Monday, 03 August 2026
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पेड़ के पीछे छिपकर सीखा वुशु, अब है 37वें राष्ट्रीय खेल की गोल्ड मेडलिस्ट

पैसे की तंगी के चलते वुशु की कोचिंग देने की थी प्लानिंग

नई दिल्ली।

37वें राष्ट्रीय खेलों में राजधानी दिल्ली की मुंकुंदपुर निवासी रेजिना तामांग ने वुशु खेल में गोल्ड मेडल जीता है। रेजिना ने वुशु के नानचुवान इवेंट्स में यह उपलब्धि हासिल की, जबकि दिल्ली टीम ने इन राष्ट्रीय खेलों में 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज सहित कुल 11 मेडल अपने नाम किए। रेजिना ने राष्ट्रीय खेलों में पहली बार हिस्सा लिया था और पहली बार में ही वह गोल्ड मेडल हासिल करने में कामयाब रही, वैसे वह 2012 से नेशनल चैंपियनशिप में चैंपियन बनती आ रही है और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उसके नाम 4 दर्जन से भी अधिक मेडल हैं। इस उपलब्धि के पीछे उसका संघर्ष और कड़ी मेहनत है। रेजिना ने वुशु की कला पार्क में पेड़ के पीछे छिपकर सीखी और इस खेल को करियर बनाने के लिए रेग्युलर पढ़ाई भी छोड़ दी थी। रेजिना के नाम जूनियर एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी है। वुशु टीम के कोच राजबीर सिंह का कहना है कि रेजिना में अलग ही टैलेंट है, अगर उसे सही प्रकार से ट्रेनिंग मिलती रहे तो वह इंटरनेशनल स्तर पर भी देश के लिए बहुत सारे मेडल जीत सकती है।

पैसों के लिए कोचिंग देने की थी प्लानिंग

रेजिना से बातचीत में उसने बताया कि उनके मुंहबोले मामा मोनी लामा वुशु में माहिर थे। वह मॉडल टाउन स्थित एक पार्क में कुछ बच्चों को वुशु सिखाते थे। जब वह 11 साल की थीं तो उनके घर की माली हालत बहुत ही खराब थी। घर चलाने के लिए उन्होंने वुशु की ट्रेनिंग देकर पैसा कमाने की प्लानिंग बनाई। इसके लिए ही पार्क में छिपकर इस वृद्ध कला को सीखा। एक दिन पार्क में अभ्यास के दौरान मामा ने उसे पकड़ लिया और क्लास लगाई। बाद में मामा ने उसे ट्रेंड किया और कई जगह से स्कॉलरशिप भी दिलाई। उसने बताया कि उनका भाई शशि तामांग भी उनके साथ ही इसी तरह वुशु सीखा है। उसके पास भी काफी मेडल हैं और वह अब कोचिंग भी दे रहा है। वह अपने मामा को ही अपना मेंटर मानते हैं।

स्कॉलरशिप के पैसे देख रो पड़े थे पापा

दोनों के पिता किशन तमांग एक कैटरिंग वाले के यहां काम करते है। वह बताते हैं कि इन दोनों ने कब यह खेल सीखा, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। लेकिन जब पहले गोल्ड मेडल से प्राप्त स्कॉलरशिप से मिले पैसे दोनों ने मेरे हाथ में दिए तो मेरी आंखें भर आई। उस वक्त घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। दोनों को स्कॉलरशिप के सवा लाख रुपये मिले थे। दरअसल, दिल्ली सरकार सब-जूनियर – जूनियर खिलाड़ी को गोल्ड मेडल पर 42 हजार रुपए स्कॉलरशिप देती है।

ये है मेडल जीतने वाले खिलाड़ी

37वें राष्ट्रीय खेलों के वुशु में रेजिना तमांग और नीरज कुमार ने गोल्ड मेडल, सुमित ने सिल्वर और प्रेरणा, अभिषेक मेहतो, दीपक लामा, अमित कुमार, सागर दहिया, पुनीत लांबा, बृजेश खत्री और जसवीर ने अलग-अलग वर्गों में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। दिल्ली टीम ने इस बार 11 मेडल अपने नाम किए। जबकि 36वें राष्ट्रीय खेल में दिल्ली टीम ने केवल 5 पदक जीते थे। दिल्ली एमेच्योर वुशु एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आर एस आर के वार्ष्णेय और महासचिव हितेंदर सिंह ने सभी पदक विजेताओं और उनके प्रशिक्षकों को बधाई दी है। उन्होंने 21वीं दिल्ली स्टेट वुशु चैंपियनशिप के दौरान इन खिलाड़ियों को सम्मानित करने की घोषणा भी की है। दिल्ली स्टेट वुशु चैंपियनशिप दिसंबर में त्यागराज स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में आयोजित की जाएगी।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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