CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई पर अरिजीत सिंह ने प्रतिक्रिया दी। सिंगर ने छात्रों के समर्थन में सवाल उठाए और कहा कि ‘हर चीज याद रखा जाएगा।’
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शन और 20 जुलाई को हुए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई की खबरों के बाद अब यह मामला मनोरंजन जगत तक भी पहुंच गया है।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायक अरिजीत सिंह ने छात्रों के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई है।
अरिजीत सिंह ने पुलिस कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए वर्दी में मौजूद लोगों के व्यवहार पर सवाल उठाया और कहा कि ‘सब याद रखा जाएगा।’ उनकी प्रतिक्रिया में यह भी संकेत दिया गया कि अगर कोई व्यक्ति या समूह उनकी इस टिप्पणी से नाखुश है या इस तरह के व्यवहार का समर्थन करता है, तो वह उनके गानों को अपनी प्लेलिस्ट से हटा सकता है।
इस टिप्पणी को उनके विरोध और असहमति के सार्वजनिक प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
अरिजीत सिंह ने क्या कहा?
CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर अरिजीत सिंह की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई है। उन्होंने वर्दी पहने लोगों के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और इसे आम लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार से जोड़कर सवाल उठाया।
उन्होंने लिखा कि – “यार अब तो स्टूडेंट्स को मार रहे हैं यहाँ आप लोग। हैलो दिल्ली पुलिस, क्या आपको शर्म नहीं आती!!?? हैलो नेता, मंत्री !! क्या चल रहा है भाई!! अपने आपको भगवान समझ लिया है क्या? हर चीज़ याद रखा जायेगा! हर हर महादेव! याद रखना बदलाव ही एकमात्र निरंतर सत्य है! (The Only Constant Is Change!)”
अरिजीत ने कथित तौर पर यह भी कहा कि जो लोग इस तरह की कार्रवाई या रवैये का समर्थन करते हैं, वे उनके गाने अपनी प्लेलिस्ट से हटा सकते हैं। यह बात इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि गायक ने सीधे तौर पर अपने संगीत को लेकर अपने समर्थकों से किसी तरह की मांग करने के बजाय इसे एक तरह की नैतिक असहमति के रूप में पेश किया।
उनकी टिप्पणी को कई लोगों ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता के तौर पर देखा। हालांकि, अरिजीत की प्रतिक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
CJP प्रदर्शन क्या है और छात्र क्यों कर रहे हैं विरोध?
दिल्ली में चल रहा CJP प्रदर्शन कथित NEET-UG पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
CJP समर्थकों का कहना है कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था को लेकर छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। NEET जैसी परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी है और इसके परिणाम मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का रास्ता तय करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठने वाला कोई भी सवाल छात्रों और अभिभावकों के बीच व्यापक चिंता पैदा करता है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके समर्थक इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनी। बाद में स्वास्थ्य कारणों से वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों का आंदोलन जारी रहा।
13 जुलाई को CJP ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च निकालने की घोषणा की थी। यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था। संगठन ने लोगों से शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील की थी।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर क्या हुआ?
20 जुलाई को CJP के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। संसद का मानसून सत्र शुरू होने के कारण केंद्रीय दिल्ली में पहले से ही भारी सुरक्षा तैनात थी।
रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र और युवा कार्यकर्ता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इनमें कई महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए लाठी और डंडों का इस्तेमाल किया।
मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे छात्रों को पुलिस ने रोकने की कोशिश की।
दूसरी ओर, पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि स्थिति तब बिगड़ी जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा कर्मियों पर कथित तौर पर पत्थर फेंके। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया।
रिपोर्टों के अनुसार, झड़प के दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मी और 50 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए। 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई।
गानों को Playlist से हटाने की बात क्यों कही?
अरिजीत सिंह की प्रतिक्रिया का एक और हिस्सा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने उन लोगों को अपने गाने प्लेलिस्ट से हटाने की बात कही जो उनके रुख से सहमत नहीं हैं या प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई का समर्थन करते हैं।
इस बयान को कई लोगों ने एक तरह के नैतिक विरोध के तौर पर देखा। संगीत किसी कलाकार की पहचान और उसके दर्शकों के बीच संबंध का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में किसी कलाकार का यह कहना कि अगर आप उसके विचारों से सहमत नहीं हैं तो उसके गाने न सुनें, एक व्यक्तिगत राजनीतिक और सामाजिक रुख के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, इस पर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोगों ने इसे कलाकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया, जबकि कुछ ने सवाल उठाया कि क्या किसी कलाकार को अपने राजनीतिक विचारों के आधार पर प्रशंसकों से दूरी बनाने की अपील करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच अरिजीत की टिप्पणी ने CJP प्रदर्शन को एक नया सार्वजनिक और सांस्कृतिक आयाम जरूर दे दिया है।
सोशल मीडिया बना विरोध का सबसे बड़ा मंच
CJP आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। प्रदर्शनकारियों ने X, Instagram और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो साझा किए।
पुलिस कार्रवाई के आरोपों से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए। इसी डिजिटल माहौल में अरिजीत सिंह की प्रतिक्रिया भी तेजी से लोगों तक पहुंची।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। 20 जुलाई को कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया था कि प्रदर्शनकारियों ने NTA कार्यालय में प्रवेश कर लिया है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन दावों को गलत और निराधार बताया था। पुलिस ने कहा कि NTA कार्यालय में स्थिति सामान्य रही और वहां सुरक्षा उल्लंघन नहीं हुआ।
यह घटनाक्रम बताता है कि ऐसे संवेदनशील आंदोलनों के दौरान सोशल मीडिया जहां लोगों की आवाज को तेजी से व्यापक स्तर पर पहुंचाता है, वहीं अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार का जोखिम भी बढ़ जाता है।
क्या अरिजीत सिंह की प्रतिक्रिया आंदोलन को नई ताकत देगी?
अरिजीत सिंह की लोकप्रियता देश-विदेश में काफी बड़ी है। ऐसे में उनका किसी सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देना निश्चित रूप से चर्चा को बढ़ा सकता है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उनकी टिप्पणी आंदोलन की दिशा को कितना प्रभावित करेगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि CJP प्रदर्शन अब केवल छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा है।
फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया ने इसे एक व्यापक सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना दिया है।
अरिजीत सिंह की टिप्पणी का सबसे बड़ा असर शायद यही है कि इसने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका क्या होनी चाहिए और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा किस तरह सुनिश्चित की जानी चाहिए।
‘Yeh Awarapan’ से अरिजीत की वापसी?
बॉलीवुड के मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह के फैंस उस वक्त हैरान रह गए, जब उनकी आवाज में Awarapan 2 का नया गाना ‘Yeh Awarapan’ रिलीज हुआ। गाना सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि क्या सिंगर ने प्लेबैक सिंगिंग से अपने रिटायरमेंट के फैसले को बदल दिया है।
हालांकि, इसपर अरिजीत सिंह के मैनेजर ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। मैनेजर के मुताबिक, यह गाना सिंगर की वापसी नहीं है, बल्कि पहले से किए गए कमिटमेंट का हिस्सा है। यानी अरिजीत ने रिटायरमेंट के बाद कोई नया प्लेबैक असाइनमेंट स्वीकार नहीं किया है।
जनवरी 2026 में सिंगर ने नए प्लेबैक प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनका संगीत से रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में ‘Yeh Awarapan’ की रिलीज को उनकी वापसी के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
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