Thursday, 29 October 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
भारत में घटती प्रजनन ने बढ़ाई चिंता! जानिए इसके कारण और भविष्य में घटते आंकड़ों की संभावित चुनौतियां Karwa Chauth 2026: राजस्थान का एक ऐसा मंदिर, जहां पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर पहुंचती हैं महिलाएं मेल्विन विलियम्स की किताब पत्रकारिता के सिद्धांतों और रिपोर्टिंग को समझाएगी DA Hike 2026: दिवाली के मौके पर केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़ा, पेंशनर्स को भी मिली बड़ी राहत Moto G47 Power हुआ लॉन्च, 7,000mAh बैटरी और 108MP कैमरा; जानें कीमत और फीचर्स भारत वेब3 एसोसिएशन ने बनाया डिजिटल एसेट्स के लिए स्व-नियामक निकाय तीन बार के एशियन पैरा गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट नीरज यादव का निधन! मानसिक दबाव से जूझ रहे थे एथलीट Delhi Liquor Booking App: दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बुकिंग शुरू, जानें कैसे करें ऑर्डर, क्या हैं नियम और सरकार की इसमें भूमिका भारत में घटती प्रजनन ने बढ़ाई चिंता! जानिए इसके कारण और भविष्य में घटते आंकड़ों की संभावित चुनौतियां Karwa Chauth 2026: राजस्थान का एक ऐसा मंदिर, जहां पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर पहुंचती हैं महिलाएं मेल्विन विलियम्स की किताब पत्रकारिता के सिद्धांतों और रिपोर्टिंग को समझाएगी DA Hike 2026: दिवाली के मौके पर केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़ा, पेंशनर्स को भी मिली बड़ी राहत Moto G47 Power हुआ लॉन्च, 7,000mAh बैटरी और 108MP कैमरा; जानें कीमत और फीचर्स भारत वेब3 एसोसिएशन ने बनाया डिजिटल एसेट्स के लिए स्व-नियामक निकाय तीन बार के एशियन पैरा गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट नीरज यादव का निधन! मानसिक दबाव से जूझ रहे थे एथलीट Delhi Liquor Booking App: दिल्ली में शराब की ऑनलाइन बुकिंग शुरू, जानें कैसे करें ऑर्डर, क्या हैं नियम और सरकार की इसमें भूमिका

Karwa Chauth 2026: राजस्थान का एक ऐसा मंदिर, जहां पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर पहुंचती हैं महिलाएं

राजस्थान के पहाड़ी इलाके में स्थित चौथ माता मंदिर जहां पहुंचने के लिए करीब 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। करवा चौथ पर बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। जानें मंदिर की बनावट, इसकी दूरी और यात्रा से जुड़ी अहम बातें।

सवाई माधोपुर: करवा चौथ को सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था और पारिवारिक सुख से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं दिनभर उपवास रखकर अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों में इस त्योहार को भिन्न-भिन्न रीति-रिवाजों के साथ मनाये जाने का रिवाज है। राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित चौथ माता मंदिर भी इसी धार्मिक परंपरा का प्रमुख केंद्र है, जहां करवा चौथ के मौके पर माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं।

यहां करवा चौथ के अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और अन्य श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि चौथ माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं सुनती हैं और सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।

कहां स्थित है चौथ माता मंदिर?

चौथ माता मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा कस्बे में स्थित है। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है और आसपास के क्षेत्र में दूर से ही इसकी पहचान दिखाई देती है। राजस्थान देवस्थान विभाग की जानकारी के मुताबिक, चौथ माता मंदिर सवाई माधोपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर है, जबकि जयपुर से इसकी दूरी करीब 180 किलोमीटर है। रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन ‘चौथ का बरवाड़ा’ माना जाता है।

पहाड़ी पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऐसे में दर्शन के लिए आने वाले लोगों को चढ़ाई के दौरान शारीरिक परिश्रम करना पड़ सकता है।

मंदिर की पहाड़ी पर स्थित बनावट और यहां तक पहुंचने का रास्ता इसे सामान्य शहरी मंदिरों से अलग बनाते हैं। करवा चौथ के अलावा भी सालभर श्रद्धालु यहां आते हैं। स्थानीय आस्था के अनुसार, हर चौथ तिथि पर माता के दर्शन का विशेष महत्व है। यही कारण है कि यह स्थान केवल एक वार्षिक पर्व तक सीमित नहीं रहता।

