सरकार के अनुसार नए MDR ढांचे से करीब 96% P2M UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे। केवल करीब 4% मर्चेंट भुगतान नए शुल्क के दायरे में आएंगे।
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल पेमेंट की सबसे लोकप्रिय व्यवस्था यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार, 15 सितंबर को नए Merchant Discount Rate (MDR) ढांचे की घोषणा की है। इसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।
हालांकि, इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि अब UPI से ₹2,000 से ज्यादा भेजने पर आम ग्राहक को शुल्क देना होगा। MDR ग्राहक से लिया जाने वाला चार्ज नहीं है। यह मर्चेंट और पेमेंट इकोसिस्टम के बीच लागू होने वाला शुल्क है। केंद्र सरकार और NPCI ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट फ्री रहेगा और व्यापारी भी यह शुल्क ग्राहक पर नहीं डाल सकते।
नए नियमों में छोटे कारोबारियों और कम मूल्य वाले लेन-देन को भी राहत दी गई है। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत P2M UPI लेन-देन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे, जबकि सभी Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त बने रहेंगे।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR
NPCI का नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। सामान्य श्रेणी के ऐसे P2M UPI पेमेंट, जिनकी राशि ₹2,000 से अधिक है, उन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक ने किसी व्यापारी को UPI के जरिए ₹10,000 का भुगतान किया, तो 0.4 प्रतिशत की दर के हिसाब से MDR ₹40 होगा। ₹50,000 के भुगतान पर यह राशि ₹200 होगी और ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर सामान्य MDR की अधिकतम सीमा लागू हो जाएगी।
NPCI ने इस शुल्क की ऊपरी सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की है। इसलिए ₹75,000 या उससे ज्यादा के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से रकम बढ़ती नहीं जाएगी और अधिकतम MDR ₹300 ही रहेगा।
ग्राहक को नहीं देना होगा यह चार्ज
नए नियमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब UPI से पैसे भेजने या दुकान पर भुगतान करने पर ग्राहकों से शुल्क लिया जाएगा?
सरकार ने इसका जवाब स्पष्ट रूप से दिया है। ग्राहकों पर MDR नहीं लगाया जाएगा। वित्त मंत्रालय के अनुसार बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहक से न वसूलें। UPI ऐप भी इस आधार पर कोई छिपा हुआ शुल्क या प्लेटफॉर्म फीस नहीं लगा सकते।
यानी यदि कोई व्यक्ति दुकान पर ₹3,000, ₹10,000 या उससे अधिक का सामान खरीदता है और UPI से भुगतान करता है, तो नए MDR की वजह से ग्राहक से अलग से ₹12, ₹40 या कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम में मर्चेंट पक्ष पर लागू होगा।
एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजना फ्री
अगर आप UPI के जरिए अपने दोस्त, परिवार के सदस्य या किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजते हैं, तो नया MDR उस ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेंगे। इसका मतलब है कि ₹500 भेजने से लेकर ₹50,000 या उससे ज्यादा भेजने तक P2P भुगतान पर नया 0.4 प्रतिशत MDR नहीं लगेगा।
₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी रहेंगे फ्री
₹2,000 तक के P2M UPI पेमेंट पर भी MDR नहीं लगाया जाएगा। यानी रोजमर्रा की छोटी खरीदारी, भोजन, किराना, स्थानीय दुकान या अन्य भुगतान जिनकी राशि ₹2,000 तक है, उन पर नया शुल्क लागू नहीं होगा।
सरकार का कहना है कि नए ढांचे का उद्देश्य आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर भुगतान की लागत बढ़ाना नहीं है। बल्कि बड़े मूल्य वाले चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन से पेमेंट इकोसिस्टम के लिए राजस्व उपलब्ध कराना है, ताकि UPI के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और विस्तार को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।
रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल के लिए अलग नियम
कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू नहीं होगा। इनके लिए ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
इस श्रेणी में रेलवे, दूरसंचार, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कृषि इनपुट जैसे कुछ अन्य आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों को भी इस फ्लैट-फीस व्यवस्था में रखा गया है।
मिसाल के लिए यदि किसी पात्र रेलवे या ईंधन भुगतान की राशि ₹2,000 से अधिक है, तो सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR की जगह ₹5 का निर्धारित शुल्क लागू होगा। NPCI के मुताबिक यह व्यवस्था आवश्यक सेवाओं और कम मार्जिन वाले कारोबारों पर भुगतान लागत को नियंत्रित रखने के लिए बनाई गई है।
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छोटे दुकानदारों को भी बड़ी राहत
