Monday, 17 August 2026
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Pinki Sonkar: ‘Smile Pinki’ की वो कहानी, जिसने Oscar तक पहुंचाया

उत्तर प्रदेश की Pinki Sonkar यानी ‘Smile Pinki’ की कहानी, जिसकी जिंदगी cleft lip surgery के बाद बदली और जिस पर बनी documentary ने 2009 में Oscar जीता

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाली एक बच्ची, जिसके हाथों में बचपन में शायद खिलौने भी कम ही रहे होंगे, एक दिन पूरी दुनिया की नजरों में आ गई। सोशल मीडिया पर आज भी उसकी तस्वीरें देखकर दावा किया जाता है कि उसके हाथों में दो Oscar Awards थे। लेकिन इस वायरल दावे की सच्चाई थोड़ी अलग है और शायद असली कहानी उससे भी ज्यादा खूबसूरत है।

इस बच्ची का नाम है Pinki Sonkar, जिसे दुनिया बाद में “Smile Pinki” के नाम से जानने लगी। Pinki उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के Rampur Dhabahi गांव की रहने वाली थीं। बचपन से ही उनके होंठ में cleft lip था। यह एक जन्मजात स्थिति है, जिसका आज आसानी से इलाज संभव है, लेकिन Pinki के बचपन में यह उनके लिए सिर्फ एक medical condition नहीं थी।

गरीबी, जानकारी की कमी और समाज की सोच ने उनकी जिंदगी को काफी मुश्किल बना दिया था। उनके चेहरे को देखकर लोग सवाल करते थे, बच्चे उन्हें अलग नजरों से देखते थे और Pinki के लिए सामान्य जिंदगी जीना भी आसान नहीं था।

एक surgery, जिसने जिंदगी बदल दी

Pinki की जिंदगी में बदलाव तब आया जब एक social worker के जरिए उनके परिवार को पता चला कि cleft lip का इलाज संभव है। सबसे खास बात यह थी कि इस इलाज के लिए उनके परिवार को अपनी गरीबी के सामने हार मानने की जरूरत नहीं थी। Pinki को वाराणसी के G.S. Memorial Hospital ले जाया गया, जहां plastic surgeon Dr. Subodh Kumar Singh ने उनकी surgery की।

यह surgery Smile Train के सहयोग से हुई थी। एक छोटी सी medical procedure ने Pinki की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला दिया। लेकिन बदलाव सिर्फ उनके चेहरे पर नहीं आया था। धीरे-धीरे उनके अंदर का confidence भी वापस आने लगा। जिस चेहरे को देखकर कभी लोग उन्हें घूरते थे, उसी चेहरे पर अब एक ऐसी मुस्कान थी, जिसने आगे चलकर दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचना था।

जब कैमरे तक पहुंची Pinki की कहानी

Pinki की जिंदगी की कहानी अमेरिका की filmmaker Megan Mylan तक पहुंची। Mylan ने Pinki और cleft lip से जूझ रहे दूसरे बच्चों की जिंदगी को करीब से समझने और कैमरे में रिकॉर्ड करने का फैसला किया। इसी कहानी से बनी documentary का नाम था “Smile Pinki”।

यह सिर्फ एक बच्ची की surgery की कहानी नहीं थी। फिल्म ने गरीबी, medical facilities की कमी और cleft lip को लेकर समाज में मौजूद stigma को भी सामने रखा। Documentary में Pinki के साथ Ghutaru नाम के एक और बच्चे की कहानी दिखाई गई, जो cleft lip की वजह से परेशानियों का सामना कर रहा था।

फिल्म ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि जिस medical condition का इलाज संभव है, उसकी वजह से किसी बच्चे को समाज से अलग क्यों कर दिया जाता है।

फिर आया वह दिन, जब Pinki Oscar तक पहुंचीं

साल 2009 में Pinki की जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसकी शायद उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। Hollywood में आयोजित 81st Academy Awards में “Smile Pinki” को Best Documentary, Short Subject का Oscar मिला। एक छोटे से गांव की बच्ची की कहानी अब दुनिया के सबसे बड़े film awards में से एक के मंच तक पहुंच चुकी थी। Pinki खुद भी Academy Awards ceremony में Dr. Subodh Kumar Singh के साथ मौजूद थीं। यह पल सिर्फ documentary की जीत नहीं था, बल्कि Pinki जैसी हजारों-लाखों कहानियों की तरफ दुनिया का ध्यान जाने का पल था।

लेकिन क्या Pinki के पास सच में दो Oscars थे?