चौथ माता मंदिर का इतिहास

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, साल 1451 में मंदिर का निर्माण तत्कालीन शासक भीम सिंह द्वारा करवाया गया।

मंदिर के विकास से जुड़ी एक अन्य तारीख 1463 बताई जाती है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, इसी वर्ष मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर बिजल छतरी का निर्माण कराया गया था। पहाड़ी की तलहटी में एक तालाब बनवाए जाने का उल्लेख भी मिलता है। ये निर्माण उस समय मंदिर तक पहुंचने और आसपास के क्षेत्र को विकसित करने से जुड़ी गतिविधियों का संकेत देते हैं।

चौथ का बरवाड़ा के इतिहास में समय-समय पर हुए राजनीतिक बदलावों का उल्लेख मिलता है। ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, 16वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर पहले चौहान वंश का शासन था, लेकिन बाद में इसकी सत्ता राठौड़ राजवंश के हाथों में चली गई।

राठौड़ शासकों के बीच भी चौथ माता के प्रति श्रद्धा की परंपरा प्रचलित थी। मान्यता है कि वर्ष 1671 में राठौड़ शासक तेज सिंह ने मुख्य मंदिर के दक्षिणी भाग में एक तिबारा बनवाया था। तिबारा ऐसे निर्माण को कहा जाता है, जिसमें तीन प्रवेश द्वार होते हैं।

बूंदी और जयपुर के राजघरानों से जुड़ी मान्यताएं

चौथ माता मंदिर के इतिहास के साथ राजघरानों की आस्था का भी उल्लेख मिलता है। कुछ विवरणों में चौथ माता को बूंदी राजघराने की कुलदेवी के रूप में पूजे जाने की परंपरा का जिक्र है। इसी तरह, एक अन्य मान्यता मंदिर को जयपुर राजघराने से जोड़ती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सवाई माधोपुर की स्थापना से जुड़े राव माधोसिंह के समय में चौथ माता मंदिर के निर्माण और देखरेख से संबंधित कार्य भी हुए थे। माता को उनके कुल की आराध्य देवी माना जाता था, जिसके चलते इस मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व रहा।

मंदिर के इतिहास को लेकर प्रचलित विवरणों में इसकी स्थापना और संरक्षण से जुड़ी अलग-अलग बातें मिलती हैं। इन परंपराओं और मान्यताओं ने चौथ माता मंदिर को क्षेत्र के प्रमुख आस्था स्थलों में पहचान दिलाई है।

राजस्थान में कुलदेवी की परंपरा कई परिवारों और राजवंशों के लिए विशेष महत्व रखती है। किसी देवी को कुलदेवी मानने का अर्थ केवल पूजा करना नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक परंपराओं में उनके स्थान को स्वीकार करना भी है। चौथ माता मंदिर में श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही इसी व्यापक आस्था का हिस्सा है।

एक महिला के पति को जीवनदान देने की लोककथा

चौथ माता मंदिर की सबसे चर्चित कथाओं में एक ऐसी महिला की कहानी शामिल है, जिसके पति की मृत्यु हो गई थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार, महिला का नाम मातेशी बताया जाता है। लोककथा के अनुसार, पति के निधन के बाद महिला ने उनकी चिता के साथ सती होने का निर्णय लिया था। हालांकि, तत्कालीन शासक राव माधोसिंह ने उसे इस कदम से रोक दिया। इसके बाद महिला ने चौथ माता के समक्ष अपने पति को दोबारा जीवित करने की प्रार्थना की।

स्थानीय मान्यता कहती है कि महिला की पुकार सुनकर माता ने उसके पति को जीवनदान दिया। इस प्रसंग को देवी की कृपा और चमत्कारी शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस कथा ने चौथ माता की पूजा को पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

यह कहानी आज भी स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था का हिस्सा है। श्रद्धालु इसे माता की शक्ति, दया और भक्तों की प्रार्थनाओं को सुनने वाली देवी के रूप में उनकी मान्यता से जोड़ते हैं।

ये भी पढ़ें :- मेल्विन विलियम्स की किताब पत्रकारिता के सिद्धांतों और रिपोर्टिंग को समझाएगी

करवा चौथ पर क्यों बढ़ जाता है मंदिर का महत्व?

