Thursday, 09 July 2026
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98th Grandmaster: 18 वर्षीय अश्वत एस ने रचा इतिहास, भारत को मिला 98वां ग्रैंडमास्टर

18 वर्षीय अश्वत एस भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बने। जानिए उनके संघर्ष, पुणे GM टूर्नामेंट की ऐतिहासिक जीत, कुंटे काका को श्रद्धांजलि और 100वें GM की ओर बढ़ते भारत की कहानी।

पुणे: भारत लगातार विश्व शतरंज (Chess) की नई महाशक्ति बनता जा रहा है। विश्वनाथन आनंद के बाद जिस तरह देश में युवा खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार हुई है, उसने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी कड़ी में भारत को अब अपना 98वां ग्रैंडमास्टर (Grandmaster) भी मिल गया है।

तमिलनाडु के युवा खिलाड़ी अश्वत एस (Aswath S) ने पुणे में आयोजित Pune International Grandmaster Chess Tournament 2026 के दौरान तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली।

इस उपलब्धि के साथ ही अश्वत भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बन गए। खास बात यह है कि कुछ ही दिन पहले हर्षवर्धन जी.बी. भारत के 97वें ग्रैंडमास्टर बने थे और अब भारत 100 ग्रैंडमास्टर का आंकड़ा छूने से केवल दो कदम दूर रह गया है।

कौन हैं Aswath S?

Aswath S तमिलनाडु से आते हैं और बचपन से ही शतरंज की दुनिया में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते रहे हैं। उनका जन्म वर्ष 2008 में हुआ था। वे ऐसे परिवार से आते हैं जहां शतरंज केवल खेल नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा रहा है।

उनके पिता शिवकुमार और माता सुगंधी दोनों ही पेशेवर शतरंज कोच हैं। यही कारण रहा कि अश्वत ने बेहद कम उम्र में शतरंज की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने महज तीन वर्ष की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। घर का माहौल पूरी तरह शतरंज से जुड़ा होने के कारण उन्हें शुरुआती दौर से ही बेहतरीन मार्गदर्शन मिला।

तीन साल की उम्र से शुरू हुआ सफर

जहां अधिकांश बच्चे उस उम्र में खिलौनों से खेलना सीखते हैं, वहीं अश्वत शतरंज की बिसात पर चालें समझ रहे थे। उनके माता-पिता ने केवल खेल सिखाया ही नहीं बल्कि मानसिक मजबूती, धैर्य और लगातार अभ्यास की आदत भी विकसित की। धीरे-धीरे वे तमिलनाडु की आयु वर्ग प्रतियोगिताओं में पहचान बनाने लगे।

राष्ट्रीय स्तर की जूनियर प्रतियोगिताओं में अच्छे प्रदर्शन के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलना शुरू किया और लगातार अपनी FIDE रेटिंग बढ़ाते रहे।

10वीं बोर्ड परीक्षा के कारण लेना पड़ा ब्रेक

अश्वत की सफलता का सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि 10वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान उन्हें लगभग छह महीने तक प्रतिस्पर्धी शतरंज से दूरी बनानी पड़ी थी।

बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के कारण वे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं खेल सके। किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए यह बड़ा झटका माना जाता है क्योंकि लगातार प्रतियोगिताएं न खेलने से रेटिंग और फॉर्म दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

लेकिन परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्होंने दोबारा पूरे समर्पण के साथ अभ्यास शुरू किया और कुछ ही समय में शानदार वापसी करते हुए ग्रैंडमास्टर बनने का सपना पूरा कर लिया।

पुणे इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट बना ऐतिहासिक

आपको बता दें कि Aswath S ने यह अद्भुत कारनामा अपने तीसरे और निर्णायक GM Norm Pune International Grandmaster Round Robin Tournament 2026 में हासिल किया।

यह प्रतियोगिता पुणे में आयोजित की गई थी, जिसमें भारत सहित कई देशों के इंटरनेशनल मास्टर और ग्रैंडमास्टर शामिल हुए।

टूर्नामेंट के दौरान अश्वत ने लगातार स्थिर प्रदर्शन किया और निर्णायक मुकाबलों में महत्वपूर्ण अंक जुटाए। आखिरी दौर तक पहुंचते-पहुंचते पूरा ध्यान इस बात पर था कि क्या वे तीसरा GM Norm पूरा कर पाएंगे।

उन्होंने दबाव के बीच शानदार खेल दिखाया और आवश्यक अंक हासिल कर भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव प्राप्त किया।

जीत के बाद कुंटे काकाको किया याद

भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बनने के बाद Aswath S ने अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि दिवंगत शतरंज प्रशासक और आयोजक प्रकाश कुंटे को समर्पित की, जिन्हें शतरंज जगत में स्नेहपूर्वक “कुंटे काका” के नाम से जाना जाता था। अश्वत ने निर्णायक अंतिम दौर में काले मोहरों से जीत दर्ज कर अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया और इसके बाद कुंटे काका को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

