Tuesday, 22 September 2026
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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: विजय चिंतकायला ने पीएम मोदी को भेंट किया मंगलागिरी शॉल

आंध्र प्रदेश के राज्यसभा सांसद ने प्रधानमंत्री को राज्य के प्रसिद्ध जीआई-टैग वाले हथकरघे की सौगात देकर बुनकरों और आंध्र प्रदेश की समृद्ध वस्त्र विरासत को सम्मान दिया

नई दिल्ली: भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को समर्पित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध मंगलागिरी हथकरघे को देश के सर्वोच्च राजनीतिक मंच पर विशेष पहचान मिली। आंध्र प्रदेश के राज्यसभा सांसद विजय चिंतकायला ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पारंपरिक हाथ से बुना मंगलागिरी शॉल भेंट किया। इस मुलाकात के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के संदेश से भी जुड़ी रही, जिसमें उन्होंने भारत के बुनकरों और कारीगरों को नमन करते हुए हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने हथकरघा क्षेत्र को ग्रामीण सशक्तीकरण, महिला नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री को हाथ से बुना मंगलागिरी शॉल भेंट कर विजय चिंतकायला ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध पारंपरिक बुनाई को देश के नेतृत्व के सामने प्रस्तुत किया।

अपनी विशिष्ट कारीगरी और भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के लिए पहचाना जाने वाला मंगलागिरी हथकरघा उन कुशल कारीगरों की पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने भारत की सदियों पुरानी बुनाई परंपरा को आज तक जीवित रखा है।

यह पहल आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से स्थानीय हथकरघा परंपराओं को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में राज्य सरकार बुनकरों की आर्थिक सुरक्षा, बाजार तक उनकी पहुंच और उनके काम को पहचान दिलाने के लिए विभिन्न पहलों के माध्यम से हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य पारंपरिक बुनाई को संरक्षित करने के साथ-साथ इससे जुड़े कारीगरों की आजीविका को भी मजबूत करना है।

मुलाकात के बाद विजय चिंतकायला ने कहा, “राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को मंगलागिरी हथकरघे का शॉल भेंट करना उन सभी बुनकरों को श्रद्धांजलि थी, जिनकी कारीगरी हमारी विरासत को जीवित रखे हुए है। यह सम्मान आंध्र प्रदेश के कारीगर समुदाय का है।”

यह पहल श्री नारा लोकेश, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और मंगलागिरी से विधायक, की ओर से मंगलागिरी हथकरघे को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी रेखांकित करती है। मंगलागिरी की बुनाई परंपरा और बुनकर परिवारों के समर्थन के लिए नेथन्नाकु सेवा योजना जैसी पहलों के तहत हथकरघा बुनकर परिवारों को सालाना ₹25,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा बुनकरों के लिए एक समर्पित स्कूल की स्थापना और क्षेत्र की समृद्ध बुनाई विरासत को संरक्षित एवं बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर जब देशभर में बुनकरों और कारीगरों की मेहनत को सम्मान दिया जा रहा था, तब मंगलागिरी से आया यह पारंपरिक शॉल केवल एक औपचारिक उपहार तक सीमित नहीं रहा। यह उन हजारों कारीगरों के हुनर, मेहनत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना, जिनके हाथों से तैयार हर हथकरघा वस्त्र भारत की जीवंत विरासत की कहानी कहता है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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