यहीं पर वायरल दावे की असली fact-checking शुरू होती है। सोशल मीडिया पर कई बार यह दावा किया जाता है कि Pinki के हाथों में दो Oscar Awards थे। यह दावा सही नहीं है। Oscar Pinki Sonkar को व्यक्तिगत रूप से दो trophies के रूप में नहीं मिला था। Academy Award documentary “Smile Pinki” को Best Documentary, Short Subject category में मिला था।

इसका निर्देशन Megan Mylan ने किया था। Pinki फिल्म की मुख्य कहानी और चेहरा थीं, लेकिन Academy Award उनकी व्यक्तिगत दो trophies नहीं थीं।

2009 में भारत लौटने के बाद Pinki की एक तस्वीर भी सामने आई थी, जिसमें वह Oscar जैसी trophy पकड़े हुए दिखाई दी थीं। India Today के archive में इस trophy को “fake Oscar statuette” बताया गया है। इसलिए सिर्फ तस्वीर देखकर यह कहना कि Pinki के हाथों में दो असली Oscars थे, सही नहीं होगा। असली कहानी यह है कि उनकी जिंदगी पर बनी documentary ने Oscar जीता और Pinki उस ऐतिहासिक सफर का चेहरा थीं।

Oscar के बाद भी कहानी खत्म नहीं हुई

Pinki की कहानी सिर्फ Oscar ceremony तक सीमित नहीं रही। कुछ साल बाद वह फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आईं। साल 2013 में उन्होंने Wimbledon Men’s Singles Final में Novak Djokovic और Andy Murray के बीच coin toss में हिस्सा लिया। सोचिए, एक बच्ची जो कभी अपने चेहरे की वजह से लोगों की नजरों से बचती थी, कुछ साल बाद दुनिया के सबसे बड़े tennis stages में से एक पर हजारों दर्शकों के सामने खड़ी थी। यह किसी फिल्म का dramatic scene नहीं, बल्कि Pinki की वास्तविक जिंदगी का हिस्सा था।

एक चेहरे से बदल गई दुनिया की नजर

Pinki की कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती Oscar नहीं है। असली कहानी उस बदलाव की है जो उनके जीवन में आया। कभी उनका cleft lip उनकी पहचान बन गया था। लोग उन्हें उसी के आधार पर देखते थे। लेकिन surgery के बाद उनकी मुस्कान उनकी पहचान बन गई। “Smile Pinki” ने सिर्फ उनकी कहानी दुनिया को नहीं दिखाई, बल्कि cleft lip और उससे जुड़े social stigma के बारे में भी लोगों को जागरूक किया। उनकी कहानी ने यह संदेश दिया कि किसी बच्चे को उसके चेहरे या medical condition की वजह से अलग नहीं किया जाना चाहिए।

दो Oscars नहीं, लेकिन उससे कहीं बड़ी कहानी

तो अगली बार जब आपको सोशल मीडिया पर यह दावा दिखाई दे कि “उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव की बच्ची के हाथों में दो Oscars हैं”, तो इसे बिना जांचे आगे बढ़ाने से पहले एक बार रुकिए। Pinki के पास दो असली Oscars नहीं थे। लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी इतनी बड़ी जरूर थी कि उसने एक Oscar-winning documentary को जन्म दिया।

एक ऐसी बच्ची, जिसके बचपन में लोग उसके चेहरे को देखकर सवाल करते थे, वही बच्ची दुनिया के सबसे बड़े film awards में से एक के मंच तक पहुंची। एक समय वह अपने गांव की गलियों में एक आम बच्ची थी, फिर उसकी मुस्कान ने Hollywood तक सफर किया और बाद में Wimbledon जैसे global stage तक पहुंच गई।

Pinki की कहानी हमें शायद सबसे जरूरी बात यही सिखाती है कि किसी इंसान की शुरुआत उसकी पूरी कहानी नहीं होती। परिस्थितियां चाहे जितनी मुश्किल हों, सही मदद, सही जानकारी और सही अवसर किसी की जिंदगी बदल सकते हैं। Pinki के पास भले ही दो Oscar Awards नहीं थे, लेकिन उनके पास एक ऐसी कहानी जरूर थी जिसने दुनिया को मुस्कुराने की वजह दी। और शायद यही वजह है कि आज भी लोग उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा एक नाम से जानते हैं, “Smile Pinki”।

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Bureau NOTD

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