Saturday, 22 August 2026
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राजस्थान के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं, CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच हुआ बड़ा खुलासा

विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने राजस्थान के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति उजागर कर दी। 611 स्कूल बिना भवन के, 2,047 में शौचालय और 1,049 में पानी की सुविधा नहीं।

जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य सरकार ने विधानसभा में बताया है कि प्रदेश के 611 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, जिन सरकारी स्कूलों के पास अपने भवन हैं, उनमें भी 2,047 स्कूलों में शौचालय और 1,049 में पेयजल की सुविधा नहीं है। ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेना शुरू किया है।

यह मुद्दा उस समय और गरमा गया जब जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची सीजेपी की टीम को कथित तौर पर स्थानीय लोगों के विरोध और मारपीट का सामना करना पड़ा। सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उनकी टीम पर हमला किया गया और एक स्वयंसेवक का हाथ तक फ्रैक्चर हो गया। हालांकि, हमले में भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर सीजेपी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और स्थानीय लोगों की ओर से भी अलग पक्ष सामने आया है।

विधानसभा में सरकार ने पेश किए स्कूलों के आंकड़े

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंकड़े पेश किए। समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2025-26 के यूडीआईएसई आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। इनमें 10 स्कूल विशेष रूप से बालिकाओं के लिए हैं।

राज्य में अपने भवन वाले सरकारी स्कूलों की संख्या 64,484 बताई गई है। इनमें भी बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ऐसे 2,047 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जबकि 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इन आंकड़ों ने स्कूल भवन से आगे बढ़कर शिक्षा व्यवस्था में मौजूद दूसरी बुनियादी कमियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी विद्यालय के पास स्थायी भवन होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित कक्षाएं, शौचालय, साफ पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं भी स्कूल की बुनियादी जरूरतों में शामिल हैं।

इन इलाकों में सबसे बुरी स्थिति

सरकार की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग जिलों और ब्लॉकों में बिना भवन वाले स्कूलों की संख्या अलग-अलग है।

जयपुर में 38 सरकारी स्कूल ऐसे बताए गए हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। वहीं झालावाड़ जिले के अकलेरा ब्लॉक में सबसे अधिक 23 स्कूल बिना भवन के हैं। खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 स्कूल इस श्रेणी में हैं। फलोदी के बाप क्षेत्र में 11 और बांसवाड़ा के छोटीसादड़वन क्षेत्र में 10 स्कूलों के पास भी अपना भवन नहीं है।

611 स्कूलों में शामिल 10 बालिका विद्यालय भी चिंता का विषय हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इनमें जयपुर और अलवर में दो-दो, जबकि बाड़मेर, चूरू, डूंगरपुर, करौली, कोटा और राजसमंद में एक-एक बालिका विद्यालय शामिल है।

इसका मतलब है कि समस्या किसी एक जिले या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी स्कूलों के लिए स्थायी बुनियादी ढांचे की जरूरत बनी हुई है।

जर्जर भवनों पर बढ़ता व्यवस्था का सवाल

बिना भवन वाले स्कूलों की स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई किस तरह चल रही है।

कुछ मामलों में स्कूलों के पुराने भवनों को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद विद्यार्थियों को वैकल्पिक जगहों पर स्थानांतरित किया गया है। जयपुर के बगरू क्षेत्र के रामपुरा कंवरपुरा गांव का मामला इसी वजह से चर्चा में आया।

सीजेपी का दावा है कि वहां सरकारी स्कूल का मुख्य भवन असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बच्चों को एक अस्थायी ढांचे में पढ़ाया जा रहा था। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह जगह पशुओं के इस्तेमाल वाले परिसर जैसी स्थिति में थी और वहां चारा तथा अन्य सामग्री मौजूद थी।

सीजेपी सह-संयोजक आशुतोष रांका ने दावा किया कि मुख्य भवन की छत और बीम की स्थिति खराब होने के कारण उसे बंद किया गया और विद्यार्थियों को करीब 50 मीटर दूर टिन की छत वाले शेड में स्थानांतरित किया गया।

हालांकि, इस विशेष स्कूल को लेकर सीजेपी के दावों और स्थानीय लोगों के पक्ष में अंतर है। ग्रामीणों ने स्कूल के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की बात कही और दावा किया कि भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

सीजेपी का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान क्या है?

सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत पार्टी की टीमें अलग-अलग सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां भवन, कक्षाओं, शौचालय, पानी और अन्य सुविधाओं की स्थिति को सामने लाने का दावा कर रही हैं।

यह अभियान किसी सरकारी निरीक्षण व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह सीजेपी की ओर से शुरू किया गया स्वयंसेवी और राजनीतिक अभियान है, जिसके जरिए पार्टी सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बनाना चाहती है।

सीजेपी की गतिविधियां ऐसे समय तेज हुई हैं जब राजस्थान में सरकारी स्कूलों की इमारतों और सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं। पार्टी का दावा है कि वह उन स्कूलों को सामने ला रही है जहां विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

स्कूल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद

शुक्रवार, 21 अगस्त को जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा कंवरपुरा गांव में सीजेपी की टीम सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी। इसी दौरान टीम का स्थानीय लोगों के साथ विवाद हो गया।

सीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाया कि उन पर हमला किया गया, उनकी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया और कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें आईं। आशुतोष रांका ने दावा किया कि एक स्वयंसेवक का हाथ टूट गया। उन्होंने इस घटना के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों के होने का आरोप भी लगाया।

वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने सीजेपी की टीम के स्कूल दौरे का विरोध किया। सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में भीड़ द्वारा टीम को रोकने और गांव से बाहर जाने के लिए कहने की स्थिति दिखाई गई। स्थानीय पक्ष ने स्कूल के मुद्दे को राजनीतिक रूप देने पर आपत्ति जताई।

शुरू हुआ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

सरकारी स्कूलों की बदहाली सामने आने के बाद मामला सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। इस पर राजस्थान की सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया।

भाजपा सरकार ने स्कूलों की खराब स्थिति के लिए पिछली अशोक गहलोत सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार ने कहा कि पिछले साल झालावाड़ में स्कूल भवन हादसे के बाद कराए गए ऑडिट से सरकारी स्कूलों की स्थिति सामने आई और मौजूदा सरकार अब इन कमियों को दूर करने की कोशिश कर रही है।

वहीं विपक्ष ने सरकार से पूछा है कि अगर स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है तो इसे सुधारने के लिए ठोस और समयबद्ध योजना क्या है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पिछले ऑडिट का हवाला देते हुए स्कूलों की सुरक्षा और जर्जर भवनों का मुद्दा उठाया।

झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद बढ़ी चिंता

सरकारी स्कूलों की इमारतों को लेकर चिंता का एक बड़ा कारण झालावाड़ स्कूल हादसा भी है। पिछले साल जुलाई में झालावाड़ में एक स्कूल भवन की छत गिरने की घटना में सात विद्यार्थियों की मौत हुई थी और 28 छात्र घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य में सरकारी स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर ऑडिट और निरीक्षण की जरूरत सामने आई।

ऐसे हादसों के बाद सवाल केवल नए भवन बनाने का नहीं रह जाता, बल्कि पुराने भवनों की नियमित जांच, असुरक्षित घोषित इमारतों को समय पर खाली कराने और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का भी होता है।

सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की बात कही

राजस्थान सरकार ने स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने के लिए वित्तीय प्रावधान की जानकारी भी दी है।

सरकार के अनुसार, 550 करोड़ रुपये स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा 450 करोड़ रुपये उन स्कूलों के भवन निर्माण के लिए निर्धारित किए गए हैं जिनके पास भवन नहीं है या जो जर्जर इमारतों से संचालित हो रहे हैं। यानी तत्काल स्तर पर भवन और मरम्मत से जुड़े कामों के लिए कुल 1,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की बात सामने आई है।

इसके अलावा सरकार ने अगले पांच वर्षों में स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए विभिन्न स्रोतों से लगभग 12,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना बताई है। इसमें जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट, समग्र शिक्षा, राज्य निधि, आपदा राहत कोष, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और स्थानीय क्षेत्र विकास निधि जैसे स्रोत शामिल हैं।

अप्रैल 2026 में शिक्षा विभाग की ओर से 300 नए स्कूल भवनों के निर्माण के लिए 410 करोड़ रुपये की मंजूरी दिए जाने की भी रिपोर्ट है।

भवन के अलावा, शौचालय और पानी की भी समस्या

611 स्कूलों का बिना भवन के चलना इस पूरे मामले का सबसे प्रमुख आंकड़ा जरूर है, लेकिन सरकारी आंकड़े इससे आगे की तस्वीर भी दिखाते हैं। राज्य में अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 में शौचालय नहीं हैं, जबकि 1,049 में पेयजल की सुविधा नहीं है।

शौचालय की कमी वाले स्कूलों की संख्या बांसवाड़ा में सबसे अधिक 188 बताई गई है। इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं होने की जानकारी सामने आई है। पेयजल के मामले में दौसा में सबसे अधिक 96 स्कूल प्रभावित बताए गए हैं।

ये आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती केवल स्कूल भवनों के निर्माण की नहीं है। पहले से मौजूद भवनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

ये भी पढ़ें :- सहायक एवं स्वास्थ्य सेवा दाखिला 2026–27: प्रवेश से पहले मान्यता जांचें छात्र

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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