MiG-21 Bison उड़ाने वाले अभिनंदन वर्धमान अब ATR 72-600 की कमान संभालेंगे। भारतीय वायुसेना से रिटायरमेंट के बाद 2019 के वीर चक्र विजेता ने FLY91 के साथ कमर्शियल एविएशन में कदम रखा है।
नई दिल्ली: 2019 में भारत-पाकिस्तान के बीच हवाई संघर्ष के दौरान अपने साहस के लिए देशभर में चर्चित हुए पूर्व भारतीय वायुसेना अधिकारी ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने अपने करियर की नई पारी शुरू कर दी है। करीब 22 साल भारतीय वायुसेना में सेवा देने के बाद उन्होंने मार्च 2026 में समय से पहले सेवानिवृत्ति ली और अब गोवा स्थित क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 के साथ कमर्शियल पायलट के तौर पर जुड़ गए हैं।
अभिनंदन वर्धमान का यह बदलाव इसलिए खास है क्योंकि सैन्य विमान उड़ाने वाले एक फाइटर पायलट के लिए नागरिक उड्डयन में प्रवेश कर यात्री विमान उड़ाना करियर का एक बिल्कुल अलग चरण होता है। 2019 में उनका नाम जहां MiG-21 Bison और पाकिस्तान के साथ हवाई मुठभेड़ से जुड़ा था, वहीं अब वह क्षेत्रीय हवाई संपर्क के लिए इस्तेमाल होने वाले ATR 72-600 जैसे यात्री विमान उड़ाते नजर आएंगे। FLY91 इस समय इसी प्रकार के टर्बोप्रॉप विमानों का संचालन करती है।
हालांकि, उनकी नई भूमिका के बावजूद 2019 की घटना उनके करियर का सबसे चर्चित अध्याय बनी हुई है। उस घटना ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और बाद में उन्हें भारत के युद्धकालीन वीरता पुरस्कार वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
22 साल की सैन्य सेवा के बाद नई शुरुआत
अभिनंदन वर्धमान ने जून 2004 में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान पायलट के रूप में कमीशन हासिल किया था। उन्होंने करीब 22 साल तक वायुसेना में सेवा की और इस दौरान विभिन्न लड़ाकू विमानों पर प्रशिक्षण और संचालन का अनुभव हासिल किया। बाद में वह MiG-21 Bison स्क्वाड्रन का हिस्सा बने। उनके सैन्य करियर में 2019 का हवाई संघर्ष सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
वर्धमान ने 19 जून 2017 को विंग कमांडर का पद संभाला और दिसंबर 2021 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया। ग्रुप कैप्टन भारतीय वायुसेना का वरिष्ठ अधिकारी रैंक है, जिसे भारतीय थलसेना में कर्नल के समकक्ष माना जाता है।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना से समय से पहले सेवानिवृत्ति ली। अधिकारियों के अनुसार वरिष्ठ स्तर पर पहुंचने के बाद सैन्य पायलटों की उड़ान संबंधी जिम्मेदारियां कई बार कम हो जाती हैं और प्रशासनिक भूमिकाएं बढ़ती हैं। ऐसे में कुछ पायलट सैन्य सेवा के बाद नागरिक उड्डयन में करियर चुनते हैं।
2019 में राष्ट्रीय चर्चा बने अभिनंदन
अभिनंदन वर्धमान का नाम 27 फरवरी 2019 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुई हवाई मुठभेड़ के बाद पूरी दुनिया में चर्चा में आया था। यह घटना भारतीय वायुसेना की बालाकोट कार्रवाई के एक दिन बाद हुई थी।
भारत के आधिकारिक विवरण के अनुसार, उस दिन पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश की। भारतीय वायुसेना ने उनका मुकाबला किया। इसी हवाई संघर्ष के दौरान विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने अपने MiG-21 Bison से एक पाकिस्तानी F-16 को मार गिराया। भारत सरकार और वीर चक्र प्रशस्ति-पत्र में इस कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, F-16 के गिराए जाने को लेकर पाकिस्तान ने भारत के दावे का खंडन किया था।
मुठभेड़ के दौरान अभिनंदन का MiG-21 भी मिसाइल की चपेट में आया। उन्हें विमान से बाहर निकलना पड़ा और उनका पैराशूट पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में उतरा। इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया।
करीब तीन दिन बाद 1 मार्च 2019 को उन्हें भारत को सौंप दिया गया। उनकी वापसी देश में बेहद चर्चित घटना बनी और उनका नाम साहस, संयम और सैन्य अनुशासन के प्रतीक के रूप में सामने आया।
वीर चक्र से हुए सम्मानित
2019 की हवाई मुठभेड़ में उनकी भूमिका के लिए अभिनंदन वर्धमान को वीर चक्र प्रदान किया गया। वीर चक्र भारत के युद्धकालीन तीसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों में शामिल है।
उनके आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र में दुश्मन के विमान का पता लगाने, अपनी फॉर्मेशन को खतरे के बारे में सतर्क करने और इसके बाद हवाई मुकाबले में एक F-16 को मार गिराने का उल्लेख किया गया है। प्रशस्ति-पत्र में यह भी कहा गया कि विमान से बाहर निकलने और दुश्मन के कब्जे में जाने के बाद भी उन्होंने साहस और संयम का प्रदर्शन किया।
उन्हें नवंबर 2021 में राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से वीर चक्र मिला था। उसी वर्ष उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नति भी मिली।
एयरफोर्स परिवार से पुराना रिश्ता
अभिनंदन वर्धमान के लिए भारतीय वायुसेना कोई सामान्य करियर विकल्प नहीं था। उनका परिवार कई पीढ़ियों से सैन्य विमानन से जुड़ा रहा है।
