जेफरी एपस्टीन अमेरिकी वित्तीय कारोबारी था, जो नाबालिगों के यौन शोषण और यौन तस्करी से जुड़े मामलों के कारण चर्चा में रहा। जुलाई 2019 में गिरफ्तार होने के बाद उसी साल जेल में उसकी मौत हो गई।
नई दिल्ली: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी एक बार फिर अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से मुलाकातों को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। सोशल मीडिया पर पुरी और एपस्टीन की कथित मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेताओं ने मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया है कि पुरी एपस्टीन से किस उद्देश्य से मिले थे और इन मुलाकातों का संदर्भ क्या था।
यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुरी पहले ही एपस्टीन से मुलाकातों की बात स्वीकार कर चुके हैं। फरवरी 2026 में उन्होंने कहा था कि नौ वर्षों की अवधि में उनकी एपस्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात हुई थी। अब कथित तस्वीरों को लेकर विपक्ष उनके पुराने बयान पर सवाल उठा रहा है।
तस्वीरें सामने आने के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
21 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें साझा की गईं, जिनमें हरदीप सिंह पुरी और जेफरी एपस्टीन साथ दिखाई देने का दावा किया गया। इन तस्वीरों को साझा करते हुए विपक्षी नेताओं ने पूछा कि क्या पुरी की मुलाकातें केवल प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं या उनके बीच अलग से भी बातचीत हुई थी।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पुरी के पहले के बयान का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या उन्होंने एपस्टीन से अकेले मुलाकात करने से इनकार नहीं किया था। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी तस्वीरों पर टिप्पणी करते हुए मंत्री के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात करने के दावे पर तंज कसा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने तस्वीरों को गंभीर बताते हुए कहा कि पुरी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने एपस्टीन से मुलाकात क्यों की थी, भले ही उस समय वह राजनयिक की भूमिका में रहे हों। उन्होंने मुलाकातों के विषय और परिस्थितियों को सार्वजनिक करने की मांग भी की। इन बयानों के साथ विवाद का केंद्र यह सवाल बन गया है कि पुरी और एपस्टीन के बीच संपर्क किस प्रकृति का था।
संजय राउत ने पीएम मोदी का किया जिक्र
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कथित तस्वीर साझा करते हुए हरदीप सिंह पुरी की मुलाकात पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए पूछा कि मंत्री एपस्टीन से अकेले क्यों मिल रहे थे और क्या वह प्रधानमंत्री की ओर से कोई संदेश लेकर गए थे।
राउत ने इस मामले को लेकर आगे और जानकारी सामने आने की संभावना जताई और इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। पत्रकारों से बातचीत में भी उन्होंने पुरी के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि कथित तस्वीरों ने मुलाकातों के स्वरूप को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ी चर्चाओं का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए।
हरदीप सिंह पुरी ने पहले क्या सफाई दी थी?
जेफरी एपस्टीन के साथ संपर्कों को लेकर हरदीप सिंह पुरी पहले भी सफाई दे चुके हैं। फरवरी 2026 में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए पुरी के संपर्कों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था।
पुरी के मुताबिक, 2009 में न्यूयॉर्क जाने के बाद से लेकर 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले तक उनकी एपस्टीन से तीन या अधिकतम चार बार मुलाकात हुई थी। उन्होंने इन बैठकों को अपने पेशेवर काम और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा बताया था।
मंत्री ने कहा था कि उस समय वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) से जुड़े थे और इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलैटरलिज्म (ICM) की गतिविधियों के संदर्भ में भी काम कर रहे थे। उनके अनुसार, IPI में उनके वरिष्ठ टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे और उन्हीं के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में उनकी मुलाकात हुई थी।
पुरी ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा था कि एपस्टीन से उनका संपर्क पेशेवर उद्देश्यों तक सीमित था। उन्होंने एपस्टीन के यौन अपराधों से किसी तरह का संबंध होने के आरोपों को खारिज किया था। हालांकि, अब कथित तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्ष इन मुलाकातों की परिस्थितियों और उनके वास्तविक उद्देश्य पर नए सवाल उठा रहा है।
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कौन था जेफरी एपस्टीन?
