मैक्सिको सिटी के पास मौजूद ‘आइलैंड ऑफ द डॉल्स’ पर पेड़ों से लटकी सैकड़ों पुरानी गुड़ियाएं डरावना माहौल बनाती हैं। जानिए डॉन जूलियन और इस द्वीप की रहस्यमयी कहानी।
ज़ोचिमिल्को, मैक्सिको सिटी: दुनिया में कुछ जगहें ऐसी हैं जिन्हें देखकर इंसान को लगता है कि वह किसी हॉरर फिल्म के सेट पर पहुंच गया है। मैक्सिको सिटी के दक्षिण में स्थित Isla de las Muñecas, यानी ‘आइलैंड ऑफ द डॉल्स’, भी ऐसी ही एक जगह है। यहां खूबसूरत समुद्री नजारे या पर्यटकों से भरे रिसॉर्ट नहीं, बल्कि पेड़ों की डालियों, झाड़ियों और पुराने ढांचों पर टंगी सैकड़ों पुरानी गुड़ियाएं दिखाई देती हैं।
किसी गुड़िया की आंख गायब है, किसी का चेहरा खराब हो चुका है, तो किसी के शरीर के हिस्से टूटे हुए हैं। समय और मौसम ने इन खिलौनों को और भयावह बना दिया है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे दर्जनों खाली आंखें आने-जाने वालों को देख रही हों।
लेकिन इस द्वीप की कहानी सिर्फ डरावनी गुड़ियाओं तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक स्थानीय व्यक्ति डॉन जूलियन सैन्टाना बैरेरा (Don Julián Santana Barrera) की कहानी है, एक बच्ची की रहस्यमयी मौत से जुड़ी लोककथा है और वर्षों तक द्वीप पर गुड़ियाएं लटकाते रहने की एक असामान्य परंपरा है। समय के साथ यह जगह मैक्सिको के सबसे चर्चित डरावने पर्यटन स्थलों में शामिल हो गई।
कहां है ‘डॉल आइलैंड’?
Isla de las Muñecas मैक्सिको सिटी के दक्षिणी हिस्से में स्थित ज़ोचिमिल्को (Xochimilco) के नहर क्षेत्र में आने वाला एक छोटा-सा द्वीप है। ज़ोचिमिल्को अपनी ऐतिहासिक नहरों और पारंपरिक ट्रैजिनेरास (Trajineras) नाम की रंगीन नावों के लिए जाना जाता है।

यह इलाका अपने पुराने जलमार्गों के कारण मैक्सिको सिटी के बाकी हिस्सों से काफी अलग नजर आता है। इन्हीं नहरों के बीच स्थित यह छोटा द्वीप धीरे-धीरे अपनी डरावनी पहचान के कारण दुनिया भर में मशहूर हुआ।
यहां जाने वाले पर्यटक आमतौर पर नाव के जरिए द्वीप तक पहुंचते हैं। जैसे-जैसे नाव द्वीप के करीब पहुंचती है, पेड़ों पर लटकी पुरानी गुड़ियाएं दिखाई देने लगती हैं। यह दृश्य इस जगह को ज़ोचिमिल्को के अन्य इलाकों से बिल्कुल अलग बना देता है।
आखिर इतनी सारी गुड़ियाएं आईं कहां से?
द्वीप की कहानी का सबसे चर्चित नाम है डॉन जूलियन सैन्टाना बैरेरा। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, वह लंबे समय तक इस द्वीप पर अकेले रहते थे और खेती-बाड़ी से जुड़े काम करते थे।
कहा जाता है कि 1950 के दशक के मध्य में उन्होंने एक बच्ची को पानी में डूबते हुए देखा। स्थानीय कहानी के अनुसार, जूलियन उस बच्ची को बचा नहीं सके और उसकी मौत हो गई। यहीं से इस द्वीप की सबसे मशहूर कहानी शुरू होती है।
जूलियन का दावा था कि बच्ची की आत्मा द्वीप पर मौजूद रही और उसे परेशान करने लगी। उन्होंने कथित तौर पर बच्ची की आत्मा को शांत करने के लिए उसकी याद में एक गुड़िया पेड़ पर टांग दी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
जूलियन को लगा कि बच्ची की आत्मा अभी भी वहां मौजूद है। इसके बाद उन्होंने दूसरी गुड़ियाएं जमा करनी शुरू कर दीं। कुछ गुड़ियाएं उन्होंने स्थानीय लोगों से लीं, कुछ उन्हें नहरों में मिलीं और कुछ के बदले उन्होंने सामान तक दिया। धीरे-धीरे एक गुड़िया दर्जनों में और दर्जनों सैकड़ों में बदल गईं।
गुड़ियाओं को पेड़ों पर क्यों लटकाते थे जूलियन?
