Friday, 30 October 2026
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इजरायली जेलों में करीब 370 फिलिस्तीनी बच्चे बंद? रिपोर्ट ने उठाए कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

इजरायल की जेलों में करीब 370 फिलिस्तीनी बच्चों की हिरासत की रिपोर्ट सामने आई है। जानिए बच्चों की गिरफ्तारी, प्रशासनिक हिरासत और कानूनी प्रक्रिया पर क्यों उठे सवाल।

रामल्लाह/यरुशलम: इजरायली जेलों में करीब 370 फिलिस्तीनी बच्चों के बंद होने की रिपोर्ट सामने आई है। फिलिस्तीनी सेंटर फॉर प्रिजनर्स एडवोकेसी की 27 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत तक करीब 370 फिलिस्तीनी बच्चे इजरायली जेलों में हिरासत में थे। इनमें बच्चों की बड़ी संख्या मेगिद्दो और ओफर जेलों में बताई जा रही है। ये बच्चे इजरायल की हिरासत में मौजूद 9,400 से अधिक फिलिस्तीनी कैदियों और बंदियों का हिस्सा हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में ही वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम से 276 बच्चों को हिरासत में लिए जाने के मामले दर्ज किए गए।
हालांकि, यह आंकड़ा फिलिस्तीनी कैदी अधिकार संगठन द्वारा संकलित है और इजरायली जेलों में बंद बच्चों की संख्या को लेकर स्वतंत्र स्रोतों के आंकड़े अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, इजरायली मानवाधिकार संगठन B’Tselem ने दिसंबर 2025 के अंत में इजरायली जेल सेवा के आंकड़ों के आधार पर 351 फिलिस्तीनी नाबालिगों को हिरासत या जेल में दर्ज किया था।

छह महीने में 276 बच्चों की हिरासत

नई रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा 2026 के शुरुआती छह महीनों का है। फिलिस्तीनी कैदी संगठनों के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच वेस्ट बैंक और यरुशलम में 276 बच्चों की हिरासत दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में कुल 25,000 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं।

मेगिद्दो और ओफर जेल में बड़ी संख्या

रिपोर्ट के मुताबिक, हिरासत में मौजूद अधिकांश फिलिस्तीनी बच्चों को मेगिद्दो और ओफर जेलों में रखा गया है। दोनों जेलें फिलिस्तीनी कैदियों और नाबालिग बंदियों से जुड़े मामलों में लंबे समय से चर्चा में रही हैं।

रिपोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि बच्चों को हिरासत में रखने की प्रक्रिया को उनकी उम्र और विशेष जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त सुरक्षा के साथ संचालित किया जाना चाहिए।

बच्चों के मामले में गिरफ्तारी केवल कानूनी प्रक्रिया का विषय नहीं है। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य, परिवार से संबंध और सामाजिक विकास पर पड़ सकता है।

प्रशासनिक हिरासत भी बड़ा मुद्दा

रिपोर्ट में Administrative Detention यानी प्रशासनिक हिरासत को भी प्रमुख चिंता बताया गया है। इस व्यवस्था के तहत किसी व्यक्ति को औपचारिक आरोप या मुकदमे के बिना भी हिरासत में रखा जा सकता है और कुछ परिस्थितियों में हिरासत की अवधि बढ़ाई जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत तक प्रशासनिक हिरासत में रखे गए फिलिस्तीनी बच्चों की संख्या 180 तक पहुंच गई थी।
रिपोर्ट इसे पिछले वर्षों की तुलना में असामान्य रूप से ऊंचा आंकड़ा बताती है।

इस व्यवस्था को लेकर विवाद इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हिरासत में लिए गए व्यक्ति और उसके परिवार को उन सभी सबूतों की पूरी जानकारी नहीं मिल सकती जिनके आधार पर प्रशासनिक हिरासत का आदेश जारी किया गया है। मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से इस व्यवस्था में पारदर्शिता और न्यायिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।

आधी रात या सुबह शुरू होती है कई बच्चों की हिरासत

फिलिस्तीनी सेंटर फॉर प्रिजनर्स एडवोकेसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बच्चों के लिए हिरासत की शुरुआत घर पर रात या सुबह होने वाली छापेमारी से होती है।

