भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की रफ्तार से बढ़ी, लेकिन क्या इसका फायदा आम नागरिकों तक भी पहुंच रहा है? रघुराम राजन ने GDP ग्रोथ के बीच रोजगार और निवेश की स्थिति पर सवाल उठाकर नई बहस छेड़ दी है।
नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP ग्रोथ दर्ज की है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह वृद्धि बाजार के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7 प्रतिशत के अनुमान से ज्यादा रही।
लेकिन आंकड़े जारी होने के तुरंत बाद अर्थव्यवस्था की स्थिति, GDP की गणना और रोजगार को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने सवाल उठाया है कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेज रफ्तार से बढ़ रही है तो देश में पर्याप्त और अच्छी नौकरियां क्यों नहीं बन रही हैं। उन्होंने निवेश और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की रफ्तार पर भी सवाल किए हैं।
इसी बीच पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी GDP के आंकड़ों की व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल के आंकड़े में बदलाव को समझना जरूरी है। उनके 2.6 प्रतिशत वाले हिसाब को लेकर सरकार और अर्थशास्त्रियों के बीच अलग बहस शुरू हो गई है।
वहीं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने GDP के आलोचकों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि पुराने और नए GDP सीरीज के आंकड़ों की तुलना नहीं की जा सकती। सरकार का कहना है कि नई GDP सीरीज में बदलाव सांख्यिकीय पद्धति और नए आंकड़ों को शामिल करने के कारण हुए हैं, न कि विकास दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए।
क्या है 7.8% GDP का पूरा आंकड़ा?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 31 अगस्त को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के GDP आंकड़े जारी किए। नई सीरीज के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में वास्तविक GDP 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत थी।
मौजूदा कीमतों पर यानी नॉमिनल GDP में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। Q1 FY27 में नॉमिनल GDP करीब 88.27 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि Q1 FY26 में नई सीरीज के तहत यह करीब 80 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। वास्तविक GDP 81.36 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले यह 75.46 लाख करोड़ रुपये थी।
GDP के साथ Gross Value Added (GVA) की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही। इसमें सेवा क्षेत्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तृतीयक क्षेत्र में वास्तविक GVA 10 प्रतिशत बढ़ी। वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
दूसरी ओर Secondary Sector (द्वितीयक क्षेत्र) 8.6 प्रतिशत बढ़ा। विनिर्माण (Manufacturing) ने इसमें 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रही, जिसमें कृषि और उससे जुड़ी संबद्ध गतिविधियाँ (Agriculture & Allied Activities) की वृद्धि 3.6 प्रतिशत थी।
निवेश और खपत के आंकड़े भी मजबूत
सरकार के आंकड़ों में सिर्फ GDP ही मजबूत नहीं दिख रही। Gross Fixed Capital Formation यानी स्थिर पूंजी निर्माण में पहली तिमाही में 11.9 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 5.8 प्रतिशत थी।
Private Final Consumption Expenditure यानी निजी अंतिम उपभोग व्यय में भी 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका मतलब है कि घरेलू खपत और निवेश दोनों ने आर्थिक गतिविधि को सहारा दिया।
कई अर्थशास्त्रियों ने भी इन आंकड़ों को अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया। हालांकि उन्होंने आगे निजी निवेश की निरंतरता, ऊर्जा कीमतों, रुपये की कमजोरी और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों जैसे जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया।
रघुराम राजन को GDP पर शक क्यों?
GDP आंकड़े जारी होने के बाद पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने बातचीत में सीधे सवाल उठाया कि अगर भारत इतनी तेज रफ्तार से बढ़ रहा है तो पर्याप्त नौकरियां क्यों नहीं बन रही हैं?