उनके पिता एयर मार्शल सिम्हाकुट्टी वर्धमान भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ लड़ाकू पायलट और टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने भी MiG-21 उड़ाया था। परिवार के मुताबिक अभिनंदन के दादा भी वायुसेना में थे। इस तरह वर्धमान परिवार में लड़ाकू विमान उड़ाने की परंपरा रही है।
सिम्हाकुट्टी वर्धमान ने चार दशक के करीब सैन्य विमानन से जुड़े विभिन्न दायित्व निभाए और 2012 में एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए। उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 4,000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे किए थे।
अभिनंदन ने भी अपने पिता की तरह लड़ाकू विमान पायलट बनने का रास्ता चुना। उन्होंने सैनिक स्कूल अमरावथिनगर से पढ़ाई की और बाद में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण हासिल किया। 2004 में वह भारतीय वायुसेना की लड़ाकू शाखा में शामिल हुए।
MiG-21 से ATR 72-600 तक का सफर
अभिनंदन की नई नौकरी में सबसे बड़ा बदलाव विमान का है।
भारतीय वायुसेना में उन्होंने लड़ाकू विमान उड़ाए। MiG-21 Bison उनके करियर का सबसे चर्चित विमान बना। इसके विपरीत FLY91 के बेड़े में ATR 72-600 जैसे टर्बोप्रॉप यात्री विमान शामिल हैं।
ATR के मुताबिक जनवरी 2026 में FLY91 के पास चार ATR 72-600 विमान थे और दो और विमान आने वाले थे। कंपनी ने उसी दौरान ATR के साथ आठ साल का ग्लोबल मेंटेनेंस एग्रीमेंट भी किया।
FLY91 ने 2024 में व्यावसायिक उड़ानें शुरू की थीं और उसका फोकस देश के क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने पर है। कंपनी गोवा को अपना प्रमुख आधार बनाकर छोटे और मध्यम शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काम कर रही है।
इसलिए अभिनंदन की नई भूमिका सिर्फ नौकरी बदलने तक सीमित नहीं है। वह अब सैन्य मिशन के बजाय यात्रियों को एक शहर से दूसरे शहर तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
फाइटर पायलट से कितना अलग कमर्शियल पायलट?
सैन्य और नागरिक विमानन के काम में काफी अंतर होता है। लड़ाकू पायलटों को हवाई युद्ध, सामरिक उड़ान, हथियार प्रणालियों और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। दूसरी ओर कमर्शियल पायलट का सबसे बड़ा फोकस यात्रियों की सुरक्षा, उड़ान संचालन, मानक प्रक्रियाओं और एयरलाइन नियमों पर होता है।
भारतीय वायुसेना के अनुभवी पायलटों के लिए नागरिक उड्डयन में जाना नया रास्ता नहीं है। लेकिन उन्हें नागरिक विमानन के नियामकीय मानकों को भी पूरा करना पड़ता है। रिपोर्टों के अनुसार सैन्य पायलटों को कमर्शियल उड़ान के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं, लाइसेंसिंग, मेडिकल फिटनेस और नागरिक विमानन से जुड़े परीक्षणों से गुजरना होता है।
अभिनंदन के मामले में सैन्य विमानन का लंबा अनुभव निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन यात्री विमान उड़ाने के लिए उन्हें नागरिक विमानन के ऑपरेशनल मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण भी लेना होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है FLY91?
FLY91 भारत की नई पीढ़ी की क्षेत्रीय एयरलाइनों में शामिल है। कंपनी का उद्देश्य बड़े मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।
2026 में कंपनी ने अपने बेड़े और नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। ATR के अनुसार एयरलाइन की विमान उपयोगिता 2,500 से अधिक उड़ान घंटे प्रति विमान प्रति वर्ष के स्तर पर पहुंच चुकी थी और कंपनी अपने बेड़े के विस्तार की तैयारी कर रही थी।
अगस्त 2026 में कंपनी के बारे में यह भी रिपोर्ट सामने आई कि वह ATR 72 विमानों की संख्या बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। FLY91 कम से कम 20 अतिरिक्त ATR टर्बोप्रॉप विमानों के संभावित ऑर्डर के करीब थी, हालांकि उस समय यह सौदा आधिकारिक रूप से अंतिम नहीं हुआ था।
ऐसे समय में एक अनुभवी पूर्व सैन्य पायलट का कंपनी से जुड़ना उसके विस्तार के दौर में एक महत्वपूर्ण पेशेवर नियुक्ति भी माना जा सकता है।
अभिनंदन की दूसरी पारी के मायने
अभिनंदन वर्धमान की कहानी 2019 में जिस तरह शुरू हुई थी, उसका अगला अध्याय काफी अलग है।
तब वह एक फाइटर जेट में सवार होकर हवाई सीमा की रक्षा कर रहे थे। आज वह उसी आसमान में एक यात्री विमान के कॉकपिट में बैठकर लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।
उनके सैन्य करियर की पहचान वीरता, अनुशासन और मुश्किल परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता से बनी। अब इन्हीं अनुभवों को नागरिक उड्डयन के अलग माहौल में इस्तेमाल करने का मौका उनके सामने है।
43 वर्ष की उम्र में शुरू हुई यह नई पारी उनके लिए केवल पेशे का बदलाव नहीं, बल्कि विमानन की दुनिया में एक अलग भूमिका की शुरुआत है। भारत के सैन्य इतिहास में उनका नाम 2019 की घटना के कारण दर्ज हो चुका है। अब नागरिक विमानन में उनकी यात्रा यह तय करेगी कि उनकी पहचान का अगला अध्याय किस तरह लिखा जाता है।
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