Monday, 03 August 2026
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खेलो इंडिया 2025 की शानदार मेजबानी से बिहार ने रचा इतिहास, खेल संस्कृति को मिली नई उड़ान

राज्य सरकार ने की खुद से संपूर्ण व्यवस्था, 10 हजार खिलाड़ियों और स्टाफ के लिए उच्चस्तरीय प्रबंध
पटना, राजगीर, गया, भागलपुर और बेगूसराय में बना खेलों का मजबूत आधार
खेल संरचना में तेज़ी से विकास, “मेडल लाओ-नौकरी पाओ” योजना से खिलाड़ियों को मिला बड़ा प्रोत्साहन

बिहार बना राष्ट्रीय खेल आयोजन का नया केंद्र, सफलतापूर्वक संपन्न हुआ खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025

बिहार ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 की सफल मेजबानी कर राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। 4 से 15 मई तक हुए इस आयोजन में देशभर से आए 10 हजार से अधिक खिलाड़ियों और उनके सहयोगियों के लिए भोजन, आवास और यातायात जैसी सभी व्यवस्थाएं राज्य सरकार द्वारा खुद की गईं। पटना, राजगीर (नालंदा), गया, भागलपुर और बेगूसराय में प्रतियोगिताओं के लिए विशेष तैयारियां की गईं।

खिलाड़ियों के लिए रहा विशेष ख्याल, आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित आयोजन स्थल

खिलाड़ियों को बेहतर अनुभव देने के लिए होटलों और राजकीय अतिथिशालाओं में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इंडोर खेलों के लिए वातानुकूलित कोर्ट्स और जरूरी उपकरणों की व्यवस्था की गई। बोधगया स्थित बिपार्ड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वीमिंग पूल और रबर निर्मित जॉगिंग ट्रैक जैसे संसाधनों का उपयोग किया गया। गर्मी से बचाव के लिए कई स्थानों पर जर्मन हैंगर लगाए गए।

खेलो इंडिया 2025
खेलो इंडिया 2025

मुख्यमंत्री की दूरदर्शी नीति से मिली दिशा, खेल विभाग बना विकास का आधार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बनाए गए अलग खेल विभाग ने खेल अधोसंरचना को मजबूत किया। सभी जिलों में स्टेडियम और खेल मैदानों का निर्माण हुआ। पटना में पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स और राजगीर में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसे कई प्रोजेक्ट्स पूरे हुए। पंचायत स्तर पर खेल मैदानों का निर्माण तेज़ी से किया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर से प्रतिभाएं उभर सकें।

“मेडल लाओ, नौकरी पाओ” योजना ने युवाओं को दी नई प्रेरणा

राज्य सरकार की “मेडल लाओ, नौकरी पाओ” योजना ने युवाओं को खेल में करियर बनाने की नई दिशा दी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां सीधे तौर पर दी जा रही हैं। इस योजना का लाभ कई खिलाड़ियों को मिल चुका है, जिससे उनमें बेहतर प्रदर्शन की होड़ बढ़ी है।

खुद की तैयारी, खुद की जिम्मेदारी: बिहार ने बिना बाहरी मदद के निभाई मेजबान

खेलो इंडिया की मेजबानी के लिए बिहार ने किसी बाहरी एजेंसी या कैटरर की मदद नहीं ली। तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों की टीम ने तमिलनाडु और उत्तराखंड का अध्ययन दौरा किया। खिलाड़ियों के पोषण का खास ध्यान रखा गया—प्रति 100 खिलाड़ियों के लिए तय मात्रा में चिकन, पनीर, चावल, दाल, गेहूं व मिलेट आटा की आपूर्ति की गई। भोजन के लिए पाटलिपुत्र स्टेडियम और आईएएस भवन में विशेष जर्मन हैंगर तैयार किए गए।

सुरक्षा और सूचना संप्रेषण के भी रहे कड़े इंतज़ाम

170 सदस्यीय सुरक्षा टीम और चौबीसों घंटे तैनात पुलिस बल के माध्यम से सभी खेल स्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित की गई। खिलाड़ियों और अधिकारियों को जोड़ने के लिए व्हाट्सऐप समूहों व अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया गया ताकि सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान हो सके। हर आयोजन स्थल पर एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की गई थी।

खेल प्रतिभाओं को मिली नई पहचान, रैंकिंग में जबरदस्त सुधा

बेहतर सुविधाओं और योजनाओं का असर राज्य के प्रदर्शन पर भी दिखा। इस बार बिहार ने 28 प्रतियोगिताओं में कुल 36 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं। पिछले वर्ष यह संख्या मात्र 5 पदकों की थी। बिहार की राष्ट्रीय रैंकिंग 14वें स्थान पर पहुंच गई है। पिछले सात वर्षों में राज्य में खेल गतिविधियों में 620% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

खेलो इंडिया की मेजबानी के बहाने बिहार ने न सिर्फ शानदार आयोजन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि योजनाबद्ध प्रयासों और मजबूत इच्छाशक्ति से राज्य खेलों का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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