रिपोर्ट में दर्ज पूर्व बंदियों की गवाही के आधार पर कहा गया है कि कुछ बच्चों को उनके माता-पिता और भाई-बहनों के सामने घर से ले जाया गया। रिपोर्ट में बच्चों के हाथ बांधने और आंखों पर पट्टी लगाने के दावों का भी उल्लेख है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पूर्व बाल बंदियों ने गिरफ्तारी और स्थानांतरण के दौरान मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और लंबे समय तक बंधे रखे जाने की शिकायत की है। कुछ ने पूछताछ शुरू होने से पहले भोजन, पानी या शौचालय की सुविधा नहीं मिलने की बात भी बताई।

पूछताछ के दौरान मनोवैज्ञानिक दबाव का आरोप

रिपोर्ट में हिरासत के बाद होने की पूछताछ को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि कुछ बच्चों ने लंबे समय तक पूछताछ, अलगाव, नींद से वंचित रखने और मनोवैज्ञानिक दबाव की शिकायत की।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि पूछताछ के दौरान उनके परिवार को लेकर मौजूद डर और चिंता का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया गया।

13, 14 या 15 साल की उम्र में किसी बच्चे का अपने माता-पिता से अचानक अलग होना और किसी अनजान स्थान पर ले जाया जाना अपने आप में गंभीर मानसिक आघात पैदा कर सकता है। यही कारण है कि बाल बंदियों की हिरासत और पूछताछ के दौरान विशेष सुरक्षा की मांग की जाती रही है।

जेल के अंदर भोजन, स्वास्थ्य पर उठते सवाल

रिपोर्ट में जेलों की परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें भीड़भाड़, पर्याप्त भोजन की कमी, कपड़ों और स्वच्छता सामग्री की कमी तथा परिवार से मिलने पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।

बीमार या घायल बच्चों के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा सहायता में देरी, दवाओं की कमी या पर्याप्त पोषण न मिलने से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ सकती है।

रिपोर्ट ने पानी और स्वच्छता संबंधी समस्याओं को भी रेखांकित किया है। उसके अनुसार, खराब स्वच्छता और भीड़भाड़ से त्वचा संबंधी तथा संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी इजरायली हिरासत प्रणाली में फिलिस्तीनी बंदियों की परिस्थितियों को लेकर आरोप लगाए हैं। UNICEF ने भी वर्षों से इजरायली सैन्य हिरासत प्रणाली के संपर्क में आने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की समीक्षा और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया है।

गाजा से हिरासत में लिए गए बच्चों की जानकारी सबसे कम

रिपोर्ट का एक अहम हिस्सा गाजा के बच्चों से जुड़ा है। रिपोर्ट कहती है कि इन दस्तावेजों गाजा से हिरासत में लिए गए बच्चों के मामले सबसे कम हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान गाजा से हिरासत में लिए गए सभी बच्चों की पूरी और स्वतंत्र रूप से सत्यापित सूची उपलब्ध नहीं है। खासकर इजरायली सैन्य शिविरों में रखे गए बच्चों की संख्या और उनके ठिकाने की पूरी जानकारी हासिल करना मुश्किल है।

इस वजह से 370 का आंकड़ा भी पूरी तस्वीर नहीं हो सकता। यह आंकड़ा मुख्य रूप से उपलब्ध और संकलित जानकारी पर आधारित है, जबकि कुछ बच्चों के बारे में जानकारी परिवारों या मानवाधिकार संगठनों तक पहुंच ही नहीं पाती।

जेल से बाहर आने के बाद भी हिरासत का असर

रिपोर्ट के मुताबिक, किसी बच्चे की रिहाई के साथ हिरासत का असर खत्म नहीं हो जाता। पूर्व बाल बंदियों से जुड़ी रिपोर्टों में डर, नींद की समस्या, बुरे सपने, बेचैनी, सामाजिक दूरी और सुरक्षा की भावना खत्म होने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है।

कुछ बच्चों के लिए अपने अनुभवों के बारे में परिवार या दोस्तों से बात करना भी मुश्किल हो सकता है। जेल से बाहर आने के बाद उन्हें दोबारा स्कूल, परिवार और सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने में समय लग सकता है।

यानी हिरासत का असर केवल उस अवधि तक सीमित नहीं रहता जब बच्चा जेल या डिटेंशन सेंटर में रहता है। इसका प्रभाव उसके मानसिक और सामाजिक विकास पर लंबे समय तक रह सकता है।

