रिंबी में भूस्खलन का मलबा निक खोलसा स्ट्रीम के आसपास जमा होने से पानी के प्राकृतिक बहाव में बदलाव का खतरा बढ़ गया है। बारिश के दौरान मलबे और पानी का बहाव निचले इलाकों के लिए चिंता का कारण है।
गंगटोक: सिक्किम के पश्चिमी हिस्से में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच भूस्खलन का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। पश्चिम सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिंबी गांव में गुरुवार, 24 सितंबर देर रात एक बड़े भूस्खलन के बाद भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इसकी चपेट में कई घर और सरकारी आवास आए हैं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, 30 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं दी है।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब रिंबी और आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से जमीन खिसकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन पहले ही संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुका है। 14 सितंबर की भारी बारिश और बाढ़ के बाद रिंबी में 28 घरों के 128 लोगों को एहतियातन सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया गया था। अब ताजा भूस्खलन ने इलाके में दोबारा चिंता बढ़ा दी है।
गुरुवार रात रिंबी में क्या हुआ?
अधिकारियों के मुताबिक, 24 सितंबर की रात लगातार बारिश के बीच रिंबी गांव के ऊपरी हिस्से से मिट्टी, पत्थर और मलबा नीचे की ओर खिसकने लगी। देखते ही देखते मलबे ने निचले इलाकों में स्थित कई संरचनाओं को अपनी चपेट में ले लिया।
इस दौरान कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि कुछ घरों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है। बिजली विभाग के सरकारी क्वार्टर भी भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश जारी रहने के कारण आसपास मौजूद दूसरे मकानों और संपत्तियों पर भी खतरा बना हुआ है।
अगस्त से ही बढ़ रहा था खतरा
रिंबी में भूस्खलन का खतरा अचानक 24 सितंबर को सामने नहीं आया है। अगस्त से ही यहां जमीन के अस्थिर होने के संकेत मिल रहे थे।
भारत सरकार और राज्य प्रशासन से जुड़े रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त में रिंबी और आसपास के इलाकों में कई परिवारों के घर और जमीन भूस्खलन के खतरे में आ गए थे।
23 अगस्त को राज्य सरकार ने बताया था कि 25 प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और एक्स-ग्रेशिया सहायता दी गई थी। इन परिवारों की संपत्ति, फसल और जमीन को नुकसान पहुंचा था या उनके मकान संभावित खतरे के दायरे में थे।
इसके बाद सितंबर के महीने में स्थिति और गंभीर हुई। 12 सितंबर से रिंबी और सिंगलिताम क्षेत्र में भूस्खलन की घटनाओं की जानकारी सामने आई। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तब संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी थी।
128 लोगों को किया गया था शिफ्ट
14 सितंबर को भारी बारिश और बाढ़ के बाद रिंबी की स्थिति और बिगड़ गई थी। प्रशासन ने दोबारा आकलन करने के बाद 28 घरों में रहने वाले 128 लोगों को रिंबी ग्राम पंचायत केंद्र में शिफ्ट किया।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, क्षेत्र में मलबे और पानी का बहाव लगातार चिंता का कारण बना हुआ था। कुछ घरों और पोल्ट्री यूनिट को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली थी।
प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ इलाके में रात के समय भूस्खलन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रोशनी की व्यवस्था भी की थी।
नदी और नाले के बहाव में भी हुआ बदलाव
रिंबी की समस्या सिर्फ पहाड़ी ढलान तक सीमित नहीं है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 15 सितंबर के अपडेट में बताया गया था कि भूस्खलन का मलबा ‘निक खोलसा स्ट्रीम’ के आसपास जमा हो गया है।
बारिश के दौरान पानी मलबे को अपने साथ नीचे की ओर रिंबी गांव की तरफ ले जाता है। इससे नाले के आसपास स्थित घरों पर खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि मलबे के जमा होने से पानी के प्राकृतिक बहाव में बदलाव हो सकता है और अचानक पानी तथा मलबे का बहाव अतिरिक्त नुकसान कर सकता है।
सड़क संपर्क हुआ प्रभावित
भूस्खलन का असर सिर्फ घरों पर नहीं पड़ा है। रिंबी-सिंगलिताम क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी भी लंबे समय से प्रभावित है।
राज्य सरकार के अनुसार, मेली-खेचुपेरी-युकसोम रोड का एक हिस्सा भूस्खलन की वजह से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। इससे क्षेत्र की आवाजाही प्रभावित हुई। प्रशासन ने वैकल्पिक कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए ऊंचे स्थान पर बेली ब्रिज (Bailey Bridge) बनाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही थी।
इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाने और सड़क बहाली का काम भी जारी है।