जूलियन के बारे में प्रकाशित विवरणों में सबसे ज्यादा दो बातें सामने आती हैं। एक, बच्ची की आत्मा को शांत करने की उनकी कोशिश और दूसरी, कथित तौर पर यह विश्वास कि गुड़ियाएं उस आत्मा को खुश रखेंगी।
वह गुड़ियाओं को पेड़ों की डालियों और द्वीप के अलग-अलग हिस्सों में लटका देते थे। कई गुड़ियाएं काफी पुरानी थीं और समय के साथ बारिश, धूप और नमी के कारण खराब होती चली गईं।
उनके चेहरे पर धूल जम गई, रंग उड़ गया और शरीर के कई हिस्से टूट गए। कुछ गुड़ियाओं के हाथ-पैर गायब हो गए तो कुछ की आंखें निकल गईं।
यही प्राकृतिक क्षति बाद में द्वीप के डरावने वातावरण का सबसे बड़ा हिस्सा बन गई। वर्षों में स्थानीय लोगों और आने वाले पर्यटकों ने भी द्वीप पर गुड़ियाएं छोड़ीं। इस तरह गुड़ियाओं की संख्या लगातार बढ़ती गई।
क्या सच में गुड़ियाएं ‘जिंदा’ हो जाती थीं?
यही वह हिस्सा है जिसने Isla de las Muñecas को दुनिया भर में हॉरर स्टोरी का हिस्सा बना दिया।
स्थानीय कथाओं और पर्यटकों के अनुभवों में दावा किया जाता है कि कुछ गुड़ियाएं अपनी आंखें हिलाती हैं, सिर घुमाती हैं या अचानक अपनी स्थिति बदल लेती हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उन्होंने गुड़ियाओं से बच्चों जैसी आवाजें सुनीं। लेकिन इन दावों के पीछे कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
पुरानी गुड़ियाओं की आंखों, सिर या शरीर के हिस्सों का हवा, नमी या लकड़ी के सिकुड़ने-फैलने के कारण हिलना संभव है। लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने के कारण इन खिलौनों की हालत भी लगातार बदलती रहती है।
फिर भी, जब सैकड़ों पुरानी और क्षतिग्रस्त गुड़ियाएं एक साथ पेड़ों पर लटकी हों, तो माहौल अपने आप ही रहस्यमय लगने लगता है।
बच्ची की आत्मा करती थी जूलियन से बात?
द्वीप से जुड़ी सबसे प्रचलित कहानी के मुताबिक, जूलियन का मानना था कि जिस बच्ची की मौत हुई थी, उसकी आत्मा उनसे संपर्क करती थी। कहा जाता है कि उन्हें डर था कि बच्ची की आत्मा उनसे नाराज है और उसे शांत रखने के लिए उन्होंने गुड़ियाएं जमा करना जारी रखा।
लेकिन इस कहानी में एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है। बच्ची की मौत और उसके बाद की घटनाओं के बारे में उपलब्ध विवरण मुख्य रूप से जूलियन से जुड़ी कथाओं, स्थानीय लोगों की बातों और बाद में प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
यानी इसे इतिहास के निर्विवाद तथ्य की तरह नहीं, बल्कि द्वीप से जुड़ी प्रसिद्ध लोककथा के रूप में समझना ज्यादा उचित है।
जूलियन की मौत ने बढ़ाया रहस्य
द्वीप की कहानी में सबसे अजीब संयोग तब आया जब जूलियन सैन्टाना बैरेरा की खुद मृत्यु उसी इलाके में हुई।
17 अप्रैल 2001 को उनकी मौत हो गई। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, वह अपने रिश्तेदार अनास्तासियो सैन्टाना के साथ नहर क्षेत्र में थे और बाद में पानी में डूबने से उनकी मृत्यु हुई।
स्थानीय कहानी में इसे उस बच्ची की मौत से जोड़कर देखा गया, जिसके बारे में कहा जाता था कि वह वर्षों पहले उसी क्षेत्र में डूब गई थी।
कुछ लोगों ने इसे अलौकिक घटना की तरह पेश किया। लेकिन जूलियन की मृत्यु को उस बच्ची की कथित आत्मा से जोड़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। फिर भी, इस घटना ने Isla de las Muñecas की कहानी को और ज्यादा रहस्यमय बना दिया।
मौत के बाद द्वीप बना पर्यटन स्थल