नए MDR ढांचे में छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त सुरक्षा दी गई है। NPCI के अनुसार ऐसे छोटे व्यापारी जो अपने UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उन्हें निर्धारित P2PM श्रेणी में शून्य MDR का लाभ मिलता रहेगा।
इसमें सड़क किनारे काम करने वाले छोटे विक्रेता, पड़ोस की दुकानें और छोटे कारोबारी शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सबसे छोटे कारोबारियों पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की अतिरिक्त लागत न आए।
सरकार के मुताबिक इसी तरह की छूटों के कारण मर्चेंट ट्रांजैक्शन का बड़ा हिस्सा नए शुल्क से बाहर रहेगा।
करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि नए MDR ढांचे के तहत करीब 4 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन ही MDR के दायरे में आएंगे। इसके विपरीत करीब 96 प्रतिशत P2M ट्रांजैक्शन या तो ₹2,000 से नीचे हैं या फिर शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आते हैं।
इसका मतलब यह है कि UPI का इस्तेमाल करने वाले अधिकांश ग्राहक और छोटे व्यापारी रोजमर्रा के भुगतान में पहले की तरह इस व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI पर कोई मासिक फ्री-ट्रांजैक्शन सीमा नहीं लगाई गई है। यानी ग्राहकों को यह चिंता करने की जरूरत नहीं है कि एक निश्चित संख्या में भुगतान करने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क शुरू हो जाएगा।
क्रेडिट कार्ड से UPI पेमेंट पर अलग नियम
नए MDR को लेकर एक और महत्वपूर्ण अंतर है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से सीधे बैंक खाते से मर्चेंट के बैंक खाते में होने वाले P2M UPI भुगतान से संबंधित है।
यदि UPI का इस्तेमाल किसी क्रेडिट उत्पाद, जैसे UPI से लिंक किए गए RuPay क्रेडिट कार्ड या पहले से स्वीकृत बैंक क्रेडिट लाइन के जरिए किया जाता है, तो उस पर अलग नियम लागू हो सकते हैं। NPCI ने स्पष्ट किया है कि ऐसे क्रेडिट-आधारित भुगतान को सामान्य बैंक-खाता आधारित UPI P2M लेन-देन के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए।
NPCI के मुताबिक पारंपरिक क्रेडिट कार्ड भुगतान पर MDR आम तौर पर UPI के नए 0.4 प्रतिशत MDR से अधिक होता है। वहीं डेबिट कार्ड के लिए भी अलग शुल्क व्यवस्था लागू होती है।
कैपिटल मार्केट पेमेंट पर 0.02 प्रतिशत MDR
नए ढांचे में पूंजी बाजार से जुड़े भुगतान के लिए भी अलग दर निर्धारित की गई है। म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर से संबंधित पात्र भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा और इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
यह सामान्य मर्चेंट भुगतान के लिए तय 0.4 प्रतिशत दर से काफी कम है। इसका उद्देश्य बड़े मूल्य वाले वित्तीय लेन-देन में UPI के इस्तेमाल को बनाए रखना और खुदरा निवेशकों की डिजिटल पहुंच को प्रभावित नहीं करना है।
शुल्क की शुरुआत आखिर क्यों हुई?
UPI की शुरुआत 2016 में हुई थी और पिछले वर्षों में यह भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। सरकार के अनुसार जुलाई 2026 में UPI के जरिए 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल राशि करीब ₹29.9 लाख करोड़ रही।
अगस्त 2026 में UPI ने करीब 24 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 311 अरब डॉलर थी।
इतने बड़े पैमाने पर चल रहे नेटवर्क के संचालन, साइबर सुरक्षा, तकनीकी ढांचे और आगे विस्तार के लिए लगातार निवेश की जरूरत होती है। सरकार और NPCI का कहना है कि नया MDR ढांचा UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
एक नजर में समझें नया UPI नियम
15 अक्टूबर 2026 से:
- ₹2,000 तक का P2M UPI भुगतान: कोई MDR नहीं
- ₹2,000 से अधिक सामान्य P2M भुगतान: 0.4 प्रतिशत MDR
- ₹75,000 या उससे अधिक: अधिकतम ₹300 MDR
- रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, फ्यूल आदि पात्र क्षेत्र: ₹5 फ्लैट MDR
- P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान: पूरी तरह मुफ्त
- ₹1 लाख तक मासिक UPI QR प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारी: शून्य MDR
- कैपिटल मार्केट से जुड़े पात्र भुगतान: 0.02 प्रतिशत, अधिकतम ₹300
- ग्राहक पर MDR डालने की अनुमति: नहीं
सरकार ने पहले ही दी थी सफाई
नए MDR ढांचे की घोषणा से पहले अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया था कि UPI ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा। वित्त मंत्रालय ने तब कहा था कि भविष्य में यदि MDR लागू किया जाता है तो वह सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नाममात्र की दर से होगा और आम नागरिकों से UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा।
15 सितंबर को जारी नए ढांचे ने इसी नीति को विस्तृत रूप दिया है। इसमें एक तरफ बड़े मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था की गई है, वहीं दूसरी तरफ P2P ट्रांजैक्शन, ₹2,000 तक के P2M पेमेंट और छोटे व्यापारियों को शून्य-MDR व्यवस्था में रखा गया है।