परिवारों पर भी पड़ता है भारी दबाव

हिरासत का असर केवल बच्चे पर नहीं पड़ता। परिवारों को भी लंबे समय तक यह पता लगाने की कोशिश करनी पड़ती है कि बच्चा कहां है, किस स्थिति में है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवारों को वकील की व्यवस्था करने, अदालत की कार्यवाही समझने और मुलाकात की अनुमति हासिल करने जैसी मुश्किलों से गुजरना पड़ सकता है। बच्चे की रिहाई के बाद उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति में बदलाव परिवार के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून में बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा

बच्चों की हिरासत का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भी संवेदनशील है। संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (UN Convention on the Rights of the Child) बच्चों की गरिमा और उनके अधिकारों की रक्षा पर जोर देता है। हिरासत को अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल करने और बच्चों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने की अंतरराष्ट्रीय कानूनी अपेक्षाएं हैं।

UNICEF ने भी कहा है कि न्यायिक व्यवस्था के संपर्क में आने वाले हर बच्चे के साथ हर समय गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। संगठन ने इजरायली सैन्य हिरासत व्यवस्था के संपर्क में आने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों पर वर्षों से चिंता दर्ज की है।

इसी वजह से फिलिस्तीनी बच्चों की गिरफ्तारी और सैन्य हिरासत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की निगरानी लगातार बनी हुई है।

इजरायल का पक्ष

इस पूरे मुद्दे को समझते हुए यह ध्यान रखना जरूरी है कि इजरायल फिलिस्तीनी इलाकों में गिरफ्तारियों को सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने की कार्रवाई के रूप में पेश करता रहा है। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जिन पर हिंसक गतिविधियों या सुरक्षा संबंधी अपराधों में शामिल होने का संदेह होता है।

इसलिए हिरासत में मौजूद सभी 370 बच्चों को किसी एक तरह के आरोप या अपराध से जोड़ना सही नहीं होगा। नई रिपोर्ट भी प्रत्येक बच्चे के खिलाफ आरोपों की पूरी सूची उपलब्ध नहीं कराती।

विवाद का केंद्र यही है कि सुरक्षा संबंधी दावों के बावजूद नाबालिगों के साथ हिरासत, पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया में विशेष सुरक्षा और उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित होनी चाहिए।

संगठन ने की अंतरराष्ट्रीय निगरानी की मांग

फिलिस्तीनी सेंटर फॉर प्रिजनर्स एडवोकेसी ने संयुक्त राष्ट्र, UNICEF और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से मामले को तत्काल बाल संरक्षण के मुद्दे के रूप में देखने की अपील की है।

संगठन ने बच्चों की गिरफ्तारी और पूछताछ के दौरान हिंसा तथा दुर्व्यवहार रोकने, नाबालिगों के लिए प्रशासनिक हिरासत खत्म करने, पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा सुविधा और परिवार से मुलाकात सुनिश्चित करने की मांग की है।

इसके अलावा रिहा होने वाले बच्चों के लिए मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और शैक्षणिक पुनर्वास की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

बच्चों की हिरासत ने फिर खड़ा किया बड़ा सवाल

करीब 370 फिलिस्तीनी बच्चों की इजरायली जेलों में मौजूदगी की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब वेस्ट बैंक और गाजा दोनों में फिलिस्तीनी नागरिकों की हिरासत और सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है।

आंकड़े बताते हैं कि बच्चों की गिरफ्तारी का सिलसिला 2026 में भी जारी है। वहीं रिपोर्ट में हिरासत के दौरान भोजन, चिकित्सा, परिवार से संपर्क, कानूनी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि सुरक्षा संबंधी जरूरतों और बच्चों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलिस्तीनी अधिकार संगठनों का कहना है कि किसी भी सुरक्षा व्यवस्था में बच्चों की उम्र और विशेष जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, इजरायल सुरक्षा कारणों से गिरफ्तारियों को उचित ठहराता है।

लेकिन 370 बच्चों का आंकड़ा एक ऐसी मानवीय स्थिति की ओर जरूर ध्यान खींचता है, जिसमें हिरासत की कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास को भी केंद्र में रखना जरूरी है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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