Monday, 13 July 2026
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दिल्ली सरकार स्विमिंग पूल: जिंदगी बचाने वालों को ही साल भर से नहीं मिला वेतन

वेतन मांगने पर नौकरी से हटाने और दूर ट्रांसफर करने की दे रहे धमकी

बच्चों की स्कूल फीस नहीं भर सके तो स्कूलों ने भी रोके उनके बच्चों के रिजल्ट

विजय कुमार, नई दिल्ली।

हम लोगों की जिंदगी बचाने का काम करते है, मगर हमारी जिंदगी खुद नरक में जा पहुंची है। पिछले एक साल से हमें सरकार ने वेतन ही नहीं दिया और अब अप्रैल से दूसरा साल लगने जा रहा हैं। सरकार से अगर कुछ मिला है तो वह कोरा आश्वासन। यह कहना है दिल्ली सरकार के स्विमिंग पूलों में काम करने वाले लाइफ गार्ड्स का।

नाम न छापने की शर्त पर बात करने के लिए राजी होने पर उन्होंने बताया कि वह पिछले एक साल से दिल्ली सरकार के प्रत्येक विभाग में अपने वेतन के लिए धक्के खा रहें है। जहां भी जाते है उनको कह दिया जाता है कि जल्द ही कुछ न कुछ किया जाएगा। ऐसा 1 अप्रैल 2023 से चल रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में दिल्ली सरकार के करीब 20 स्विमिंग पूल हैं। जहां प्रत्येक पूल पर दो-दो लाइफ गार्डस तैनात किए गए है। यह तैनाती छत्रसाल स्टेडियम स्थित खेल ब्रांच से की जाती है। कांटेक्ट बेस पर उनको रखा जाता है, वहीं से उनका वेतन भी आता है। उन्होंने बताया कि उनमें से कई लाइफ गार्ड्स 15-15 सालों से यही काम कर रहें है। उनको पक्का करने की बात तो दूर पिछले एक साल से उनको वेतन ही नहीं मिला है। यह लाइफ गाडर्स एक पूल में करीब 400 युवा तैराक जो कि सीखने के लिए आते है उनको ट्रेनिंग देते है तथा उस दौरान उनके जीवन की रक्षा भी करते है। मगर अपने जीवन की रक्षा वह नहीं कर पा रहे है।

बता दें कि दिल्ली सरकार इन्हीं लाइफ गार्ड्स की जानकारी देकर दिल्ली पुलिस के विभिन्न विभागों से स्विमिंग पूल चलाने का लाइसेंस भी लेती है। लाइफ गार्ड्स न हो तो उनको पूल चलाने की अनुमति विभागों द्वारा नहीं मिल सकती। इसके बावजूद यह लाइफ गार्ड्स दो वक्त का खाना तक नहीं जुटा पा रहें है। ऐसा नहीं है कि इस बाबत खेल विभाग को जानकारी नहीं है। बल्कि दो-दो खेल निदेशकों के बदले जाने के बावजूद वेतन नहीं मिला। जो भी खेल निदेशक छत्रसाल में आता है वह केवल आश्वासन देता रहता है। वर्तमान में भी ऐसा ही हो रहा है। यह जानकारी राज्यपाल के ऑफिस के पास भी है।

लाइफ गार्ड्स का कहना है कि अब तो इस बाबत अगर किसी विभागाध्यक्ष के पास जाते हैं तो वह नौकरी से निकालने और दूर तबादला करने की धमकी देते है। ऐसे में यह कोई नहीं सोचता कि वह पिछले एक साल से अपने परिवारों को कैसे पाल रहे हैं। कईयों ने बताया कि कई महीने से उनके बच्चों की स्कूल की फीस तक नहीं भरी गई है। जिससे स्कूल वालों ने उनके बच्चों के परीक्षा परिणाम तक रोक लिए है। गौरतलब है कि इस परेशानी को लेकर खेल निदेशक से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने न तो फोन ही उठाया, न ही वाट्सऐप पर ही अपना जवाब दिया। ऐसे में यह लाइफ गार्ड्स अपने-अपने परिवार के साथ बेहद निम्न जीवन जीने के लिए मजबूर है।

यह खबर एक स्वतंत्र वरिष्ठ खेल पत्रकार ने लिखी है, इसके कंटेंट के लिए notdnews.com जिम्मेदार नहीं है।

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Aniket

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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