राजन ने केवल रोजगार की संख्या पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने ‘अच्छी नौकरियों’, निजी निवेश और FDI को भी आर्थिक वृद्धि की गुणवत्ता से जोड़ा। उनका सवाल था कि अगर आर्थिक विस्तार इतना मजबूत है तो उद्योगपति निवेश करने में हिचक क्यों रहे हैं और देश में ज्यादा FDI क्यों नहीं आ रहा।
उनके मुताबिक GDP और अर्थव्यवस्था के दूसरे संकेतकों के बीच कुछ ऐसी विसंगतियां हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि सरकार युवाओं के लिए अधिक रोजगार पैदा करने के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है या नहीं।
राजन की चिंता का एक बड़ा आधार भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) है। देश में कामकाजी उम्र की बड़ी आबादी को आर्थिक ताकत में बदलने के लिए पर्याप्त रोजगार जरूरी है। अगर बड़ी संख्या में युवा काम की तलाश में हों लेकिन अर्थव्यवस्था उन्हें पर्याप्त और उत्पादक रोजगार न दे पाए, तो जनसांख्यिकीय लाभ लंबे समय में चुनौती में बदल सकता है।
पहले भी उठा चुके हैं सवाल
रोजगार और GDP के बीच अंतर को लेकर राजन पहले भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने पहले भी कहा है कि भारत में प्राइवेट सेक्टर उतनी नौकरियां पैदा नहीं कर रहा जितनी जरूरत है। हालिया टिप्पणी में भी उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ GDP की तेज वृद्धि पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका असर रोजगार और निवेश पर भी दिखना चाहिए।
यही वजह है कि मौजूदा बहस केवल इस सवाल तक सीमित नहीं है कि GDP 7.8 प्रतिशत बढ़ी या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि इस वृद्धि का लाभ आम लोगों, युवाओं और रोजगार बाजार तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।
सुभाष चंद्र गर्ग ने भी उठाए आंकड़ों पर सवाल
इसी बहस के बीच पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों की तुलना को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 7.8 प्रतिशत का आंकड़ा पहली नजर में प्रभावशाली दिखता है, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है।
गर्ग ने खास तौर पर Q1 FY26 के current-price GDP के आंकड़े का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक यह आंकड़ा पहले करीब 86 लाख करोड़ रुपये था, जिसे नई GDP सीरीज में लगभग 80 लाख करोड़ रुपये आंका गया। उन्होंने कहा कि अगर पुराने आंकड़े को आधार बनाया जाए तो नॉमिनल ग्रोथ काफी कम दिखती। इसी गणना से करीब 2.6 प्रतिशत का आंकड़ा सामने आया।
मैन्युफैक्चरिंग का डिफ्लेटर नेगेटिव क्यों दिखा?
GDP विवाद में मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। नई सीरीज के अनुसार Q1 FY27 में मैन्युफैक्चरिंग का नॉमिनल GVA 7.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि रियल GVA ग्रोथ 9.2 प्रतिशत रही। इससे Implicit GVA Deflator (-)1.5 प्रतिशत रहा।
MoSPI ने स्पष्ट किया कि नेगेटिव डिफ्लेटर का मतलब यह नहीं है कि मैन्युफैक्चरर्ड गुड्स की कीमतें जरूरी तौर पर गिर गईं। डबल डिफ्लेशन में आउटपुट और मध्यवर्ती उपभोग की कीमतों को अलग-अलग मापा जाता है। अगर input prices output prices की तुलना में तेजी से बढ़ें तो रियल और नॉमिनल GVA के बीच ऐसा अंतर बन सकता है।
सरकार ने दिया जवाब
GDP पर उठ रहे सवालों के बीच MoSPI ने विस्तृत FAQ जारी कर आंकड़ों और कार्यप्रणाली को समझाया। मंत्रालय ने कहा कि नई सीरीज में बदलाव बेहतर और नए डेटा स्रोतों (Data Sources), संशोधित कार्यप्रणाली (Revised Methodology) और आर्थिक कवरेज (Economic Coverage) को अपडेट करने के कारण हुए हैं।
MoSPI ने इस बात से इनकार किया कि पिछले साल के GDP आंकड़ों को जानबूझकर कम किया गया ताकि इस साल की वृद्धि दर ज्यादा दिखाई दे। मंत्रालय के अनुसार अलग-अलग सीरीज के आंकड़ों को मिलाकर तुलना करना सांख्यिकीय रूप से सही नहीं है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि मौजूदा Q1 GDP आकलन आगे उपलब्ध होने वाले अधिक व्यापक आंकड़ों के आधार पर संशोधन हो सकते हैं। यानी 7.8 प्रतिशत का मौजूदा आंकड़ा अभी अंतिम अनुमान नहीं है। Q2 FY27 के GDP आंकड़े 30 नवंबर 2026 को जारी होने हैं।
पीयूष गोयल का राजन और आलोचकों पर पलटवार
इस बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने GDP आंकड़ों पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि पुराने और नए डेटा शृंखला की तुलना करना गलत है। उन्होंने कहा कि आलोचकों को एक ही पद्धति के आंकड़ों की तुलना करनी चाहिए।
दिल्ली में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वार्षिक सत्र में बोलते हुए गोयल ने कहा कि मंत्री GDP डेटा तैयार नहीं करते और आंकड़े सांख्यिकीय व्यवस्था के तहत तैयार होते हैं। उन्होंने आलोचकों पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
रोजगार के सवाल पर भी गोयल ने आलोचकों पर तीखी टिप्पणी की और कहा कि कुछ लोग टीवी पर बैठकर GDP आंकड़ों में कमियां खोजने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकार के आर्थिक प्रदर्शन का बचाव करते हुए 7.8 प्रतिशत वृद्धि को देश की क्षमता और मेहनत का परिणाम बताया।
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