ई-रिक्शा चलाने और सब्जियां बेचने से लेकर Commonwealth Games के Podium तक, Jhandu Kumar का सफर संघर्ष और सफलता की मिसाल है। जानिए कैसे उन्होंने भारत को पहला Bronze Medal दिलाया।
ग्लासगो: सुबह से शाम तक सड़कों पर ई-रिक्शा चलाने वाला एक आम भारतीय, और फिर उसी मेहनत के दम पर Commonwealth Games के मंच पर देश के लिए इतिहास रचने वाला खिलाड़ी। झंडू कुमार की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों में खेल का सपना देखना और फिर दुनिया के बड़े मंच पर भारत को पहला पदक जिताना बिल्कुल भी आसान नहीं था। लेकिन 2026 Commonwealth Games में पैरा पावरलिफ्टिंग के इस भारतीय खिलाड़ी ने अपनी ताकत से सिर्फ वजन नहीं उठाया, बल्कि उन लाखों युवाओं की उम्मीदों को भी नई ऊंचाई दी, जिनके सपने अक्सर संसाधनों की कमी के आगे दब जाते हैं।
पुरुषों के Heavyweight Para Powerlifting में Bronze Medal जीतने वाले Jhandu Kumar ने 190 किलोग्राम का सफल लिफ्ट दर्ज किया और 130.9 अंक के साथ पोडियम पर जगह बनाई।

यह पदक ऐसे समय आया है जब भारतीय दल कई खेलों में मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। Boxing में Lovlina Borgohain ने Women’s 75kg वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर भारत के लिए कम से कम Bronze Medal पक्का कर दिया है। वहीं Jadumani Singh ने भी अपने अभियान की शानदार शुरुआत की है।
Lawn Bowls में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआती मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। यानी Glasgow Games के शुरुआती दौर में भारत का प्रदर्शन अभी तक मिश्रित जरूर रहा है, लेकिन कई स्पर्धाओं में पदक की उम्मीदें मजबूत बनी हुई हैं।
झंडू कुमार ने खोला भारत का मेडल खाता
भारत को Commonwealth Games 2026 का पहला पदक Men’s Heavyweight Para Powerlifting से मिला। Jhandu Kumar ने अपने पहले प्रयास में 181kg वजन उठाया और दूसरे प्रयास में 190kg का सफल लिफ्ट दर्ज किया।
उनके प्रदर्शन से उन्हें 130.9 अंक मिले, जो Bronze Medal के लिए पर्याप्त रहे। वह 196kg के प्रयास में सफल नहीं हो सके, जिसके बाद उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

इस स्पर्धा में England के Matt Harding ने सिल्वर और और Nigeria के Rilwan Idris ने गोल्ड मेडल जीता। झंडू कुमार का Bronze भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इसके साथ ही देश ने Glasgow 2026 में अपना पहला पदक हासिल किया। उनके साथी भारतीय पैरा पावरलिफ्टर सुधीर छठे स्थान पर रहे।
Jhandu की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह केवल एक खेल पदक नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता की कहानी है।
ई-रिक्शा चलाने से Commonwealth Podium तक का सफर
Jhandu Kumar की कहानी उन खिलाड़ियों की याद दिलाती है, जिनके लिए खेल तक पहुंचना किसी कठिन रास्ते से कम नहीं होता। बिहार से आने वाले Jhandu ने आर्थिक परेशानियों के बीच अपने परिवार की मदद करने के लिए ई-रिक्शा चलाया और सब्जियां बेचने जैसे काम भी किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, उनके पिता सड़क किनारे सब्जियां बेचते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ऐसे हालात के बावजूद Jhandu ने खेल को नहीं छोड़ा और धीरे-धीरे पैरा पावरलिफ्टिंग में अपनी पहचान बनाई।
उनकी कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस व्यक्ति ने कभी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए ई-रिक्शा चलाया, वही अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

