8 अगस्त 1963 की रात नकली लाल सिग्नल से शुरू हुई ब्रिटेन की सबसे चर्चित ट्रेन डकैती। जानिए कैसे लुटेरों ने करोड़ों की नकदी लूटी और छोटी-छोटी गलतियों से पकड़े गए।
लंदन: रात का सन्नाटा था। ट्रेन ग्लासगो से लंदन की ओर बढ़ रही थी। उसमें यात्री नहीं, बल्कि डाक कर्मचारी और करोड़ों की नकदी थी। अचानक रेलवे ट्रैक पर लाल सिग्नल दिखाई दिया। ड्राइवर ने ट्रेन रोक दी। उसे क्या पता था कि यह सिग्नल असली नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।
कुछ ही मिनटों में ड्राइवर पर हमला हुआ, ट्रेन के डिब्बे अलग किए गए और करीब 2.6 मिलियन पाउंड (करीब 33 करोड़ रुपये) की नकदी से भरी 120 से ज्यादा डाक की बोरियां लेकर लुटेरे फरार हो गए। 8 अगस्त 1963 की उस घटना को लोग आज “द ग्रेट ट्रेन रॉबरी” के नाम से जानते हैं।
यह सिर्फ एक ट्रेन डकैती नहीं थी। इसके बाद पुलिस की लंबी जांच, एक सुनसान फार्महाउस, मोनोपोली बोर्ड और केचप की बोतल पर मिले फिंगरप्रिंट, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां, 1964 का चर्चित मुकदमा, बेहद लंबी जेल सजाएं और फिर जेल से फरार होकर विदेश भागने वाले अपराधियों की कहानी सामने आई। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस आज भी इसे अपने इतिहास के सबसे चर्चित अपराधों में गिनती है।
8 अगस्त की रात क्या हुआ था?
8 अगस्त 1963 को ग्लासगो से लंदन के यूस्टन स्टेशन के लिए एक Travelling Post Office ट्रेन रवाना हुई थी। ट्रेन में डाक छांटने और पार्सल संभालने वाले कर्मचारी मौजूद थे। इसमें बड़ी मात्रा में नकदी भी ले जाई जा रही थी।
स्कॉटलैंड में बैंक हॉलिडे वीकेंड के कारण उस रात ट्रेन में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना ज्यादा नकदी थी। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस के मुताबिक, आमतौर पर इस तरह की रकम करीब 3 लाख पाउंड होती थी, लेकिन उस रात ट्रेन में लगभग 2.3 मिलियन पाउंड थे। अन्य ऐतिहासिक स्रोतों और बाद की रिपोर्टों में चोरी की रकम 2.6 मिलियन पाउंड बताई गई है।

ट्रेन में करीब 50 डाक कर्मचारी थे, लेकिन कोई यात्री नहीं था। रात करीब 3 बजे, ट्रेन बकिंघमशायर में Sears Crossing के पास पहुंची। यहीं से पूरी साजिश शुरू हुई।
फर्जी लाल सिग्नल से शुरू हुई साजिश
लुटेरों ने सबसे पहले रेलवे के सिग्नल सिस्टम से छेड़छाड़ की। उन्होंने वास्तविक सिग्नल को इस तरह ढका कि हरी रोशनी दिखाई न दे और एक अलग बैटरी की मदद से लाल सिग्नल जला दिया।
ड्राइवर जैक मिल्स ने लाल सिग्नल देखकर ट्रेन रोक दी। मिल्स को लगा कि शायद आगे ट्रैक पर कोई समस्या है। उनके सहायक ड्राइवर डेविड व्हिटबी ट्रेन से नीचे उतरे और रेलवे के लाइन-साइड फोन से सिग्नलमैन से संपर्क करने पहुंचे। लेकिन फोन की तार पहले ही काट दी गई थी।
व्हिटबी जब वापस ट्रेन की तरफ लौटे तो उन पर हमला किया गया और उन्हें रेलवे की ढलान से नीचे फेंक दिया गया। उसी समय एक नकाबपोश व्यक्ति ट्रेन के कैब में पहुंचा और जैक मिल्स के सिर पर भारी वस्तु से हमला किया। मिल्स घायल होकर बेहोश हो गए।
ट्रेन को ही बना लिया गया लूट का वाहन
लुटेरों ने ट्रेन के ज्यादातर डिब्बों को अलग कर दिया। इंजन और आगे के दो डिब्बे, जिनमें हाई-वैल्यू मेल और नकदी थी, बाकी ट्रेन से अलग कर दिए गए।
उनकी योजना थी कि ट्रेन को थोड़ी दूरी आगे ले जाकर ऐसी जगह रोका जाए जहां सड़क से उनके वाहनों तक नकदी पहुंचाना आसान हो। यह जगह थी ब्राइडगो ब्रिज (Bridego Bridge), जो बकिंघमशायर के Ledburn/Cheddington इलाके के पास था।
लुटेरों ने पहले से यहां लैंड रोवर और दूसरे वाहन तैयार कर रखे थे। योजना के मुताबिक ट्रेन को लगभग एक मील आगे ले जाया गया।