जूलियन की मृत्यु के बाद Isla de las Muñecas की प्रसिद्धि कम होने के बजाय तेजी से बढ़ी।
मीडिया रिपोर्टों, टेलीविजन कार्यक्रमों, इंटरनेट और हॉरर कंटेंट ने इस जगह को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग यह देखने आने लगे कि आखिर पेड़ों पर इतनी सारी गुड़ियाएं क्यों टंगी हैं।
आज यह जगह ज़ोचिमिल्को (Xochimilco) के चर्चित पर्यटन आकर्षणों में गिनी जाती है। पर्यटक नावों के जरिए यहां पहुंचते हैं और द्वीप पर मौजूद गुड़ियाओं को देखते हैं।
कुछ लोग इसे डरावनी जगह मानकर आते हैं, जबकि कुछ के लिए यह मैक्सिको की लोक संस्कृति और स्थानीय इतिहास का अनोखा हिस्सा है।
पर्यटक भी छोड़ जाते हैं अपनी गुड़ियाएं
एक दिलचस्प बात यह है कि द्वीप पर मौजूद सभी गुड़ियाएं सिर्फ जूलियन द्वारा जमा की गई नहीं हैं। समय के साथ यहां आने वाले पर्यटकों ने भी अपनी गुड़ियाएं छोड़नी शुरू कर दीं। कुछ लोग ऐसा परंपरा के रूप में करते हैं, तो कुछ इस विश्वास के साथ कि ऐसा करने से उन्हें बुरी आत्माओं से सुरक्षा मिलेगी।

इस वजह से द्वीप पर गुड़ियाओं का संग्रह लगातार बढ़ता गया। आज कई गुड़ियाएं इतनी पुरानी हैं कि उन्हें देखकर यह अनुमान लगाना भी मुश्किल होता है कि वे कभी बच्चों के खिलौने हुआ करती थीं।
क्यों दिखती हैं इतनी डरावनी?
द्वीप की डरावनी छवि का एक बड़ा कारण वहां का वातावरण है।
गुड़ियाएं सालों से खुले वातावरण में पड़ी या लटकी हुई हैं। Xochimilco का नम वातावरण, बारिश, धूप और मिट्टी इन खिलौनों को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं। प्लास्टिक और कपड़े के हिस्से खराब हो जाते हैं। आंखें टूट जाती हैं। बाल उलझ जाते हैं। चेहरों का रंग फीका पड़ जाता है।
कुछ गुड़ियाओं के सिर्फ धड़ बचे हैं, कुछ के हाथ-पैर नहीं हैं और कई के चेहरे पर गंदगी की मोटी परत जम चुकी है। जब ऐसी सैकड़ों वस्तुएं पेड़ों के बीच एक साथ दिखाई देती हैं, तो उनका दृश्य स्वाभाविक रूप से भय पैदा करता है।
क्या यह सच में ‘हॉन्टेड’ है?
Isla de las Muñecas को अक्सर दुनिया की सबसे डरावनी जगहों में शामिल किया जाता है। लेकिन ‘हॉन्टेड’ होने का दावा और किसी जगह का वास्तव में भूतिया होना दो अलग बातें हैं।
द्वीप पर कथित तौर पर गुड़ियाओं के हिलने, फुसफुसाहट सुनाई देने या किसी अदृश्य उपस्थिति महसूस होने की कहानियां हैं। कुछ पर्यटकों ने भी ऐसे अनुभवों का दावा किया है। लेकिन इन घटनाओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह अंतर इसलिए भी जरूरी है क्योंकि डरावनी कहानियां अक्सर वास्तविक घटनाओं, स्थानीय मान्यताओं और बाद में जोड़े गए किस्सों के साथ मिलकर एक नई कहानी बना देती हैं।
आज Isla de las Muñecas क्यों खास है?
आज यह द्वीप सिर्फ एक डरावनी जगह नहीं है। यह Xochimilco की सांस्कृतिक और पर्यटन पहचान का हिस्सा बन चुका है।
यहां की कहानी में कई परतें हैं। एक पुरानी स्थानीय लोककथा, एक अकेले व्यक्ति का विश्वास, सैकड़ों पुरानी गुड़ियाओं का संग्रह, एक रहस्यमयी मौत और फिर मीडिया के जरिए बनी अंतरराष्ट्रीय पहचान।

यही वजह है कि इस जगह को देखने वाले हर व्यक्ति के लिए इसकी कहानी अलग अर्थ रख सकती है।
किसी के लिए यह डरावना पर्यटन स्थल है, किसी के लिए लोककथा, किसी के लिए कला और स्मृति का अजीब उदाहरण, जबकि किसी के लिए यह सिर्फ एक असामान्य पर्यटन आकर्षण है।
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