Monday, 13 July 2026
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ओबीसी अधिकारों की स्थायी सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय संवाद आयोजित

अनुसूची IX में आरक्षण को शामिल करने की मांग, पटना में अगला बड़ा आंदोलन 27 अप्रैल को

“जब तक गिनती नहीं होगी, हिस्सेदारी कैसे मिलेगी?” — इसी सवाल के साथ दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ओबीसी अधिकारों को लेकर एक राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया गया। अखिल भारतीय ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में जातिगत जनगणना, ओबीसी आरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

ओबीसी आरक्षण को अनुसूची IX में शामिल करने की मांग

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने तमिलनाडु के 69% आरक्षण कानून का उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक आरक्षण को संविधान की अनुसूची IX में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक वह न्यायिक चुनौती से सुरक्षित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं।

तेलंगाना के पिछड़ा वर्ग मंत्री पोनम प्रभाकर ने कहा कि तेलंगाना के आरक्षण विधेयक को भी अनुसूची IX में शामिल करवाने के लिए साझा प्रयासों की आवश्यकता है। “हमें केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करवाना होगा कि ओबीसी आरक्षण न केवल सुरक्षित रहे, बल्कि आगे भी विस्तारित हो।”

छात्र एकता को बताया आंदोलन की रीढ़

AIOBCSA के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट पंकज कुशवाहा और राष्ट्रीय सलाहकार अल्ला रामकृष्णा ने छात्रों को आंदोलन का मूल आधार बताते हुए कहा कि एकजुट छात्र शक्ति ही वह चिंगारी है, जो सामाजिक न्याय के आंदोलन को आगे ले जा सकती है।

पंकज कुशवाहा ने घोषणा की कि 27 अप्रैल 2025 को बिहार की राजधानी पटना में अगला बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम देशभर में सम्मेलन, विरोध-प्रदर्शन और रैलियों के माध्यम से सरकार से 50% आरक्षण सीमा हटाने, जातिगत जनगणना कराने और ओबीसी सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।”

नेतृत्व की ज़िम्मेदारी अब ओबीसी समाज को खुद लेनी होगी

पूर्व तेलंगाना मंत्री श्रीनिवास गौड़ ने कहा, “सिर्फ मांग करने से सामाजिक न्याय नहीं मिलेगा, इसके लिए नेतृत्व की कमान ओबीसी समाज को स्वयं संभालनी होगी। प्रतिनिधित्व ही अधिकार दिला सकता है।”

छात्र आंदोलन को बताया बदलाव की नींव

प्रो. सूरज मंडल और प्रो. रतन लाल ने छात्रों की सक्रियता को सामाजिक परिवर्तन की नींव बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि छात्रों के आंदोलनों ने बड़े सामाजिक सुधारों को जन्म दिया है।

पूर्व आईएएस अधिकारी चीरंजीवीलु ने कहा कि सामाजिक न्याय की विचारधारा को नीतिगत स्तर पर मजबूती देने के लिए बुद्धिजीवियों और छात्रों की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने ओबीसी अधिकारों की संवैधानिक रक्षा के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।

देशभर के छात्र नेताओं की भागीदारी

इस संवाद में इलैया कुमार (SFD), ऋतु अनुपमा (आरक्षण क्लब, जेएनयू), अक्षन रंजन (छात्र राजद), महेश, राकेश सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र नेता भी शामिल हुए। सभी ने ओबीसी सामाजिक न्याय आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इस दिशा में लगातार सक्रिय रहने की अपील की।

यह राष्ट्रीय संवाद ओबीसी अधिकारों को एक स्थायी और संगठित मंच देने की दिशा में एक अहम कदम साबित हुआ, जिससे देशभर में सामाजिक न्याय की लड़ाई को नई ऊर्जा और दिशा मिलने की उम्मीद है।

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Aniket

लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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