इमरान खान की मौत की अफवाह ने पाकिस्तान की राजनीति गरमा दी। पत्रकार के दावे के बाद सेना ने इसे खारिज किया। जानिए दावा कहां से आया और जेल में बंद इमरान की क्या स्थिति है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान को लेकर मंगलवार, 12 अगस्त को अचानक ऐसी खबर सामने आई, जिसने पाकिस्तान की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। एक पाकिस्तानी पत्रकार ने दावा किया कि रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में मौजूद कुछ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को आशंका है कि जेल में बंद इमरान खान अब जीवित नहीं हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई और बाद में खुद पत्रकार ने स्पष्ट किया कि उनके सूत्रों ने इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी। इसके बाद पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने भी इन खबरों को ‘बेबुनियाद’ बताया।
इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया क्योंकि इमरान खान के परिवार, वकीलों और पीटीआई नेताओं ने लंबे समय से शिकायत की है कि उन्हें जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री तक पहुंच नहीं मिल रही है। ऐसे में मौत की अपुष्ट खबर ने पाकिस्तान में उनके समर्थकों के बीच चिंता और गुस्सा दोनों बढ़ा दिए हैं। पीटीआई ने इमरान खान से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।
कहां से शुरू हुआ इमरान खान की मौत का दावा?
मौत की खबर का आधार पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान की रिपोर्टिंग बनी। अमेरिका में रहने वाले इस पत्रकार ने 10 अगस्त को अपने यूट्यूब कार्यक्रम में कहा था कि रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान सेना के जनरल हेडक्वार्टर यानी जीएचक्यू से जुड़े तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने अलग-अलग तरीके से यह आशंका व्यक्त की है कि इमरान खान अब जीवित नहीं हैं। हालांकि, उसी रिपोर्ट में उन्होंने यह भी कहा था कि यह पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों ने खुद इमरान खान को मृत नहीं देखा है।
इसके बाद यह दावा सोशल मीडिया और पाकिस्तानी मीडिया में तेजी से फैल गया। लेकिन बुधवार को पत्रकार ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके सूत्रों ने इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी, बल्कि उन्होंने केवल गंभीर आशंका और डर व्यक्त किया था। वजाहत ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य अधिकारियों पर दबाव बनाना था, ताकि वे इमरान खान के जीवित होने का प्रमाण सार्वजनिक करें।
पाकिस्तान सेना ने क्या कहा?
पत्रकार के दावे के बाद पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने इमरान खान की मौत से जुड़ी खबरों को खारिज कर दिया। सेना ने इन्हें बेबुनियाद बताया। यह प्रतिक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मूल दावा कथित तौर पर सेना से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आया था।
दूसरी ओर, इमरान खान के परिवार और पीटीआई की तरफ से लंबे समय से यह सवाल उठाया जा रहा है कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री से नियमित रूप से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। परिवार और पार्टी की ओर से उनके स्वास्थ्य की स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच की मांग भी की गई है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को समझने का सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि मौत की खबर अपुष्ट है, पत्रकार ने अपने शुरुआती दावे को स्पष्ट किया है और पाकिस्तान सेना ने इसे खारिज कर दिया है।
पहले भी फैल चुकी हैं ऐसी अफवाहें
यह पहली बार नहीं है जब जेल में बंद इमरान खान की मौत की अफवाह सामने आई हो। 2025 में भी ऐसी ही अटकलें सामने आई थीं। उस समय उनके परिवार और पार्टी नेताओं को उनसे संपर्क करने में परेशानी होने की खबरें आई थीं, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठे थे।
2 दिसंबर को उनकी बहन उजमा खानम ने अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की थी और बताया था कि इमरान खान शारीरिक रूप से ठीक हैं, हालांकि उन्हें अलगाव में रखा गया था। इसके बाद उस समय फैली मौत की अफवाहों पर विराम लगा था।
इस बार भी मौत के दावे के पीछे सबसे बड़ा सवाल यही है कि जेल में बंद इमरान खान से परिवार और उनके समर्थकों की नियमित पहुंच कितनी है। यही वजह है कि अपुष्ट दावे के बावजूद इस खबर ने इतना बड़ा राजनीतिक असर पैदा किया।
जेल में क्यों हैं इमरान खान?
इमरान खान 5 अगस्त 2023 से जेल में हैं। हालांकि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं और अलग-अलग मामलों में उन्हें राहत, निलंबन या बरी होने का सामना करना पड़ा है, लेकिन फिलहाल उनके खिलाफ सबसे महत्वपूर्ण सजा अल-कादिर ट्रस्ट मामले से जुड़ी है।
17 जनवरी 2025 को पाकिस्तान की एक जवाबदेही अदालत ने इमरान खान को इस मामले में 14 साल की जेल की सजा सुनाई थी। उनकी पत्नी बुशरा बीबी को भी इसी मामले में सात साल की सजा मिली थी। अदालत ने इमरान खान पर जुर्माना भी लगाया और मामले से जुड़ी जमीन जब्त करने का आदेश दिया।