सिक्किम के कई हिस्सों में भूस्खलन की समस्या
रिंबी की घटना सिक्किम में जारी बारिश से जुड़ी एक बड़ी समस्या का हिस्सा है। पिछले दिनों राज्य के अलग-अलग इलाकों में भी भूस्खलन, मडफ्लो और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं।
गंगटोक के ताडोंग और लिंगडिंग क्षेत्र में भी भारी बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाएं हुईं। लिंगडिंग में एक मकान का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था और घर की पहली मंजिल में पानी तथा कीचड़ घुस गया था। तीन पानी की पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हुई थीं।
लिंगडिंग झोरा के पास सड़क भी कुछ घंटों तक बंद रही थी, जिसे बाद में मलबा हटाकर बहाल किया गया।
इससे पता चलता है कि लगातार बारिश के दौरान सिक्किम के पहाड़ी इलाकों में सिर्फ एक स्थान पर नहीं, बल्कि कई जगहों पर ढलानों के अस्थिर होने का खतरा बना हुआ है।
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IMD ने दी भारी बारिश की चेतावनी
ताजा भूस्खलन के बीच मौसम विभाग की चेतावनी भी महत्वपूर्ण है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 25 सितंबर के अपडेट में सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए 25 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। 26 सितंबर के लिए भी भारी बारिश का पूर्वानुमान है।
यानी रिंबी में ताजा भूस्खलन के बाद भी अगले 24 से 48 घंटे स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। अगर बारिश जारी रहती है तो पहले से कमजोर ढलानों पर दबाव और बढ़ सकता है।
इसी कारण प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम तथा स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करने को कहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने रिंबी में भूस्खलन की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और उनका कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मौजूदा हालात पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। साथ ही, संवेदनशील इलाकों में स्थिति की नियमित निगरानी करने, संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की देरी न हो, इस पर भी प्रशासन को विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
प्रेम सिंह तमांग ने प्रभावित और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों से भारी बारिश के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने लोगों से प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से आपात स्थिति में एक-दूसरे की मदद करने और किसी भी खतरे की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने की अपील भी की है।
राहत और बचाव के लिए प्रशासन की तैयारी
रिंबी और सिंगलिताम में प्रशासन पहले से राहत और पुनर्वास संबंधी काम कर रहा है। सिंगलिताम में प्रभावित परिवारों के लिए राहत केंद्र चलाया गया है, जबकि रिंबी में संवेदनशील घरों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
राज्य प्रशासन ने पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए पाइपलाइन की व्यवस्था, अस्थायी पुल और सड़क बहाली जैसे कदम भी उठाए हैं। प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया भी जारी रही है।
रिंबी का ICDS केंद्र भी 14 सितंबर की बारिश और बाढ़ में प्रभावित हुआ था। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करने की बात कही थी।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां
फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बारिश के बीच नए भूस्खलन की घटनाओं को रोकना और संवेदनशील इलाकों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ताजा भूस्खलन के बाद प्रभावित घरों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरत के मुताबिक राहत उपलब्ध कराने की है।
दूसरी बड़ी चुनौती सड़क और पुल जैसी जरूरी कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करना है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़कें बंद होने से राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इससे जरूरी सामान की आपूर्ति, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और स्थानीय लोगों की सामान्य आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में क्षतिग्रस्त मार्गों की पहचान कर उन्हें खोलना प्रशासन के लिए अहम होगा।
तीसरी चुनौती पहले से अस्थिर ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करना है। मौसम की स्थिति को देखते हुए यह काम और महत्वपूर्ण हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 25 सितंबर को सिक्किम में बहुत भारी बारिश और 26 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में अगले कुछ दिन प्रशासन के लिए राहत, निगरानी और बचाव की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।




