Saturday, 27 June 2026
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21 साल का इंतजार: डॉ. आशा गोयल हत्याकांड में न्याय की देरी पर परिवार ने मांगा मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप

डीएनए सबूत और कबूलनामे के बावजूद अब तक नहीं मिला इंसाफ

मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसिद्ध स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा गोयल की नृशंस हत्या के अब तक अनसुलझे मामले को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। 22 अगस्त 2003 को मुंबई में हुई इस जघन्य हत्या को 21 साल बीत चुके हैं, लेकिन न्याय की राह अभी भी अधूरी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी बेटी रश्मि गोयल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस लंबे समय से लंबित मुकदमे में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

न्याय प्रणाली पर सवाल, परिवार का संघर्ष जारी

गोयल परिवार बीते दो दशकों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन पुख्ता डीएनए सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अपराधी के स्वयं किए गए कबूलनामे के बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। इस असहनीय देरी ने परिवार को न सिर्फ मानसिक आघात दिया है, बल्कि भारत की न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रश्मि गोयल ने भावुक अपील करते हुए कहा, “हमने बहुत धैर्य रखा, लेकिन अब इंतजार असहनीय हो चुका है। मेरी माँ ने अपना जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित किया, लेकिन उनकी हत्या के दोषी अब तक आज़ाद घूम रहे हैं। हम मुख्यमंत्री से निवेदन करते हैं कि वे इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करें। एक ऐसा देश, जहां इतने ठोस सबूत होने के बावजूद अपराधी बच निकलें, वह न्यायप्रिय देश नहीं हो सकता।”

महिला स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी थीं डॉ. गोयल

डॉ. आशा गोयल का जन्म 1940 में मथुरा में हुआ था। उन्होंने मुंबई में मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद कनाडा में चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। वे महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ थीं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हुए थे। उनकी निर्मम हत्या ने भारत और कनाडा, दोनों देशों को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन 21 साल बाद भी दोषी कानून की पकड़ से बाहर हैं।

परिवार का संकल्प: न्याय की लड़ाई जारी रहेगी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात जोर देकर कही गई कि यह कानूनी देरी सिर्फ गोयल परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि भारत की न्याय व्यवस्था के लिए भी एक कड़ा सवाल है। परिवार ने स्पष्ट किया कि जब तक दोषियों को उनके अपराध की सजा नहीं मिलती, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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