Glasgow में Bronze Medal जीतने के बाद Jhandu ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह उड़ रहे हों।
पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उनके शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का पदक खाता खोला है।
प्रधानमंत्री ने उनके प्रदर्शन को देश के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि उनकी यह उपलब्धि उनकी असाधारण ताकत, अटूट दृढ़ संकल्प और वर्षों की अनुशासित मेहनत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि Jhandu Kumar ने तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन किया और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। Jhandu की सफलता देश के अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा है। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल भारत की पदक तालिका की शुरुआत की, बल्कि देश के खिलाड़ियों को बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए नई ऊर्जा भी दी है।
पदक के पीछे छिपी है संघर्ष की कहानी
Jhandu Kumar की सफलता को केवल उनके 190kg के लिफ्ट तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उनकी यात्रा बताती है कि भारत में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी ऐसे परिवारों से आते हैं, जहां खेल के लिए संसाधन जुटाना भी एक चुनौती होती है।
ऐसे खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना केवल अभ्यास और प्रतिभा का सवाल नहीं होता। उन्हें आर्थिक कठिनाइयों, सीमित सुविधाओं और सामाजिक परिस्थितियों से भी लड़ना पड़ता है।
Jhandu ने इन चुनौतियों के बावजूद अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर किया और अब Commonwealth Games के मंच पर भारत को पदक दिलाया है।
उनकी उपलब्धि का एक बड़ा संदेश यह भी है कि Para Sports को लेकर भारत में धीरे-धीरे बढ़ती जागरूकता का असर दिखाई दे रहा है। पैरा एथलीट अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार अपनी जगह बना रहे हैं और उनकी उपलब्धियां देश में खेलों की एक नई तस्वीर पेश कर रही हैं।
Commonwealth Games 2026 में भारत अब तक भारत का प्रदर्शन
Glasgow में Commonwealth Games 2026 का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक हो रहा है। प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों में भारतीय दल ने कई खेलों में हिस्सा लिया है।
25 जुलाई तक भारत के खाते में Jhandu Kumar का Bronze Medal आ चुका है, जबकि Boxing में Lovlina Borgohain का कम से कम एक पदक सुनिश्चित हो चुका है।
भारत की शुरुआत हालांकि हर खेल में एक जैसी नहीं रही। Swimming में Srihari Nataraj ने प्रतिस्पर्धा की और सेमीफाइनल तक पहुंचे, लेकिन फाइनल में पदक की दौड़ से बाहर हो गए। Para Swimming में R.V.V.B.K. Budigina ने भी पदक के बेहद करीब पहुंचकर चौथा स्थान हासिल किया।
इन नतीजों से साफ है कि भारत के लिए शुरुआती दिन कुछ मौकों पर निराशाजनक रहे, लेकिन खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में मजबूत प्रदर्शन भी किया है।
Boxing में Lovlina Borgohain ने बढ़ाई उम्मीद
भारत की पदक उम्मीदों को सबसे बड़ा सहारा Boxing से मिला है। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने महिला 75 कि.ग्रा वर्ग में सीधे सेमीफाइनल में जगह बनाई।
इसका मतलब है कि वह अब कम से कम Bronze Medal सुनिश्चित कर चुकी हैं। उनके लिए अब अगला लक्ष्य पदक का रंग बदलकर Final तक पहुंचना होगा।
लवलीना के अलावा जादुमणि सिंह ने भी पुरुषों के 55 कि.ग्रा वर्ग में अपने शुरुआती मुकाबले में जीत दर्ज कर Round of 16 में प्रवेश किया। भारतीय Boxing दल से इस बार काफी उम्मीदें हैं और आने वाले मुकाबलों में देश के मेडल खाते में और इजाफा हो सकता है।

Boxing लंबे समय से Commonwealth Games में भारत के लिए पदक दिलाने वाले प्रमुख खेलों में शामिल रहा है। Glasgow में भी भारतीय मुक्केबाजों से यही उम्मीद की जा रही है कि वे शुरुआती दौर की अच्छी शुरुआत को पदकों में बदलेंगे।
Lawn Bowls में भी भारतीय खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन
भारत के लिए Lawn Bowls में भी शुरुआती मुकाबले सकारात्मक रहे हैं। Women’s Pairs में Rupa Rani Tirkey और Pinki Singh की जोड़ी ने South Africa के खिलाफ जीत दर्ज की और Group B में अपनी स्थिति मजबूत की। यह भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण शुरुआत रही।

वहीं Men’s Singles में Putul Sonowal ने भी शुरुआती मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया और अपन विजयी क्रम को आगे बढ़ाया। Lawn Bowls भारत के लिए हमेशा सबसे चर्चित खेलों में नहीं रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। Glasgow में भी टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

Swimming में चुनौती, लेकिन उम्मीद बरकरार
Swimming में भारत का प्रदर्शन शुरुआती दौर में पदक तक नहीं पहुंच सका। श्रीहरि नटराज ने अपनी स्पर्धा में आगे बढ़ने की कोशिश की और सेमीफाइनल तक पहुंचे, लेकिन फा में पदक हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय Swimming के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि Commonwealth Games जैसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करना खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देता है।
Para Swimming में भी भारत पदक के करीब पहुंचा, लेकिन चौथे स्थान पर रहने के कारण Podium Finish से चूक गया। ऐसे परिणाम खिलाड़ियों के लिए निराशाजनक जरूर होते हैं, लेकिन यह भी दिखाते हैं कि भारतीय दल कुछ स्पर्धाओं में पदक की दौड़ के बेहद करीब है।
आगे भारत से क्या उम्मीद?
भारत के लिए अब चुनौती शुरुआती पदकों को एक मजबूत Medal Haul में बदलने की है। जिन खेलों में खिलाड़ी Quarterfinal और Semifinal तक पहुंच रहे हैं, वहां उन्हें Podium Finish में बदलना होगा। साथ ही, जिन खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में हार मिली है, उनके प्रदर्शन से भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सबक मिलेंगे।
Glasgow में Jhandu Kumar की Bronze Medal ने भारतीय अभियान को वह शुरुआत दे दी है, जिसका हर खेल प्रेमी इंतजार कर रहा था। एक समय ई-रिक्शा चलाकर परिवार का सहारा बनने वाला यह खिलाड़ी अब Commonwealth Games के इतिहास में भारत के लिए एक यादगार नाम बन चुका है।
उनकी कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा शायद यही है कि यह जीत केवल एक मेडल की कहानी नहीं है। यह उस जिद की कहानी है, जो मुश्किल हालात में भी सपने देखना नहीं छोड़ती।
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