दिल्ली में जलबोर्ड के हाईटेक मीटर से पानी की बर्बादी का मिलेगा पूरा हिसाब-किताब

नई दिल्ली।

दिल्ली में पानी की बर्बादी रोकने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने साल 2017 में अपने वाटर पाइप लाइन नेटवर्क में फ्लो मीटर लगाने शुरू किए थे। इसके लिए टेंडर निकाला गया और कंपनियों को बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया गया। लेकिन सीबीआई ने इस प्रोजेक्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कर दिया, जिससे प्रोजेक्ट मुश्किल में पड़ गया। जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पिछले साल दिसंबर तक 3005 की जरूरत के मुकाबले 2977 फ्लो मीटर लगाए गए थे। ये काम 2017 से 2019 के बीच अलग-अलग चरणों में पूरे किए गए।

पानी का रियल टाइम रिकॉर्ड

बोर्ड का अनुमान है कि शहर में पाइप केि जरिए पानी पहुंचाने के दौरान करीब 40% पानी बर्बाद हो जाता है। पानी की आपूर्ति और वितरण का रियल-टाइम ऑडिट करने के लिए दिल्ली सरकार ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) और प्राथमिक भूमिगत जलाशयों (UGR) के बीच फ्लो मीटर लगाने का फैसला किया। प्रोजेक्ट के पहले चरण में 290 फ्लो मीटर लगाए गए। दूसरे चरण में, सेकेंडरी UGR को कवर किया गया और 2,715 फ्लो मीटर लगाए गए। जल बोर्ड के विद्युत चुम्बकीय फ्लो मीटर प्लांट के आउटलेट और UGR के इनलेट पर लगाए गए हैं। प्राथमिक और सेकेंडरी जलाशयों में लगाए गए फ्लो मीटर 100 मिमी से 1,500 मिमी व्यास के होते हैं। जल बोर्ड के मुख्यालय में एक डेटा सेंटर पानी की स्थिति का रियल-टाइम डेटा प्राप्त करता है।

जल बोर्ड के पास पूरी पावर

पानी की बर्बादी को कम करने के लिए बोर्ड ने अब घरों के कनेक्शन का रख रखाव और उपभोक्ता के पानी के मीटर को बदलने का काम अपने हाथ में ले लिया है, जिसमें पुराने और खराब मीटरों को भी बदला जाएगा ताकि पानी का सही हिसाब रखा जा सके। लगभग 394 फ्लो मीटर अभी भी लगाए जाने बाकी हैं। जल बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार इन्हें डिस्ट्रिक्ट मीटर्ड एरिया में लगाया जाना है। शहर में 15,041 किलोमीटर लंबी पानी की आपूर्ति लाइनें हैं, जिनमें से जल बोर्ड ने 2021 तक लगभग 1,220 किलोमीटर लंबी पुरानी, खराब और टपकने वाली मेन लाइनों को बदल दिया था। जल बोर्ड का औसतन पेयजल उत्पादन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 950 मिलियन गैलन प्रति दिन (MGD) है। उत्पादित पानी का लगभग 400 MGD बर्बाद हो जाता है। बोर्ड के अनुसार, वितरण में होने वाले नुकसान का मुख्य कारण पानी का रिसाव और चोरी है। सीबीआई जांच के अनुसार केंद्रीय एजेंसी ने फ्लो मीटर लगाने में अनियमितताओं के लिए जल बोर्ड के पांच अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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