Monday, 03 August 2026
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सीमाओं की 24×7 निगरानी में जुटे 10 सैटेलाइट्स: ISRO प्रमुख का बड़ा बयान, कहा- सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष तकनीक जरूरी

ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा- भारत की समुद्री सीमाओं और ज़मीनी सरहदों पर लगातार निगरानी जारी, आने वाले वर्षों में 52 और उपग्रह होंगे लॉन्च

नई दिल्ली, भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के माहौल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी. नारायणन ने देश की सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि देश की सरहदों और समुद्री क्षेत्रों की लगातार निगरानी के लिए इसरो की 10 सैटेलाइट्स 24 घंटे सक्रिय हैं। यह बयान उन्होंने अगरतला में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU) के दीक्षांत समारोह में दिया।

नारायणन ने कहा, “हमारी समुद्री सीमा लगभग 7,000 किलोमीटर लंबी है। इसकी निगरानी केवल उपग्रहों और ड्रोन तकनीक से ही संभव है। यदि हमें देश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, तो हमें अंतरिक्ष से सेवाएं देनी होंगी।”

ISRO की सैटेलाइट शक्ति

अब तक इसरो कुल 127 भारतीय सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है। इनमें 22 उपग्रह लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में हैं और 29 सैटेलाइट्स जियो-सिंक्रोनस ऑर्बिट में कार्यरत हैं। देश के पास करीब 12 जासूसी और निगरानी सैटेलाइट्स हैं जिनमें Cartosat, RISAT, EMISAT और Microsat जैसी सीरीज शामिल हैं। इनका इस्तेमाल सीमाओं की निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किया जाता है।

जल्द लॉन्च होगा नया निगरानी उपग्रह

ISRO अपनी निगरानी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने जा रहा है। आगामी 18 मई को EOS-09 (RISAT-1B) नामक एक रडार इमेजिंग सैटेलाइट को सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit) में लॉन्च किया जाएगा। यह उपग्रह सीमाओं की निगरानी में विशेष भूमिका निभाएगा।

अगले 5 वर्षों में 52 निगरानी सैटेलाइट्स की योजना

IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने जानकारी दी कि भारत आने वाले पांच वर्षों में 52 नए निगरानी उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना पर कार्य कर रहा है। इस अभियान में निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इन सैटेलाइट्स से सेना, नौसेना और वायुसेना को रीयल-टाइम खुफिया जानकारी और निगरानी में मदद मिलेगी।

पूर्वोत्तर भारत में ISRO की भूमिका

नारायणन ने यह भी बताया कि इसरो पूर्वोत्तर भारत के विकास में भी अहम भूमिका निभा रहा है। संगठन के कई उपग्रह इस क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।

छात्रों को प्रेरणा

समारोह में मौजूद छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “डिग्री लेना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के लिए योगदान देना भी आपकी जिम्मेदारी है। जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वह एक ऐसा राष्ट्र होगा जो पूरी दुनिया को दिशा देगा।”

ये भी पढ़ें :- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा IMC गया को मिली मंजूरी — बिहार का पहला एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप बनने की ओर एक बड़ा कदम

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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