अल-कायदा से जुड़े 19 आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक कर 9/11 हमले को अंजाम दिया। जानिए उनकी योजना, फ्लाइट ट्रेनिंग, अमेरिका में प्रवेश और हमले की तैयारी कैसे हुई।
न्यूयॉर्क, अमेरिका: 11 सितंबर 2001 की सुबह अमेरिका में आम दिनों की तरह शुरू हुई थी। लोग अपने दफ्तरों के लिए निकल रहे थे, विमान आसमान में उड़ रहे थे और न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां इमारतों में हजारों लोग अपने काम में व्यस्त थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ घंटों में दुनिया की सबसे ताकतवर शक्तियों में गिने जाने वाले देश की धरती पर ऐसा हमला होने वाला है, जिसकी गूंज आने वाली कई दशकों तक सुनाई देगी।
सुबह करीब 8:46 बजे एक विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की नॉर्थ टावर से टकराया। शुरुआत में इसे एक विमान दुर्घटना समझा गया, लेकिन 17 मिनट बाद दूसरा विमान साउथ टावर से जा टकराया। इसके बाद साफ हो गया कि अमेरिका पर सुनियोजित आतंकवादी हमला हुआ है। कुछ ही देर में एक तीसरा विमान पेंटागन से टकराया और चौथा विमान पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास एक खेत में गिर गया।
आज, 11 सितंबर 2026 को उस हमले को 25 साल पूरे हो गए हैं। एक चौथाई सदी बाद भी 9/11 सिर्फ अमेरिका के इतिहास की एक त्रासदी नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, आतंकवाद, सुरक्षा व्यवस्था और युद्ध की दिशा बदल देने वाली घटना के रूप में याद किया जाता है।
क्या हुआ था 11 सितंबर 2001 को?
9/11 हमले को अंजाम देने के लिए अल-कायदा से जुड़े 19 आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक यात्री विमानों को हाईजैक किया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराया गया। तीसरे विमान को वॉशिंगटन डीसी के पास स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन से टकराया गया।
चौथा विमान, यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93, वॉशिंगटन की ओर जा रहा था। विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को जब हाईजैकिंग की जानकारी मिली तो उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिरोध किया। विमान पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। माना जाता है कि यात्रियों की इस कोशिश ने विमान को उसके संभावित लक्ष्य तक पहुंचने से रोक दिया।
चारों विमानों में सवार सभी लोगों की मौत हुई और जमीन पर भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की वो सुबह
अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 11 ने सुबह 7:59 बजे बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। इसका गंतव्य लॉस एंजिल्स था। करीब 8:46 बजे इसे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की नॉर्थ टावर से टकरा दिया गया।
इसके बाद यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 175 ने सुबह 8:14 बजे बोस्टन से उड़ान भरी। करीब 9:03 बजे यह विमान साउथ टावर से टकराया। दूसरे विमान के टकराने के बाद पूरी दुनिया को समझ आ गया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हमला है।

न्यूयॉर्क के आसमान में धुएं का विशाल गुबार उठने लगा। टीवी चैनलों पर घटनास्थल की लाइव तस्वीरें प्रसारित होने लगीं। लोग इमारतों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और बचावकर्मी आग और धुएं के बीच लोगों की जान बचाने के लिए अंदर जा रहे थे।
कुछ समय बाद दोनों टावर ढह गए। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परिसर और आसपास का इलाका मलबे में बदल गया।
पेंटागन पर भी हुआ हमला
जब न्यूयॉर्क में हमला जारी था, तभी एक और विमान वॉशिंगटन की ओर बढ़ रहा था।
अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 77 सुबह 8:20 बजे डलेस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लॉस एंजिल्स के लिए रवाना हुआ था। इसे हाईजैक करने के बाद आतंकवादियों ने विमान को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन की ओर मोड़ दिया।

सुबह करीब 9:37 बजे विमान पेंटागन से टकराया। इस हमले में विमान में सवार लोगों के साथ पेंटागन में मौजूद लोगों की भी मौत हुई।
पेंटागन पर हमला यह दिखाने के लिए काफी था कि आतंकवादियों का निशाना केवल न्यूयॉर्क का आर्थिक केंद्र नहीं था, बल्कि अमेरिकी सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रतीक भी थे।
फ्लाइट 93 और यात्रियों की आखिरी कोशिश
चौथा विमान यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93 था। यह सुबह 8:41 बजे नेवार्क एयरपोर्ट से सैन फ्रांसिस्को के लिए रवाना हुआ था।
विमान हाईजैक होने के बाद यात्रियों को फोन कॉल्स के जरिए न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में हुए हमलों के बारे में पता चला। इसके बाद कुछ यात्रियों और क्रू सदस्यों ने विमान को वापस अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की।
उनकी कोशिश सफल नहीं हुई, लेकिन विमान अपने संभावित लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच पाया। यह पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 9/11 की कहानी में फ्लाइट 93 के यात्रियों का प्रतिरोध आज साहस और बलिदान के प्रतीक के तौर पर याद किया जाता है।
9/11 में कितने लोगों की मौत हुई?
