां

दिग्गज हिंदुस्तानी गायक पं. मुकुल शिवपुत्र की खयाल प्रस्तुति रही समापन संध्या का मुख्य आकर्षण

नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2026:

एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय संगीत उत्सव ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ का 13वां संस्करण 5 अप्रैल को कमानी ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में एक शानदार संगीत संध्या के साथ संपन्न हुआ। पहले दिन की सफल शुरुआत के बाद, दूसरे दिन भी संगीत प्रेमियों, रसिकों और कला सराहकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिसने इस दो दिवसीय आयोजन को और भी यादगार बना दिया।

शाम की शुरुआत श्री समन्वय सरकार की आकर्षक सितार प्रस्तुति से हुई। उनकी प्रस्तुति में तकनीकी कुशलता और भावनात्मक गहराई का संतुलित संगम देखने को मिला। वहीं रागों की प्रस्तुति पर उनकी मजबूत पकड़ और लय की सूक्ष्म समझ ने श्रोताओं के साथ गहरा जुड़ाव बनाया।

अपनी प्रस्तुति के बाद श्री समन्वय सरकार ने कहा, “भीलवाड़ा सुर संगम में प्रस्तुति देना हमेशा खास होता है, क्योंकि यहां के श्रोता संगीत को गहराई से समझते और खुले मन से सुनते हैं। इससे कलाकार को राग की आत्मा को पूरी तरह व्यक्त करने का अवसर मिलता है।” उन्होंने आगे कहा, “आज श्रोताओं की ऊर्जा और ध्यान ने इस प्रस्तुति को मेरे लिए बेहद संतोषजनक बना दिया।”

शाम का मुख्य आकर्षण दिग्गज हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक (खयाल) पं. मुकुल शिवपुत्र की प्रस्तुति रही। अपनी आत्ममंथन और आध्यात्मिकता से भरी शैली के लिए पहचाने जाने वाले पंडित मुकुल ने श्रोताओं को एक ध्यानपूर्ण संगीत अनुभव में ले गए। उनकी प्रस्तुति में जटिल आलाप और गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की ऊंचाई को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

अपनी प्रस्तुति पर विचार साझा करते हुए पं. मुकुल शिवपुत्र ने कहा, “मेरे लिए संगीत एक अंदर की यात्रा है—यह केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि साधना है। भीलवाड़ा सुर संगम जैसे मंच इस गहरे जुड़ाव को सामने आने का अवसर देते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “यहां के श्रोताओं की शांति और ग्रहणशीलता ऐसा माहौल बनाती है, जहां संगीत खुलकर सांस ले सकता है और विकसित हो सकता है।”

दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने पहले दिन की कलात्मक ऊंचाई को बनाए रखते हुए इस उत्सव की उस प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया, जिसके तहत भारत की विविध और समृद्ध संगीत परंपराओं को मंच दिया जाता है।

उत्सव के सफल समापन पर एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप के चेयरमैन श्री रवि झुनझुनवाला ने कहा, “भीलवाड़ा सुर संगम भारत की समृद्ध संगीत विरासत का उत्सव है और यह ऐसा मंच है, जो उत्कृष्ट कला और सराहने वाले श्रोताओं को एक साथ लाता है। दोनों दिनों में मिले शानदार प्रतिसाद ने हमारे इस संकल्प को और मजबूत किया है कि हम शास्त्रीय संगीत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाते रहें।”

उन्होंने आगे कहा, “यह उत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक परंपरा है, जिसे हम हर साल आगे बढ़ाने पर गर्व करते हैं। खासकर यह देखकर खुशी होती है कि नई पीढ़ी, जिसमें मेरा बेटा भी शामिल है, इस सोच को आगे बढ़ा रही है और हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत बनाए रख रही है।”

दोनों दिनों में बड़ी संख्या में दर्शकों की मौजूदगी के साथ, भीलवाड़ा सुर संगम 2026 ने एक बार फिर यह दिखाया कि शास्त्रीय संगीत आज भी लोगों को जोड़ने और गहरे सांस्कृतिक संबंध बनाने की ताकत रखता है।

एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा हर साल आयोजित किया जाने वाला यह उत्सव भारत की शास्त्रीय कलाओं को बढ़ावा देने और कलाकारों व श्रोताओं के बीच सा

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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