जेफरी एपस्टीन अमेरिका का एक वित्तीय कारोबारी था, जो नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और यौन तस्करी से जुड़े गंभीर मामलों के कारण दुनियाभर में चर्चा में रहा। उसके संपर्क में राजनीति, कारोबार और मनोरंजन जगत की कई प्रभावशाली हस्तियां थीं। इसी वजह से उसके मामले से जुड़े दस्तावेजों और लोगों के साथ उसके संबंधों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
2008 में एपस्टीन ने फ्लोरिडा में नाबालिग से संबंधित वेश्यावृत्ति के अपराध सहित आरोपों में दोष स्वीकार किया था। जुलाई 2019 में उसे अमेरिका में नाबालिगों की यौन तस्करी से जुड़े संघीय आरोपों में गिरफ्तार किया गया। हालांकि, मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले ही अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। अमेरिकी अधिकारियों ने उसकी मौत को आत्महत्या बताया था।
एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और उसके संपर्कों की चर्चा आज भी होती है। इन दस्तावेजों में कई चर्चित लोगों के नाम सामने आने के कारण उनके संबंधों और मुलाकातों पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम दस्तावेजों में होना या एपस्टीन के साथ उसकी तस्वीर सामने आना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका का आकलन उपलब्ध साक्ष्यों और मामले के पूरे संदर्भ के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
एपस्टीन से साथ जुड़ा इन नेताओं का नाम
जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों, ईमेल और तस्वीरों में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, इजरायल और एशिया की कई चर्चित हस्तियों के नाम सामने आए हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख भी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और सार्वजनिक चर्चाओं में हुआ है। इसके अलावा, पूर्व अमेरिकी वित्त मंत्री लैरी समर्स, न्यू मैक्सिको के पूर्व गवर्नर बिल रिचर्डसन और पूर्व सीनेटर जॉर्ज मिशेल के नाम भी विभिन्न रिपोर्टों में शामिल रहे हैं।
ब्रिटेन में पूर्व प्रिंस एंड्रयू और पूर्व मंत्री पीटर मैंडेलसन के एपस्टीन से संबंधों को लेकर चर्चा हुई है। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक का नाम भी एपस्टीन से जुड़े संपर्कों के संदर्भ में सामने आया है। वहीं, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का नाम भी कुछ रिपोर्टों में ईमेल के संदर्भ में बताया गया है, हालांकि इससे जुड़े उल्लेख और उनके अर्थ को अलग-अलग समझना जरूरी है।
इन नामों के सामने आने से एपस्टीन के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और प्रभावशाली लोगों के साथ उसके संबंधों पर व्यापक बहस हुई है। हालांकि, किसी दस्तावेज में नाम होना, ईमेल में उल्लेख मिलना या किसी के साथ तस्वीर होना अपने आप में अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। हर व्यक्ति के मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, संपर्कों की प्रकृति और संबंधित आरोपों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
विपक्ष की मांग
विपक्षी नेताओं की मौजूदा मांग का मुख्य केंद्र पुरी की मुलाकातों के बारे में स्पष्ट जानकारी हासिल करना है। वे जानना चाहते हैं कि बैठकें किन परिस्थितियों में हुईं, उनका उद्देश्य क्या था और क्या उपलब्ध दस्तावेजों तथा तस्वीरों से मंत्री के पहले दिए गए विवरण पर कोई नया सवाल उठता है।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) से जुड़े नेताओं ने सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है। शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ते हुए आगे और जानकारी सामने आने की बात कही है।
इस मामले में आगे की स्थिति मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करेगी। पहली, तस्वीरों की प्रामाणिकता, तारीख और संदर्भ की पुष्टि। दूसरी, पुरी की ओर से मौजूदा सवालों पर कोई नई सफाई आती है या नहीं। तीसरी, यदि अतिरिक्त दस्तावेज या विश्वसनीय जानकारी सामने आती है, तो उससे मुलाकातों के उद्देश्य के बारे में क्या पता चलता है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट है कि एपस्टीन के साथ पुरी के संपर्कों को लेकर राजनीतिक विवाद फिर तेज हुआ है। इस विवाद में राजनीतिक आरोपों, मंत्री के पहले दिए गए बयान और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।



