एमएसएमई मंत्रालय की ₹13,000 करोड़ की पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत तीन दिवसीय मेले में 50 स्टालों पर पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन; 8 मार्च तक चलेगा आयोजन
हिसार | 6 मार्च 2026
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के तहत संचालित प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों के लिए तीन दिवसीय प्रदर्शनी-सह-व्यापार मेले की शुरुआत शुक्रवार को अग्रसेन भवन, ग्रीन स्क्वायर मार्केट के निकट, हिसार में हुई। यह प्रदर्शनी 6 से 8 मार्च 2026 तक आयोजित की जा रही है जिसके माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन व्यापारी कल्याण बोर्ड, हिसार के वाइस चेयरमैन श्रीनिवास गोयल ने किया। इस अवसर पर एमएसएमई-विकास कार्यालय, भिवानी की सहायक निदेशक रचना त्रिपाठी और एमएसएमई-विकास कार्यालय, करनाल के अपर विकास आयुक्त संजीव चावला सहित अन्य गणमान्य अतिथि और कारीगर भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में श्रीनिवास गोयल ने कहा कि भारत के कारीगर और शिल्पकार अपनी कला और उत्पादों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं और साथ ही आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार स्वयं को ढाल भी रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की सराहना की।

₹13,000 करोड़ की योजना से पारंपरिक कारीगरों को मजबूती
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाना है। इसके तहत कौशल उन्नयन, टूलकिट सहायता, ऋण सुविधा और विपणन सहायता जैसे कई उपाय किए जा रहे हैं। भारत सरकार ने इस योजना के लिए वर्ष 2023–24 से 2027–28 की अवधि के लिए लगभग ₹13,000 करोड़ का प्रावधान किया है।
इस अवसर पर करनाल के अपर विकास आयुक्त, संजीव चावला ने कहा कि इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को एक मजबूत बाजार मंच उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने उत्पादों को बिना बिचौलियों के सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल पारंपरिक कौशल को व्यवसाय से जोड़ने के साथ-साथ कारीगरों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होगी।
50 स्टालों पर पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के 50 स्टाल लगाए गए हैं। इसमें कुम्हार, दर्जी, मोची, राजमिस्त्री, सुनार और मालाकार सहित गुड़िया, चटाई, टोकरी और खिलौने बनाने वाले शिल्पकार अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनी के दौरान कारीगरों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि वे स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक बाजार तक पहुंच बना सकें।
इस अवसर पर साधु राम बंसल, रविंद्र जांगड़ा और प्रदीप शर्मा भी उपस्थित रहे।
इस प्रदर्शनी का समन्वय एमएसएमई-विकास कार्यालय, भिवानी द्वारा किया जा रहा है, जो पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पारंपरिक कारीगरों को व्यापक बाजार से जोड़ने के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।
प्रदर्शनी में भाग लेने वाले सभी लाभार्थियों को सरकार की ओर से निःशुल्क स्टाल उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही प्रतिभागियों के लिए चाय और भोजन की व्यवस्था भी निःशुल्क की गई है।

यह तीन दिवसीय प्रदर्शनी 8 मार्च तक जारी रहेगी, जिसमें आगंतुकों को विभिन्न क्षेत्रों के कारीगरों के हस्तनिर्मित उत्पादों को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। यह मेला पारंपरिक कारीगरी को प्रदर्शित करने के साथ-साथ कारीगरों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास भी है।
एडीकेमेकर्स (ADKMAKERS) फर्म के निदेशक श्री राहुल धींगरा, जो इस आयोजन की कार्यान्वयन एजेंसी है, ने बताया कि कारीगरों को संभावित व्यावसायिक खरीदारों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपणन, ब्रांडिंग और लेबलिंग से संबंधित अलग प्रशिक्षण भी आयोजित किया जा रहा है, ताकि उत्पादों में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। कारीगरों के उत्पादों का एक विस्तृत कैटलॉग भी तैयार किया जा रहा है, जिसे विभिन्न गैलरियों और लाइफस्टाइल