आपको बता दें कि 9/11 हमले में कुल 2,977 लोगों की मौत हुई थी, मृतकों में विमान यात्रियों और क्रू के अलावा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और घटनास्थलों पर मौजूद आम नागरिक तथा बचावकर्मी शामिल थे।
न्यूयॉर्क में सबसे बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। अकेले वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से जुड़े हमले में हजारों लोग मारे गए।
बचाव और राहत अभियान में शामिल फायरफाइटर्स, पुलिसकर्मी और अन्य आपातकालीन कर्मियों ने भी भारी कीमत चुकाई। न्यूयॉर्क सिटी फायर डिपार्टमेंट के 343 सदस्य, न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के 23 अधिकारी और पोर्ट अथॉरिटी पुलिस के 37 अधिकारी उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने उस दिन अपनी जान गंवाई।
9/11 से जुड़ी बीमारियों के कारण बाद के वर्षों में भी कई बचावकर्मियों और प्रभावित लोगों की मौत हुई। इसलिए इस त्रासदी का मानवीय असर 11 सितंबर 2001 के दिन तक सीमित नहीं रहा।
हमले के पीछे कौन था?
हमलों की जिम्मेदारी अल-कायदा से जुड़ी थी, जिसका नेतृत्व उस समय ओसामा बिन लादेन कर रहा था। 19 हाईजैकर्स ने चार विमानों को कब्जे में लेकर हमले को अंजाम दिया।

9/11 से पहले भी अल-कायदा अमेरिकी हितों को निशाना बना चुका था। अमेरिकी दूतावासों पर 1998 के हमले और 2000 में यूएसएस कोल पर हमला इसके उदाहरण थे।
बिन लादेन को अमेरिका लंबे समय से आतंकवादी खतरे के रूप में देख रहा था। 9/11 के बाद उसकी तलाश और अल-कायदा के खिलाफ अमेरिकी अभियान वैश्विक आतंकवाद-विरोधी नीति का प्रमुख हिस्सा बन गया।
लगभग एक दशक बाद, 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी विशेष बलों के अभियान में ओसामा बिन लादेन मारा गया।
हमले की तैयारी और फ्लाइट ट्रेनिंग
11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों की साजिश अल-कायदा ने लंबे समय में तैयार की थी। योजना के तहत 19 अपहरणकर्ताओं को चार टीमों में बांटा गया था और प्रत्येक विमान में मौजूद समूह का उद्देश्य यात्रियों तथा क्रू को काबू में लेकर विमान का नियंत्रण हासिल करना था।
इन 19 लोगों में चार ऐसे सदस्य थे जिन्होंने विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लिया था। इनमें मोहम्मद अट्टा, मारवान अल-शेह्ही, हानी हंजूर और जियाद जर्राह का नाम शामिल था। इन्हीं ने चार विमानों को अपने नियंत्रण में लेकर उन्हें हमले के लिए इस्तेमाल किया। मोहम्मद अट्टा को पूरी साजिश का प्रमुख और ऑपरेशनल प्लानर माना जाता है।
हमले की तैयारी के दौरान कुछ अपहरणकर्ताओं ने अमेरिका में फ्लाइट स्कूलों में प्रशिक्षण लिया। उन्होंने छोटे विमानों को उड़ाने और कॉकपिट से जुड़े बुनियादी कौशल हासिल किए। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संदिग्ध गतिविधियों के बावजूद संबंधित सूचनाएं अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों के बीच प्रभावी ढंग से साझा नहीं हो सकीं।
आतंकी अमेरिका में कैसे दाखिल हुए?
