Friday, 11 September 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
आदिवासी और ग्रामीण विकास के लिए एचआरडीएस इंडिया की पहल जारी केरलम पर फिर बढ़ा दबाव, केंद्र ने PM SHRI योजना पर जल्द फैसला लेने को कहा 25 Years of 9/11 Attacks: 4 विमान, 19 आतंकवादी और 2,977 मौतें! वो सुबह जिसने अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया iPhone 18 Pro की कीमत ने भारतीयों को चौंकाया! जानिए अमेरिका, दुबई और कनाडा समेत देशों में कितनी है फोन की कीमत? भारत ने पाकिस्तान को 19-0 से रौंदा! महिला जूनियर एशिया कप के सेमीफाइनल में पक्की की अपनी जगह Vi के नेटवर्क पर क्यों दिख रहा है ‘SRK is on Vi’? शाह रुख खान के साथ कंपनी का बड़ा प्रमोशन, जानिए क्या है पूरी रणनीति 1993 Mumbai Blast Case: सुप्रीम कोर्ट से अबू सलेम को बड़ा झटका, समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज 60 से ज्यादा अपडेट के साथ लॉन्च हुई Jawa 42 All Stars, जानिए कीमत, डिजाइन और फीचर्स से जुड़ी सभी जानकारी आदिवासी और ग्रामीण विकास के लिए एचआरडीएस इंडिया की पहल जारी केरलम पर फिर बढ़ा दबाव, केंद्र ने PM SHRI योजना पर जल्द फैसला लेने को कहा 25 Years of 9/11 Attacks: 4 विमान, 19 आतंकवादी और 2,977 मौतें! वो सुबह जिसने अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया iPhone 18 Pro की कीमत ने भारतीयों को चौंकाया! जानिए अमेरिका, दुबई और कनाडा समेत देशों में कितनी है फोन की कीमत? भारत ने पाकिस्तान को 19-0 से रौंदा! महिला जूनियर एशिया कप के सेमीफाइनल में पक्की की अपनी जगह Vi के नेटवर्क पर क्यों दिख रहा है ‘SRK is on Vi’? शाह रुख खान के साथ कंपनी का बड़ा प्रमोशन, जानिए क्या है पूरी रणनीति 1993 Mumbai Blast Case: सुप्रीम कोर्ट से अबू सलेम को बड़ा झटका, समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज 60 से ज्यादा अपडेट के साथ लॉन्च हुई Jawa 42 All Stars, जानिए कीमत, डिजाइन और फीचर्स से जुड़ी सभी जानकारी

महाबोधि महाविहार पर बौद्ध नियंत्रण की मांग तेज, 12 फरवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 के कारण महाबोधि महाविहार अब भी गैर-बौद्ध प्रबंधन के अधीन

बौद्ध नेताओं का कहना – यह धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन और बुद्ध के सिद्धांतों के विरुद्ध

12 फरवरी से राष्ट्रव्यापी आंदोलन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

नई दिल्ली, (न्यूज ऑफ द डे)

ऑल इंडिया बौद्ध फोरम और विभिन्न बौद्ध संगठनों ने करोल बाग स्थित डॉ. अंबेडकर भवन में प्रेस वार्ता कर बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को रद्द करने और महाबोधि महाविहार का पूरा नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग की। यह मांग लंबे समय से चली आ रही है।

फोरम के महासचिव आकाश लामा ने इस अवसर पर कहा कि बोधगया, जो विश्वभर के बौद्धों का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है, आज भी गैर-बौद्ध प्रशासकों के नियंत्रण में है, जो कि अन्याय है। उन्होंने मौजूदा प्रबंधन पर अंधविश्वास को बढ़ावा देने और इस पवित्र स्थल के व्यावसायीकरण का आरोप लगाया, जो बुद्ध के वैज्ञानिक और तर्कसंगत विचारों के खिलाफ है।

आकाश लामा ने कहा: “दुनियाभर के बौद्ध महाबोधि महाविहार में दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन इसके प्रबंधन पर बौद्धों का अधिकार नहीं है। बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 ने हमें हमारे ही पवित्र स्थल से वंचित कर दिया है। अब न्याय का समय आ गया है। हमारी मांग है कि इस अधिनियम को पूरी तरह से रद्द किया जाए और मंदिर का संपूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए”।