अल-कादिर ट्रस्ट मामला करीब 19 करोड़ पाउंड से जुड़े विवाद के तौर पर सामने आया था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इमरान खान और बुशरा बीबी को उनके कार्यकाल के दौरान एक रियल एस्टेट कारोबारी से जमीन और अन्य लाभ मिले और इसके बदले सरकारी फैसलों में फायदा पहुंचाया गया। हालांकि इमरान खान और बुशरा बीबी ने इन आरोपों से इनकार किया है।
इमरान खान के खिलाफ मई 2023 की हिंसा से जुड़े मामले भी लंबित हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे और सेना से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे थे। इन घटनाओं से जुड़े मामलों में भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही है।
बढ़ता कानूनी संघर्ष
इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से उनकी कानूनी लड़ाई लगातार चलती रही है। जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में मिली 14 साल की सजा ने उनकी जेल की स्थिति को और गंभीर बना दिया। रावलपिंडी की अदियाला जेल में ही इस मामले की सुनवाई हुई थी।
इमरान खान और उनकी पार्टी लगातार दावा करती रही है कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। वहीं पाकिस्तान की सरकार और जांच एजेंसियों का कहना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई कानूनी मामलों और अदालतों के फैसलों के आधार पर हो रही है।
क्रिकेट की दुनिया में इमरान खान का योगदान
राजनीति में आने से पहले इमरान खान पाकिस्तान के सबसे प्रसिद्ध क्रिकेटरों में शामिल थे। उन्होंने 1971 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और 1992 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अनुसार, वह अपनी पीढ़ी के महान ऑलराउंडरों में शामिल रहे।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1992 क्रिकेट विश्व कप रही। इमरान खान की कप्तानी में पाकिस्तान ने 25 मार्च 1992 को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में इंग्लैंड को 22 रन से हराकर पहली बार विश्व कप जीता। फाइनल में इमरान ने 72 रन बनाए और गेंद से भी एक विकेट लिया।

इमरान खान ने 88 टेस्ट मैचों में 3,807 रन बनाए और 362 विकेट लिए। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके नाम 182 विकेट भी रहे। 2009 में उन्हें आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया।
1992 की विश्व कप जीत ने पाकिस्तान क्रिकेट की दिशा बदल दी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुताबिक, उस जीत ने देश में क्रिकेट के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित किया और इसे पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
क्रिकेट के बाद समाजसेवा की ओर बढ़े
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद इमरान खान ने अपना ध्यान सामाजिक कार्यों की ओर लगाया। उनकी मां की कैंसर से मृत्यु के बाद उन्होंने पाकिस्तान में कैंसर अस्पताल बनाने के लिए अभियान शुरू किया। इसी प्रयास से शौकत खानम मेमोरियल कैंसर अस्पताल की स्थापना हुई।
बाद में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया और नामल इंस्टीट्यूट की स्थापना में भूमिका निभाई। राजनीति में आने से पहले ही वह पाकिस्तान में एक लोकप्रिय सार्वजनिक व्यक्तित्व बन चुके थे।