9/11 आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 19 में से अधिकांश अपहरणकर्ता वैध पासपोर्ट और अमेरिकी वीजा का इस्तेमाल करके अमेरिका पहुंचे थे। वे अलग-अलग समय पर देश में दाखिल हुए और कई मामलों में सामान्य यात्रियों की तरह इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरे। हालांकि, जांच में उनके दस्तावेजों, यात्रा और अमेरिका में रहने से जुड़ी कई अनियमितताएं भी सामने आईं। कुछ अपहरणकर्ताओं ने वीजा आवेदन में गलत या भ्रामक जानकारी दी थी, जबकि कुछ ने अमेरिका में प्रवेश के बाद अपने वीजा या इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन किया।
जांच का एक अहम निष्कर्ष यह था कि उस समय अमेरिकी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने की व्यवस्था पर्याप्त प्रभावी नहीं थी। अलग-अलग एजेंसियों के पास कुछ संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं मौजूद थीं, लेकिन वे हमेशा एक-दूसरे तक समय पर नहीं पहुंचीं। आयोग ने इसे व्यापक खुफिया और सुरक्षा विफलताओं के संदर्भ में देखा। इस घटना के बाद अमेरिका ने वीजा जांच, इमिग्रेशन स्क्रीनिंग और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए।
9/11 के बाद अमेरिका ने क्या बदला?
हमले के बाद अमेरिका की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आया। राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया।
7 अक्टूबर 2001 को अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किया। उसका घोषित उद्देश्य अल-कायदा को निशाना बनाना और तालिबान शासन को हटाना था, जिसने बिन लादेन और उसके संगठन को पनाह दी थी।
अमेरिका में घरेलू सुरक्षा व्यवस्था भी बदली। एयरपोर्ट सुरक्षा कड़ी हुई और आतंकवाद से निपटने के लिए अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बाद के वर्षों में Department of Homeland Security का गठन हुआ और अमेरिका की खुफिया तथा सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक पुनर्गठन किया गया।
पूरी दुनिया के लिए बदल गए एयरपोर्ट सुरक्षा के मायने
आज एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच, पहचान की सख्त प्रक्रिया, सामान की जांच और विमान में ले जाए जाने वाली चीजों पर कड़े नियम सामान्य लगते हैं। लेकिन 9/11 से पहले विमान सुरक्षा का ढांचा आज की तुलना में काफी अलग था।
हमले के बाद विमान हाईजैकिंग से निपटने की रणनीति में भी बड़ा बदलाव आया। सुरक्षा एजेंसियों ने यह मानकर काम करना शुरू किया कि हाईजैक किया गया विमान सिर्फ बातचीत या बंधक बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता, बल्कि खुद एक हथियार बन सकता है।
9/11 आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि उस समय मौजूद हाईजैकिंग प्रोटोकॉल पारंपरिक हाईजैकिंग की धारणा पर आधारित था और आत्मघाती हमले के लिए विमान को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने जैसी स्थिति के लिए तैयार नहीं था।
‘वॉर ऑन टेरर’ से बदली वैश्विक राजनीति
9/11 के बाद आतंकवाद सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा। यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सैन्य रणनीति का केंद्रीय विषय बन गया।
अमेरिका ने अल-कायदा के खिलाफ अभियान के साथ-साथ आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई शुरू की। अफगानिस्तान में युद्ध वर्षों तक चला।
9/11 के बाद अमेरिकी विदेश नीति में आए बदलावों का असर मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी पड़ा। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध ने कई देशों की सुरक्षा नीतियों, खुफिया सहयोग और सैन्य अभियानों को प्रभावित किया।
ग्राउंड जीरो से बनी यादों की जगह
जहां कभी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स खड़ी थीं, वहां आज 9/11 Memorial & Museum मौजूद है। यह स्थान हमले में मारे गए लोगों की स्मृति को समर्पित है।
हर साल 11 सितंबर को पीड़ितों के परिवार वहां एकत्र होते हैं और मृतकों के नाम पढ़े जाते हैं। इस साल 25वीं बरसी पर भी नाम पढ़ने की विशेष स्मृति सभा आयोजित की गई है। कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे शुरू हुआ और 8:46 बजे पहला मौन रखा गया। इस वर्ष समारोह में सात मौन क्षण रखे गए, जिनमें टावरों से टकराने और उनके गिरने, पेंटागन हमले और फ्लाइट 93 के दुर्घटनाग्रस्त होने के समय को याद किया गया।