उल्लेखनीय है कि 7 जुलाई 2026 को, पुणे इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर राउंड-रॉबिन टूर्नामेंट के उद्घाटन से कुछ ही घंटे पहले, 80 वर्ष की आयु में प्रकाश कुंटे का निधन हो गया था।

उनका सपना भारत में ऐसे मजबूत ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट आयोजित करना था, ताकि युवा खिलाड़ियों को नॉर्म हासिल करने के लिए यूरोप के महंगे टूर्नामेंटों पर निर्भर न रहना पड़े। अश्वत की यह सफलता उसी सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि मानी जा रही है।

ग्रैंडमास्टर बनने की प्रक्रिया

शतरंज की दुनिया में ग्रैंडमास्टर (Grandmaster या GM) सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च खिताबों में से एक माना जाता है। यह उपाधि अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ FIDE (Fédération Internationale des Échecs) द्वारा उन खिलाड़ियों को दी जाती है, जो लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।

ग्रैंडमास्टर बनना किसी भी शतरंज खिलाड़ी का सबसे बड़ा सपना होता है, क्योंकि इसे हासिल करने के लिए वर्षों की मेहनत, रणनीतिक समझ और मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता होती है।

ग्रैंडमास्टर बनने के लिए खिलाड़ी को सबसे पहले 2500 या उससे अधिक की FIDE रेटिंग हासिल करनी होती है। इसके साथ ही उसे कम से कम तीन ग्रैंडमास्टर नॉर्म (GM Norms) भी पूरे करने होते हैं।

ये नॉर्म केवल FIDE से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ही दिए जाते हैं, जहां अलग-अलग देशों के मजबूत इंटरनेशनल मास्टर और ग्रैंडमास्टर खिलाड़ियों के खिलाफ निर्धारित प्रदर्शन करना अनिवार्य होता है। केवल अच्छा खेलना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रत्येक टूर्नामेंट में FIDE के तय मानकों के अनुसार प्रदर्शन करना भी जरूरी होता है।

इसी वजह से दुनिया भर के लाखों शतरंज खिलाड़ियों में से केवल बहुत कम लोग ही ग्रैंडमास्टर बनने का सपना पूरा कर पाते हैं। यही कारण है कि इस उपाधि को शतरंज जगत में असाधारण उपलब्धि और उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है।

भारत बन रहा है विश्व शतरंज की नई महाशक्ति

एक समय था जब भारतीय शतरंज की पहचान मुख्य रूप से विश्वनाथन आनंद तक सीमित थी, लेकिन पिछले एक दशक में देश ने इस खेल में अभूतपूर्व प्रगति की है। आज भारत विश्व शतरंज की सबसे मजबूत प्रतिभाओं को तैयार करने वाले देशों में शामिल हो चुका है।

डी. गुकेश, आर. प्रग्गनानंदा, अर्जुन एरिगैसी, आर. वैशाली, विदित गुजराती, निहाल सरीन, लियोन ल्यूक मेंडोंका, अर्जुन कल्याण, हर्षवर्धन जी.बी. और अब अश्वत एस जैसे युवा खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों ने विश्व के शीर्ष ग्रैंडमास्टर्स को कड़ी चुनौती देकर भारत की नई पहचान बनाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत शतरंज अकादमियों, ऑनलाइन प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बढ़ती भागीदारी और विश्वनाथन आनंद की प्रेरणा ने इस बदलाव को गति दी है। भारत के लगातार बढ़ते ग्रैंडमास्टर्स इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश विश्व शतरंज की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।

100 ग्रैंडमास्टर के ऐतिहासिक आंकड़े के बेहद करीब भारत

Aswath S के भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर बनने के साथ ही देश अब एक और ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब पहुंच गया है। भारत के पास अब कुल 98 ग्रैंडमास्टर हैं और केवल दो नए ग्रैंडमास्टर बनने के बाद यह संख्या 100 तक पहुंच जाएगी।

यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के तेज़ी से बढ़ते स्तर और युवा प्रतिभाओं की मजबूती का प्रमाण होगी। शतरंज विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कई भारतीय इंटरनेशनल मास्टर (IM) अपने तीसरे ग्रैंडमास्टर नॉर्म और 2500 FIDE रेटिंग के बेहद करीब हैं। यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले महीनों में भारत 100 ग्रैंडमास्टर का आंकड़ा पार करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है।

यह उपलब्धि केवल संख्या नहीं होगी, बल्कि इस बात का भी संकेत होगी कि भारत अब विश्व शतरंज की नई महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ये भी पढ़ें :- Harshavardhan GB: 4 साल की उम्र में सीखा शतरंज, अब बने भारत के 97वें ग्रैंडमास्टर

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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