1996 में बनाई राजनीतिक पार्टी
इमरान खान ने 25 अप्रैल 1996 को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई की स्थापना की। शुरुआत में पार्टी को पाकिस्तान की पारंपरिक राजनीति में बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन इमरान खान ने भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति, जवाबदेही और ‘नया पाकिस्तान’ के विचार को अपनी राजनीतिक पहचान बनाया।
2002 के आम चुनाव में वह पहली बार नेशनल असेंबली के सदस्य बने। 2013 के चुनाव में पीटीआई पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल हो गई। आखिरकार 2018 के आम चुनाव में पीटीआई सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी बनी और इमरान खान प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे।
2018 में बने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री
18 अगस्त 2018 को इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह देश के 22वें प्रधानमंत्री बने। उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, सामाजिक कल्याण और आर्थिक सुधारों को प्रमुख मुद्दा बनाया।

उनकी सरकार ने एहसास कार्यक्रम, स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी योजनाओं और पर्यावरण से जुड़े ‘टेन बिलियन ट्री सुनामी’ जैसे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया। विदेश नीति में उन्होंने चीन के साथ संबंधों, क्षेत्रीय संपर्क और कश्मीर जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया।

हालांकि उनकी सरकार को आर्थिक संकट, महंगाई, राजनीतिक अस्थिरता और विपक्ष के दबाव का सामना करना पड़ा।
2022 में सत्ता से हटे इमरान खान
10 अप्रैल 2022 को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान हुआ और इमरान खान सरकार सत्ता से बाहर हो गई। वह पाकिस्तान के इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटाए जाने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।
इसके बाद इमरान खान ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दीं। उन्होंने अपनी सरकार गिराने के पीछे विदेशी साजिश और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान की भूमिका के आरोप लगाए। इन आरोपों को पाकिस्तान की सरकार और संबंधित पक्षों ने खारिज किया।
2023 में उनकी गिरफ्तारी और उसके बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों ने पाकिस्तान की राजनीति को और ज्यादा अस्थिर कर दिया।
मौत की खबर से बढ़ा राजनीतिक तनाव
अगस्त 2026 में इमरान खान की मौत से जुड़ी अपुष्ट खबर ऐसे समय आई है जब पीटीआई और पाकिस्तान की सत्ता एवं सैन्य प्रतिष्ठान के बीच तनाव पहले से काफी ज्यादा है।
पीटीआई ने इमरान खान की रिहाई और उनसे मुलाकात की अनुमति की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही है। पार्टी के नेताओं ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। पीटीआई ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च का भी ऐलान किया है।
इमरान खान की सेहत को लेकर भी उठते रहे हैं सवाल
इमरान खान की मौत की अफवाह का एक कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर पहले से मौजूद चिंता भी है। 2026 की शुरुआत में उनकी दाहिनी आंख की दृष्टि को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई थीं। उनके वकीलों और पार्टी ने चिकित्सा उपचार और स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच की मांग की थी। दूसरी ओर पाकिस्तान के अधिकारियों ने उनकी स्थिति में सुधार होने की बात कही थी।
इसी वजह से जेल में उनकी वास्तविक स्थिति और परिवार तथा डॉक्टरों की पहुंच का सवाल बेहद संवेदनशील बन गया है।
फिलहाल मौत की कोई पुष्टि नहीं
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 12 अगस्त 2026 तक इमरान खान की मौत की कोई स्वतंत्र और विश्वसनीय पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने अपने शुरुआती दावे को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके सूत्रों ने मौत की पुष्टि नहीं की थी। वहीं पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने मौत की खबरों को बेबुनियाद बताया है।
क्रिकेट के मैदान पर पाकिस्तान को विश्व कप जिताने वाले इमरान खान ने बाद में राजनीति में प्रवेश कर देश के प्रधानमंत्री का पद हासिल किया। आज वही इमरान खान जेल में हैं और उनकी रिहाई पाकिस्तान की सबसे बड़ी राजनीतिक मांगों में से एक बनी हुई है। उनकी मौत की अपुष्ट खबर ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि पाकिस्तान की राजनीति में उनका प्रभाव जेल के भीतर रहने के बावजूद कितना बड़ा है।
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