लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड केवल इंग्लैंड का मैदान नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की कई सबसे बड़ी जीतों का भी गवाह है। जानिए 1983 से 2026 तक भारत के सात सबसे ऐतिहासिक और यादगार पल।
लंदन: जब भी क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान Lord’s Cricket Ground, London का नाम लिया जाता है, तो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की आंखों के सामने कई ऐतिहासिक तस्वीरें एक साथ तैरने लगती हैं। कभी कपिल देव की टीम विश्व कप उठाते हुए दिखाई देती है, कभी सौरव गांगुली लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराते नजर आते हैं, तो कभी मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह असंभव लग रहे लक्ष्य का पीछा करते हुए इतिहास रचते दिखाई देते हैं।
अब इस सूची में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड को 270 रन से हराकर इतिहास रच दिया। यह लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम की सबसे बड़ी और सबसे यादगार जीतों में गिनी जा रही है। कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुआई में टीम ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि लॉर्ड्स केवल भारतीय पुरुष टीम के लिए ही नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के लिए भी यादगार बन चुका है।
पिछले चार दशकों में भारत ने इस ऐतिहासिक मैदान पर कई ऐसे पल दिए हैं, जिन्होंने न केवल भारतीय क्रिकेट बल्कि विश्व क्रिकेट के इतिहास में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। आइए जानते हैं लॉर्ड्स में भारत के सात सबसे ऐतिहासिक और जादुई पलों की कहानी।
1) जब कपिल देव की टीम ने जीता विश्व कप (1983)
भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ 25 जून 1983 को आया। स्थान था Lord’s Cricket Ground, London, जहां भारत का मुकाबला लगातार दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज से था।
उस दौर में किसी खेल विशेषज्ञ ने भारत को खिताब का दावेदार नहीं माना था। बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम केवल 183 रन ही बना सकी। ऐसा लग रहा था कि क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स, गॉर्डन ग्रीनिज और डेसमंड हेयन्स जैसे बल्लेबाजों से सजी वेस्टइंडीज यह लक्ष्य आसानी से हासिल कर लेगी।
लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने असंभव को संभव कर दिखाया। मैच का सबसे यादगार पल तब आया जब कपिल देव ने विवियन रिचर्ड्स का लंबा कैच पीछे भागते हुए पकड़ा। यह कैच आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे महान कैचों में गिना जाता है।
मोहिंदर अमरनाथ (3 विकेट) और मदन लाल (3 विकेट) की शानदार गेंदबाजी के दम पर भारत ने वेस्टइंडीज को 140 रन पर समेट दिया और 43 रन से जीत दर्ज कर पहली बार विश्व कप चैंपियन बना।
यही वह जीत थी जिसने भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। आज जिस भारतीय क्रिकेट की आर्थिक और वैश्विक ताकत की चर्चा होती है, उसकी नींव काफी हद तक 1983 की इसी जीत ने रखी।

2) लॉर्ड्स में भारत की पहली टेस्ट जीत (1986)
विश्व कप जीतने के तीन साल बाद भारतीय टीम ने लॉर्ड्स में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
5-10 जून 1986 के बीच खेले गए टेस्ट मैच में भारत ने पहली बार लॉर्ड्स में इंग्लैंड को टेस्ट मुकाबले में हराया।
इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे दिलीप वेंगसरकर, जिन्होंने 126 रनों की शानदार पारी खेली। यह लॉर्ड्स के मैदान में उनका लगातार तीसरा टेस्ट शतक था। इसी वजह से उन्हें बाद में “Lord of Lord’s” भी कहा जाने लगा।
दूसरी ओर कप्तान कपिल देव ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में अहम योगदान दिया। भारत ने इंग्लैंड को 5 विकेट से हराकर पहली बार Lord’s में जीतने का गौरव हासिल किया।
यह जीत केवल एक मैच की सफलता नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि भारत अब विदेशी परिस्थितियों में भी मजबूत टीम बन चुका है।

