मध्य पूर्व संकट के बीच भारत की रणनीतिक चाल। चीन जा रहा रूसी टैंकर मंगलौर की ओर मुड़ा, बढ़ा कच्चे तेल का आयात और मजबूत हुई ऊर्जा सुरक्षा।
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति पर पड़े असर के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण जहां वैश्विक तेल बाजार दबाव में है और कई देश संकट का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत ने मौके का फायदा उठाते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
ताजा घटनाक्रम में एक रूसी तेल टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहा था अचानक रास्ता बदलकर भारत की ओर मुड़ गया है। शिपिंग डेटा के मुताबिक ‘Aqua Titan’ नाम का यह टैंकर अब न्यू मंगलौर बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है और तय समय के अनुसार आने वाले दिनों में भारत पहुंच सकता है। इस जहाज में रूस के बाल्टिक क्षेत्र से लोड किया गया कच्चा तेल है।
रणनीति के पीछे क्या है वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव यूं ही नहीं हुआ है। हाल ही में अमेरिका की ओर से भारत को सीमित अवधि के लिए रूसी तेल खरीदने में छूट दी गई थी। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी दिखाते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार से बड़े पैमाने पर रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय कंपनियां अब फिर से रूसी तेल को प्राथमिकता दे रही हैं, क्योंकि यह मौजूदा हालात में अपेक्षाकृत सस्ता और उपलब्ध विकल्प बनकर सामने आया है। इससे पहले कुछ समय तक भारत ने आयात में कमी की थी, जिसके चलते कई कार्गो चीन की ओर शिफ्ट हो गए थे। अब तस्वीर बदलती दिख रही है।
कई टैंकर बदल रहे रास्ता
केवल एक टैंकर ही नहीं, बल्कि कई अन्य जहाज भी अब अपना रूट बदल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ और रूसी और कजाकिस्तान के टैंकर, जो पहले चीन की ओर बढ़ रहे थे, अब भारत के बंदरगाहों की तरफ रुख कर चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में भारत ने बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की है, जिससे आने वाले समय में आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
होर्मुज संकट के बीच राहत
गौरतलब है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसमें से काफी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। मौजूदा हालात में इस रूट पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
ऐसे में रूस से बढ़ता आयात भारत के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित रास्ता साबित हो रहा है। हाल ही में देश के कुछ गैस टैंकर भी संवेदनशील समुद्री रास्तों से सुरक्षित पहुंचने में सफल रहे हैं, जो भारत की तैयारियों को दर्शाता है।
रूस संग बढ़ी साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करेगा। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत का यह कदम न सिर्फ उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी भूमिका को भी बढ़ा रहा है।
हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, लेकिन फिर भी यह विकल्प कई अन्य स्रोतों की तुलना में ज्यादा व्यावहारिक माना जा रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल, भारत ने जिस तरह से बदलते हालात में तेजी से रणनीति अपनाई है, वह उसकी दूरदर्शिता को दिखाता है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो इस तरह के फैसले देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
चीन की ओर जा रहा टैंकर भारत की तरफ मुड़ना इस बात का संकेत है कि मौजूदा संकट के बीच भी भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से फैसले ले रहा है और वैश्विक ऊर्जा समीकरण में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।
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