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तीन आत्महत्याएं और एक हत्या के बाद भी बेटिंग ऐप्स पर रोक का फैसला टला, डॉ. पॉल का सवाल—“कब होगा न्याय?”

नई दिल्ली, 18 अगस्त 2025

देशभर में युवाओं की आत्महत्याओं और अपराधों से जुड़ते बेटिंग ऐप्स के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. के. ए. पॉल ने कहा कि न्याय में देरी हर दिन को और खतरनाक बना रही है।

इस स्थगन पर गहरी चिंता जताते हुए डॉ. के. ए. पॉल ने कहा कि हर दिन की देरी से भारतीय युवाओं की जान जा रही है। उन्होंने कहा, “कोर्ट ने ही 18 अगस्त को अंतरिम आदेश जारी करने और मामले को केंद्र सरकार को सौंपने का आश्वासन दिया था। लेकिन अचानक हुई देरी से हालात और बिगड़ रहे हैं। बीते दिनों ही तीन युवाओं ने आत्महत्या कर ली, एक युवक ने बेटिंग के पैसों को लेकर अपने पिता की हत्या कर दी और एक अन्य शख्स अपनी मासूम बेटी को बेसहारा छोड़ गया। आखिर कितनी और जानें जाएँगी तब जाकर निर्णायक कदम उठाया जाएगा?”

डॉ. पॉल ने युवा सुरेश का दर्दनाक मामला भी उठाया। सुरेश ने आत्महत्या से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बेटिंग ऐप्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। वह अपनी छह साल की बेटी को पीछे छोड़ गया।

उन्होंने कहा, “ये ऐप्स करोड़ों युवाओं का भविष्य निगल रहे हैं। लगभग 30 करोड़ युवा, सेलिब्रिटीज़, क्रिकेटरों और अभिनेताओं के भ्रामक प्रचार के चलते इन अवैध प्लेटफार्मों के शिकार हो रहे हैं। परिवार बर्बादी के कगार पर पहुँच रहे हैं, लेकिन कार्रवाई अब भी अधूरी है। अदालत की तत्परता ज़मीनी हालात की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए।”

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इसी बीच, डॉ. पॉल ने भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में भी एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने झूठी खबरों और मनगढ़ंत दावों पर रोक (गैग ऑर्डर) की मांग की है। यमन में फांसी की सज़ा का सामना कर रहीं निमिषा ने जेल से एक पत्र भेजा है, जिस पर उनकी मां और भारत सरकार द्वारा अधिकृत पावर ऑफ अटॉर्नी धारक श्री सैमुअल जेरोम के हस्ताक्षर भी हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि झूठी रिपोर्टें और fabricated दावे एक बार फिर पीड़ित अब्दुल फतेह द्वारा उनकी त्वरित फांसी की मांग को हवा दे रहे हैं—संभवतः 20 अगस्त तक।

डॉ. पॉल ने कहा, “यह तीसरी बार है जब ऐसी मांग उठी है। जुलाई में फांसी पर रोक मिली थी, लेकिन अब नए झूठे दावों ने निमिषा की जान को फिर से संकट में डाल दिया है। इन रिपोर्टों का न तो निमिषा से कोई संबंध है और न ही अब्दुल फतेह से, फिर भी इन्हें हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। अदालत को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, जैसे उसने अन्य संवेदनशील मामलों में किया था, ताकि न्याय की भारी भूल को रोका जा सके।”

अंत में डॉ. पॉल ने स्पष्ट कहा कि बेटिंग ऐप्स का खतरा और निमिषा प्रिया का मामला दोनों ही राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे हैं। “कोर्ट ने 18 अगस्त की तारीख खुद तय की थी, लेकिन अब सुनवाई टल गई है। मैं उम्मीद करता हूं कि कल माननीय सुप्रीम कोर्ट निर्णायक कदम उठाएगा—ताकि हजारों भारतीय युवाओं को घातक बेटिंग ऐप्स से बचाया जा सके और एक निर्दोष भारतीय नर्स को गलत फांसी से।”

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Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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