3) नेटवेस्ट सीरीज फाइनल (2002)
13 जुलाई 2002 को लॉर्ड्स में खेला गया नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार वनडे मुकाबलों में गिना जाता है। इंग्लैंड ने मार्कस ट्रेस्कोथिक (109) और कप्तान नासिर हुसैन (115) की शतकीय पारियों की बदौलत 325/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया। उस समय यह लक्ष्य लगभग असंभव माना जा रहा था।
जवाब में भारत की शुरुआत शानदार रही। वीरेंद्र सहवाग और सौरव गांगुली ने पहले विकेट के लिए 106 रन जोड़े, लेकिन इसके बाद टीम ने महज 146 रन पर पांच विकेट गंवा दिए। ऐसा लग रहा था कि मैच पूरी तरह इंग्लैंड की पकड़ में है।
यहीं से युवराज सिंह (69) और मोहम्मद कैफ (नाबाद 87) ने भारतीय पारी को नई जान दी। दोनों ने छठे विकेट के लिए 121 रन जोड़कर मैच का रुख पलट दिया। आखिरकार भारत ने दो विकेट शेष रहते हुए आखिरी ओवर में 326 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया और नेटवेस्ट ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
लेकिन इस जीत से भी ज्यादा यादगार बना कप्तान सौरव गांगुली का जश्न। लॉर्ड्स की प्रतिष्ठित बालकनी में खड़े होकर उन्होंने अपनी टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराई। यह दृश्य भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित तस्वीरों में शामिल हो गया। गांगुली का यह अंदाज इंग्लैंड के एंड्रयू फ्लिंटॉफ द्वारा मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टी-शर्ट उतारकर जश्न मनाने का जवाब भी माना गया। आज भी यह जीत भारतीय क्रिकेट के आत्मविश्वास और आक्रामक नए दौर की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

4) अजित अगरकर का पहला और इकलौता टेस्ट शतक (2002)
जब भी भारतीय क्रिकेट में अजित अगरकर का नाम लिया जाता है, सबसे पहले उनकी तेज गेंदबाजी याद आती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपना पहला और एकमात्र टेस्ट शतक भी क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर बनाया था।
साल 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में भारत की शुरुआत बेहद खराब रही थी। शीर्ष क्रम जल्दी आउट हो गया था और टीम मुश्किल में थी। ऐसे समय पर नंबर आठ पर बल्लेबाजी करने उतरे अगरकर ने बेहद संयम और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की।
उन्होंने 190 गेंदों में नाबाद 109 रन बनाए, जिसमें 16 चौके शामिल थे। यह उनके टेस्ट करियर का पहला और एकमात्र शतक रहा। खास बात यह थी कि इससे पहले अगरकर लगातार कई पारियों में बिना खाता खोले आउट हुए थे, इसलिए लॉर्ड्स पर आया यह शतक उनके करियर का सबसे बड़ा बल्लेबाजी क्षण बन गया।
हालांकि भारत वह मैच जीत नहीं सका और इंग्लैंड ने मुकाबला अपने नाम किया, लेकिन अगरकर की नाबाद शतकीय पारी आज भी लॉर्ड्स के सम्मानित ऑनर्स बोर्ड (Honours Board) पर दर्ज है। वह लॉर्ड्स में टेस्ट शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं। एक गेंदबाज के रूप में पहचान बनाने वाले अगरकर के लिए यह पारी उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

5) 28 साल बाद धोनी की कप्तानी में भारत की ऐतिहासिक टेस्ट जीत (2014)
साल 2014 का लॉर्ड्स टेस्ट भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार मुकाबलों में गिना जाता है। एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने इंग्लैंड को 95 रन से हराकर 28 साल बाद लॉर्ड्स में टेस्ट मैच जीता था।
इससे पहले भारत ने 1986 में कपिल देव की कप्तानी में इस मैदान पर पहली और आखिरी टेस्ट जीत दर्ज की थी।
इस जीत की नींव पहली पारी में अजिंक्य रहाणे के शानदार 103 रन और भुवनेश्वर कुमार के उपयोगी 36 रन ने रखी। दूसरी पारी में रविंद्र जडेजा के अहम 68 रन ने भारत को चुनौतीपूर्ण लक्ष्य तक पहुंचाया।
मैच का सबसे यादगार पल पांचवें दिन आता है, जब इशांत शर्मा ने शॉर्ट-पिच गेंदबाजी से इंग्लैंड के बल्लेबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया। उन्होंने 74 रन देकर 7 विकेट झटके और इंग्लैंड की दूसरी पारी 223 रन पर समेट दी। भारत ने 95 रन से मुकाबला जीतकर इतिहास रच दिया।
यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि विदेशी धरती पर भारतीय टीम लगातार आलोचनाओं का सामना कर रही थी, लेकिन धोनी की कप्तानी में लॉर्ड्स पर मिली इस जीत ने टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी। इशांत शर्मा के सात विकेट आज भी लॉर्ड्स पर किसी भारतीय तेज गेंदबाज के सबसे यादगार स्पेल में गिने जाते हैं।