लेकिन यहां एक समस्या सामने आई। जिस व्यक्ति को ट्रेन चलाने में मदद करनी थी, उसे इस खास डीजल इंजन की जटिलता का पर्याप्त अनुभव नहीं था। आखिरकार रॉनी बिग्स को ड्राइवर जैक मिल्स को होश में लाकर ट्रेन आगे बढ़ाने में मदद करनी पड़ी।
120 से ज्यादा बोरियों में भरी थी नकदी
ब्राइडगो ब्रिज पहुंचने के बाद लुटेरों ने ट्रेन से नकदी निकालनी शुरू की। उन्होंने इंसानी श्रृंखला बनाकर डाक की बोरियां नीचे खड़े वाहनों तक पहुंचाईं। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस के मुताबिक करीब 120 बोरियां, जिनका कुल वजन लगभग ढाई टन था, वहां से हटाई गईं।
पूरी कार्रवाई बेहद तेजी से हुई। लुटेरों ने डाक कर्मचारियों को धमकाया और उन्हें कुछ समय तक वहीं रहने का आदेश दिया ताकि पुलिस को तुरंत सूचना न मिल सके।
डकैती के बाद गिरोह Leatherslade Farm, Oakley की ओर चला गया। यह फार्म पहले से ही उनके ठिकाने के तौर पर तैयार किया गया था।
डकैती के पीछे के मास्टरमाइंड
इस अपराध में करीब 15 लोगों की मुख्य भूमिका मानी जाती है। इनमें कई नाम बाद में ब्रिटेन के अपराध इतिहास में बेहद चर्चित हुए।
1. ब्रूस रेनॉल्ड्स
रेनॉल्ड्स को इस ऑपरेशन का मुख्य योजनाकार या “mastermind” माना गया। वह पेशेवर अपराधी था और पहले भी बड़ी डकैतियों में शामिल रह चुका था। बाद में वह पांच साल तक पुलिस से बचता रहा और 1968 में पकड़ा गया। 1969 में उसे 25 साल की जेल की सजा मिली।

2. गॉर्डन ‘गूडी’ गूडी
वह गिरोह के प्रमुख सदस्यों में था और योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसे 30 साल की सजा मिली।

3. रॉनाल्ड ‘बस्टर’ एडवर्ड्स
रॉनाल्ड भी मुख्य गिरोह का हिस्सा था। डकैती के बाद वह लंबे समय तक फरार रहा और 1966 में ब्रिटेन लौटकर आत्मसमर्पण किया। उसे 15 साल की सजा मिली।

4. चार्ली विल्सन
चार्ली गिरोह के सबसे प्रमुख और खतरनाक सदस्यों में माना जाता था। उसे 30 साल की सजा हुई।

5. रॉनी बिग्स
बिग्स की भूमिका अपेक्षाकृत छोटी बताई जाती है, लेकिन बाद में वह इस पूरे मामले का सबसे प्रसिद्ध चेहरा बन गया। उसे 30 साल की सजा हुई, लेकिन 1965 में वह जेल से भाग निकला और कई दशकों तक विदेश में रहा।

6. रॉय जेम्स, टॉमी विस्बी, जिम हसी और बॉब वेल्च
ये सभी गिरोह की कार्रवाई में शामिल थे और मुख्य मुकदमे में इन्हें भी 30-30 साल की सजा मिली।
7. रोजर कॉर्ड्रे
कॉर्ड्रे को रेलवे सिग्नल में छेड़छाड़ से जुड़ी विशेषज्ञ भूमिका के लिए जाना गया। उसे शुरुआत में 20 साल की सजा हुई, जिसे अपील के बाद घटाकर 14 साल कर दिया गया।

8. जिमी व्हाइट
जिमी व्हाइट लंबे समय तक पुलिस से बचा रहा। बाद में पकड़े जाने पर उसे 18 साल की सजा मिली।