करवा चौथ पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। चौथ माता मंदिर में भी इसी भावना के साथ महिलाएं दर्शन करने पहुंचती हैं। यहां माता को सुहाग की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता के सामने प्रार्थना करने से उन्हें आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

इस दिन महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को पूजा करती हैं। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा दिखाई देने के बाद उसे अर्घ्य दिया जाता है और फिर पति के दर्शन करके व्रत खोला जाता है। हालांकि, पूजा की रीति-रिवाज अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकते हैं। चौथ माता मंदिर आने वाली महिलाएं भी अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार माता के दर्शन और पूजा-अर्चना करती हैं।

करवा चौथ के अलावा हिंदी पंचांग की अन्य चौथ तिथियों पर भी मंदिर में भक्त पहुंचते हैं। स्थानीय परंपरा में चौथ माता के दर्शन को शुभ माना जाता है। नवविवाहित जोड़े भी वैवाहिक जीवन की शुरुआत में माता का आशीर्वाद लेने आते हैं।

मंदिर की बनावट और धार्मिक परंपराएं

पहाड़ी पर बने चौथ माता मंदिर तक पहुंचने के लिए लंबी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। राजस्थान देवस्थान विभाग के दस्तावेज में मंदिर परिसर को बड़ा और पहाड़ी पर स्थित बताया गया है। इसमें मंदिर के दो मंजिला होने और आसपास बरामदे का उल्लेख भी मिलता है। दस्तावेज के अनुसार, मंदिर में संगमरमर की प्रतिमाएं हैं, जबकि भवन के निर्माण में सीमेंट, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।

मंदिर का महत्व केवल करवा चौथ तक सीमित नहीं है। राजस्थान देवस्थान विभाग के विवरण के अनुसार, चैत्र और आश्विन महीनों में नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। साथ ही माघ महीने में चौथ तिथि से शुरू होने वाला मेला भी अहम स्थान रखता है, जो करीब 15 दिनों तक चलता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।

नवविवाहित जोड़ों का माता के दर्शन के लिए आना और नवजात बच्चों के मुंडन जैसे संस्कारों के लिए मंदिर पहुंचना भी यहां की धार्मिक परंपराओं में शामिल बताया गया है। इन आयोजनों से मंदिर का संबंध जीवन के अलग-अलग पड़ावों और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ता है।

कैसे पहुंचें चौथ माता मंदिर?

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित चौथ माता मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु ट्रेन या सड़क मार्ग चुन सकते हैं। यह मंदिर चौथ का बरवाड़ा कस्बे में एक पहाड़ी पर स्थित है। सवाई माधोपुर शहर से इसकी दूरी लगभग 35 किलोमीटर है, जबकि जयपुर से यहां पहुंचने के लिए करीब 180 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है।

रेल से आने वाले यात्रियों के लिए चौथ का बरवाड़ा रेलवे स्टेशन एक सुविधाजनक विकल्प है। स्टेशन पहुंचने के बाद ऑटो, टैक्सी या उपलब्ध स्थानीय परिवहन की मदद से मंदिर के नजदीक पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से आने वाले श्रद्धालु सवाई माधोपुर और जयपुर की ओर से अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं। यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग और परिवहन की उपलब्धता की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

मंदिर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण दर्शन के लिए सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यहां तक पहुंचने में लगने वाला समय श्रद्धालुओं की शारीरिक क्षमता और भीड़ पर निर्भर कर सकता है। करवा चौथ जैसे खास अवसरों पर बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना रहती है, इसलिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना बेहतर होगा। बुजुर्गों और चलने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों को अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा की योजना बनानी चाहिए। मंदिर के दर्शन समय और विशेष व्यवस्थाओं की जानकारी के लिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पुष्टि कर लें।

Home » Karwa Chauth 2026: राजस्थान का एक ऐसा मंदिर, जहां पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर पहुंचती हैं महिलाएं
शेयर करें: Facebook X WhatsApp
MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।