26 नवंबर 2023 और 17 सितंबर 2024 से जारी आंदोलन को मिलेगा बड़ा रूप

ऑल इंडिया बौद्ध फोरम इससे पहले 26 नवंबर 2023 और 17 सितंबर 2024 को देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान और 500 से अधिक ज्ञापन मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री, गृह मंत्री, बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को सौंपे चुका है। अब इस आंदोलन को और तेज़ करने के लिए 12 फरवरी 2025 (माघ पूर्णिमा) से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।

इस मांग का समर्थन करते हुए डॉ. हरबंस वीरदी, (अंतरराष्ट्रीय समन्वयक, फेडरेशन ऑफ अंबेडकराइट्स एंड बौद्ध ऑर्गेनाइजेशन्स, यूके) और ऑल इंडिया बौद्ध फोरम के मुख्य सलाहकार ने कहा: “महाबोधि महाविहार पर बौद्ध नियंत्रण की यह लड़ाई सौ वर्षों से अधिक पुरानी है। 19वीं शताब्दी में अनागारिक धर्मपाल ने इस मुद्दे के लिए संघर्ष किया था, लेकिन आज भी मंदिर प्रशासन बौद्धों के हाथ में नहीं है। भारत सरकार को बौद्धों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और इस पवित्र स्थल को इसके वास्तविक संरक्षकों को सौंपना चाहिए।”

बौद्ध विरासत की पवित्रता केवल बौद्ध नेतृत्व में संभव
भिक्षु रत्नदीपा (महासचिव, अरुणाचल प्रदेश भिक्षु संघ और मुख्य सलाहकार, ऑल इंडिया बौद्ध फोरम) ने भी बौद्धों द्वारा महाबोधि महाविहार के प्रबंधन की मांग को दोहराते हुए कहा: “महाबोधि महाविहार बौद्ध धरोहर का वैश्विक प्रतीक है। इसकी आध्यात्मिक पवित्रता और गरिमा को बनाए रखने का अधिकार केवल बौद्ध समुदाय को होना चाहिए। हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि इसका प्रशासन तुरंत बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।”

भंते प्रज्ञशील महाथेरो, (मुख्य सलाहकार, ऑल इंडिया बौद्ध फोरम) ने एकजुटता दिखाते हुए बिहार सरकार और भारत सरकार से बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 को रद्द करने और महाबोधि महाविहार को बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग की।

चंद्रबोधि पाटिल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बौद्ध सोसाइटी ऑफ इंडिया) और डॉ. विलास खरत प्रज्ञशील ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की।

इतिहासिक अन्याय को खत्म करने का समय

बिहार सरकार द्वारा पारित बोधगया मंदिर अधिनियम, 1949 के तहत नौ-सदस्यीय महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति में गैर-बौद्धों को शामिल किया गया है और एक गैर-बौद्ध व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया जाता है। बौद्ध नेताओं का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन और बौद्ध विरासत का अपमान है।

डॉ. प्रोफेसर विलास खरत, डॉ. एच.एल. बिर्दी, चंद्रबोधि पाटिल और डॉ. राहुल बाली जैसे फोरम के नव नियुक्त सलाहकारों ने आंदोलन को और तेज़ करने का संकल्प लिया। इसके साथ ही दिल्ली कार्यकारिणी समिति का गठन भी किया गया, जिसमें वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु और कार्यकर्ता शामिल हैं।

राष्ट्रव्यापी समर्थन की अपील

आकाश लामा ने सभी बौद्ध अनुयायियों, अंबेडकरवादी संगठनों और तर्कशील समूहों से एकजुट होकर 12 फरवरी से शुरू होने वाली भूख हड़ताल में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा:

“यह सिर्फ एक मंदिर का मामला नहीं है, बल्कि बौद्ध पहचान, गरिमा और न्याय का सवाल है। हम सभी बुद्ध अनुयायियों और न्यायप्रिय लोगों से इस ऐतिहासिक आंदोलन में हमारा साथ देने की अपील करते हैं।”

ऑल इंडिया बौद्ध फोरम ने भारत सरकार से इस ऐतिहासिक अन्याय को तुरंत सुधारने और महाबोधि महाविहार का संपूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपने की अपील की है।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।