9. ब्रायन फील्ड और लियोनार्ड फील्ड
ब्रायन फील्ड एक सॉलिसिटर का क्लर्क था और फार्म की व्यवस्था में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। दोनों को शुरुआत में लंबी सजाएं मिलीं, लेकिन बाद में अपील के बाद उनकी सजा प्रभावी रूप से पांच-पांच साल रह गई।
10. जॉन व्हीटर
पेशे से सॉलिसिटर जॉन व्हीटर ने Leatherslade Farm की खरीद में भूमिका निभाई। उसे तीन साल की सजा मिली।
11. विलियम बोअल
बोअल को शुरुआत में 24 साल की सजा दी गई थी, लेकिन बाद में अपील में उसकी सजा घटाकर 14 साल कर दी गई और डकैती की साजिश से जुड़ा दोष भी पलट दिया गया।
इसके अलावा हैरी स्मिथ और डैनी पेम्ब्रोक जैसे नाम भी इस मामले से जुड़े बताए जाते हैं, लेकिन उन पर आरोप साबित नहीं हुए और वे मुख्य दोषसिद्ध आरोपियों की सूची में शामिल नहीं हुए।
Leatherslade Farm बना सबसे बड़ा सुराग
डकैती के बाद गिरोह को लगा कि उसने पुलिस को पूरी तरह चकमा दे दिया है। लेकिन यहीं से उनकी सबसे बड़ी गलती शुरू हुई।
Leatherslade Farm में गिरोह ने नकदी बांटी। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने चोरी की रकम से मोनोपली खेला और वहां खाना-पीना भी किया। लेकिन फार्म छोड़ते समय उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुराग पीछे छोड़ दिए।
एक स्थानीय व्यक्ति को फार्म में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। पुलिस वहां पहुंची तो उसे बड़ी मात्रा में खाना, सोने का सामान, डाक की बोरियां और बैंकनोट से जुड़े सामान मिले। फिर सामने आया वह सुराग जिसने जांच को निर्णायक मोड़ दिया।