6) शानदार गेंदबाज़ी ने जिताया टेस्ट (2021)
भारत और इंग्लैंड के बीच अगस्त 2021 में खेली गई टेस्ट सीरीज़ का दूसरा मुकाबला लॉर्ड्स में हुआ। यह मैच शुरुआत से ही बेहद रोमांचक रहा। पहली पारी में कप्तान विराट कोहली की टीम ने केएल राहुल (129) के शानदार शतक और रोहित शर्मा के अर्धशतक की बदौलत 364 रन बनाए।
जवाब में इंग्लैंड ने जो रूट के शतक (180*) की मदद से 391 रन बनाकर 27 रन की बढ़त हासिल कर ली।
दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाज़ी लड़खड़ा गई, लेकिन मैच का सबसे यादगार पल आखिरी दिन देखने को मिला। जब भारत 209/8 पर संघर्ष कर रहा था, तब जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी ने नौवें विकेट के लिए नाबाद 89 रन जोड़कर इंग्लैंड की उम्मीदों को झटका दे दिया।
शमी ने 56* और बुमराह ने 34* रन बनाए। इस साझेदारी ने भारत को 298/8 पर पारी घोषित करने का आत्मविश्वास दिया और इंग्लैंड के सामने 272 रन का लक्ष्य रखा।
इसके बाद भारतीय गेंदबाज़ों ने आक्रामक अंदाज़ में गेंदबाज़ी की। मोहम्मद सिराज ने चार विकेट लिए, जसप्रीत बुमराह ने तीन और इशांत शर्मा ने दो विकेट हासिल किए। पूरी इंग्लैंड टीम केवल 120 रन पर सिमट गई और भारत ने 151 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
यह जीत कई कारणों से खास रही। विदेशी सरज़मीं पर भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों के दबदबे का यह बड़ा उदाहरण था। मोहम्मद सिराज ने जिस आत्मविश्वास के साथ इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों को परेशान किया, उसने उन्हें भारतीय क्रिकेट के नए मैच विनर के रूप में स्थापित कर दिया। लॉर्ड्स के मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों के जश्न की तस्वीरें आज भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार हैं।

7) लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम की सबसे बड़ी जीत (2026)
जुलाई 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम पहली बार लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में टेस्ट क्रिकेट खेल रही थी। मैच में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया ने एक नया अध्याय लिखते हुए इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में भारत ने 270 रन से जीत दर्ज की।
भारत ने पहली पारी में सुलझी हुई बल्लेबाजी करते हुए 285 रन बनाए। इसमें सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने शानदार 83 रनों की पारी खेली। जवाब में इंग्लैंड की टीम महज 170 रनों पर ही ऑल आउट हो गई। भारतीय गेंदबाज क्रांति गौड़ ने पारी में 5 विकेट लेते हुए इंग्लैंड के पूरे बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ तोड़ दी।
भारत ने तीसरी पारी में भी कप्तान हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में मजबूत बल्लेबाज़ी की। सलामी बल्लेबाज़ यास्तिका भाटिया ने शानदार शतक (113 रन) की मदद से भारत ने इंग्लैंड के सामने 456 रनों का विशाल लक्ष्य रखा।

लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम चौथी पारी में एक बार फिर से भारतीय स्पिन और तेज़ गेंदबाज़ों के सामने टिक नहीं सकी। भारतीय गेंदबाज़ों ने लगातार विकेट लेकर मेज़बान टीम को बड़ी हार के लिए मजबूर कर दिया। इंग्लैंड इस पारी में 186 रनों पर ऑल आउट हो गई। इसके साथ ही पहली बार लॉर्ड्स में खेले गए मुकाबले में भारत को 270 रनों की बड़ी जात हासिल हुई।
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