पुलिस को घटनास्थल पर मोनोपली बोर्ड और केचप की बोतल पर फिंगरप्रिंट के निशान मिले। इन फिंगरप्रिंट को जांच के दौरान संदिग्धों से जोड़ना शुरू किया। इसी के साथ जांचकर्ताओं को गिरोह के सदस्यों तक पहुंचने का रास्ता मिला।
पुलिस जांच में खुलती गईं परतें
मामले की जांच का नेतृत्व Scotland Yard की Flying Squad और Buckinghamshire Police के अधिकारियों ने किया। समग्र अभियान में Detective Chief Superintendent Jack Slipper की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
जांच के दौरान चोरी की रकम अलग-अलग जगहों से बरामद होने लगी। सरे के डार्किंग वुड्स में लोगों को बड़ी मात्रा में नकदी मिली और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। एक जगह से करीब £100,900 बरामद हुए।
Leatherslade Farm की तलाशी में पुलिस को वाहन, कैंपिंग सामान और दूसरे सबूत मिले। यहां तक कि बाद में एक Caravan से भी करीब £30,000 बरामद किए गए।
पुलिस ने धीरे-धीरे गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन कुछ लोग लंबे समय तक हाथ नहीं आए।
1964 में शुरू हुआ ऐतिहासिक मुकदमा
Great Train Robbery का मुख्य मुकदमा 20 जनवरी 1964 को एल्सबरी असाइज़ (Aylesbury Assizes) में शुरू हुआ।
मामला इतना बड़ा था कि सामान्य अदालत की जगह एल्सबरी रूरल डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के कार्यालयों को विशेष रूप से अदालत में बदला गया। अदालत में बड़ी संख्या में वकील, पत्रकार और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे।
मुकदमे की अध्यक्षता Mr Justice Edmund Davies ने की। यह सुनवाई 51 दिनों तक चली। इसमें लगभग 240 गवाहों ने बयान दिए और 613 साक्ष्य/प्रदर्श पेश किए गए।
ट्रेन ड्राइवर जैक मिल्स ने भी अदालत में घटना के बारे में गवाही दी। डकैती के दौरान लगी चोटों का असर उनके जीवन पर लंबे समय तक रहा और वह फिर सामान्य रूप से काम नहीं कर सके।
जॉन डेली को क्यों मिली राहत?
मुकदमे में एक अहम मोड़ जॉन डेली के मामले में आया। उसके खिलाफ प्रमुख सबूतों में Leatherslade Farm से मिले मोनोपली बोर्ड पर उसके फिंगरप्रिंट शामिल थे। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ये फिंगरप्रिंट इस बात को साबित नहीं करते कि डेली डकैती के समय फार्म में मौजूद था, क्योंकि उसने उस बोर्ड को पहले भी छुआ हो सकता है।
अदालत ने इस तर्क को स्वीकार किया और 11 फरवरी 1964 को डेली के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता माना गया। वह इस मुकदमे से बाहर हो गया।
30-30 साल की सजाएं
मार्च 1964 में जूरी ने अपना फैसला सुनाया। कई आरोपियों को डकैती की साजिश का दोषी पाया गया। गॉर्डन गूडी, चार्ली विल्सन, रॉय जेम्स, जिम हसी, टॉमी विस्बी और बॉब वेल्च को हिंसा के साथ डकैती का भी दोषी पाया गया।
16 अप्रैल 1964 को सजाएं सुनाई गईं। गॉर्डन गूडी, चार्ली विल्सन, रॉय जेम्स, टॉमी विस्बी, बॉब वेल्च, जिम हसी और रॉनी बिग्स को 30-30 साल की सजा मिली।
रोजर कॉर्ड्रे को 20 साल, विलियम बोअल को 24 साल, ब्रायन और लियोनार्ड फील्ड को 25-25 साल और जॉन व्हीटर को तीन साल की सजा मिली।
बाद में अपील में कई फैसले बदले। कॉर्ड्रे और बोअल की सजाएं घटकर 14 साल हुईं, जबकि ब्रायन और लियोनार्ड फील्ड की सजा प्रभावी रूप से पांच-पांच साल रह गई।
जेल से फरार हुआ रॉनी बिग्स
Great Train Robbery का सबसे चर्चित अध्याय मुकदमे के बाद शुरू हुआ। रॉनी बिग्स 1965 में Wandsworth Prison से फरार हो गया। वह बाद में ऑस्ट्रेलिया और फिर ब्राजील पहुंचा और कई दशकों तक ब्रिटेन की पुलिस से बाहर रहा।
वह 2001 में ब्रिटेन वापस आया, जहां उसे फिर गिरफ्तार किया गया। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उसे 2009 में मानवीय आधार पर जेल से रिहा किया गया। 2013 में 84 वर्ष की उम्र में उसकी मृत्यु हो गई।
दूसरी ओर, ब्रूस रेनॉल्ड्स करीब पांच साल तक फरार रहा। 1968 में उसकी गिरफ्तारी हुई और 1969 में उसे 25 साल की सजा मिली।
बस्टर एडवर्ड्स 1966 में स्वेच्छा से ब्रिटेन लौटा और उसे 15 साल की सजा मिली। जेल से जल्दी रिहा होने के बाद उसने वाटरलू स्टेशन (Waterloo Station) के बाहर फूलों की दुकान शुरू की।

इतिहास में क्यों दर्ज है Great Train Robbery?
Great Train Robbery को अक्सर ब्रिटेन की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित डकैतियों में गिना जाता है। उस समय चोरी की रकम अभूतपूर्व थी और पूरी कार्रवाई को बेहद संगठित तरीके से अंजाम दिया गया था।
लेकिन यह कहानी केवल अपराधियों की चतुराई की कहानी नहीं है। इसमें एक घायल ट्रेन ड्राइवर जैक मिल्स भी है, डाक कर्मचारियों का डर भी है और वह लंबी पुलिस जांच भी जिसने आखिरकार गिरोह के अधिकांश सदस्यों को जेल तक पहुंचाया।
विडंबना यह रही कि जिस गिरोह ने रेलवे सिग्नल, ट्रेन की गति और भागने का रास्ता तक बेहद सावधानी से तय किया था, उसकी सबसे बड़ी कमजोरी Leatherslade Farm में छोड़े गए छोटे-छोटे सबूत बने।
मोनोपोली बोर्ड, केचप की बोतल, बैंकनोट के रैपर और पीछे छूटा सामान।इन छोटी गलतियों ने ब्रिटेन की सबसे बड़ी डकैती के अपराधियों तक पुलिस को पहुंचा दिया।
8 अगस्त 1963 की उस घटना को आज पूरे 63 साल हो चुके हैं, लेकिन Great Train Robbery अब भी ब्रिटेन के अपराध इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल है।
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