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आर्या परियोजना का उद्देश्य चुने हुए जिलों के ग्रामीण युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना: डॉ. यू एस गौतम

बोधगया में आर्या परियोजना के तहत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का किया गया शुभारंभ

बिहार।

बोधगया में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा संचालित आर्या परियोजना के तहत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्याशला का आयोजन किया जा रहा है जिसका शुभारंभ गुरुवार 22 फरवरी को किया गया, जिसमे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी, निदेशकगण तथा देश भर से 100 कृषि विज्ञान केंद्रों के वरीय वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस राष्ट्रीय कार्याशाला के उद्घाटन अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उप महानिदेशक डॉ. यू एस गौतम बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए।

डॉ. यू एस गौतम ने अपने संबोधन में कहा, “भारत सरकार के द्वारा आर्या परियोजना की शुरूआत वितीय वर्ष 2015-16 में 25 कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ 100 करोड़ रुपए से की गई थी। जो आज 100 कृषि विज्ञान केंद्रों मे चल रही है। आर्या परियोजना का उद्देश्य चुने हुए जिलों के ग्रामीण युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, जिससे वे कृषि की ओर आकर्षित हो और उन्हे लाभकारी रोजगार एवं सतत् आय प्राप्त हो। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रम के तहत उपलब्ध अवसरों के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ संबंध विकसित कर युवाओं की रूचि और विश्वास खेती की ओर बढ़ाना है।”

उन्होंने परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सभी कृषि विज्ञान केंद्रों का उत्साहवर्धन किया। डॉ. गौतम ने कृषि विज्ञान केंद्रों के सशक्तिकरण के लिए परिषद स्तर पर जो प्रयास किये जा रहे हैं उनका विस्तृत ब्योरा भी दिया। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों को फ्रंटलाइन विस्तार प्रणाली के साथ सामाजिक विज्ञान से संबंधित शोध कार्य करने के लिए भी प्रेरित किया।

पूर्व उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. केडी. कोकाटे ने आर्या परियोजना के प्रतिभागियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया तथा इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन्हें कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है, उस संदर्भ में भी रणनीति तैयार करने की आवश्यकता और कृषि से जुड़े एग्री-टेक स्टार्टअप बनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान बिधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय नाड़िया के पूर्व कुलपति डॉ. एमएम अधिकारी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा की उद्यमी किसान विगत वर्षों सें भी श्रेष्ठ काम कर रहे हैं, परन्तु इस परियोजना के माध्यम से इस प्रकार के किसान उद्यमियों की संख्या व आमदनी में चहुमुखी विकास हुआ है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. आर आर बार्मन ने इस परियोजना की विस्तुत जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2015-16 में कृषि के क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं का पलायन देखते हुए परिषद ने इस परियोजना की नींव रखी। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से 10 प्रमुख कृषि संबंधित उद्यमों में युवाओं की रूचि देखी गई, साथ ही यह भी पाया गया कि छोटे उद्यम जैसे कि बकरी-पालन, मुर्गीपालन, नर्सरी उत्पादक, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन जैसे व्यवसायों में युवाओं की खासी रूचि व आमदनी पाई गई है।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते आई सी ए आर-अटारी, पटना के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने सभी विशिष्ट अतिथियों और प्रतिभागियों का गया की पावन धरती पर सहृदय स्वागत किया। और इस दौरान आर्या परियोजना की रूपरेखा तथा राष्ट्रीय कार्यशाला के महत्व व उद्देश्य पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम के दौरान बिहार व झारखंड के 12 प्रगतिशील उद्यमियों को कृषक प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिया गया। साथ हीं आर्या परियोजना का वार्षिक प्रतिवेदन तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रकाशंस का विमोचन भी किया गया।

मंच का संचालन प्रधान वैज्ञानिक व नोडल अधिकारी डॉ. अमरेन्द्र कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली (मुख्यालय) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. केशव ने किया। इस अवसर पर विभिन्न अटारी निदेशक डॉ. शन्तनु दुबे (कानपुर), डॉ. परमिन्दर शेयरान (लुधियाना), डॉ. जे.पी. मिश्रा (जोधपुर), डॉ. शेख मीरा (हैदराबाद), डॉ. प्रदीप डे (कोलकता) ने भी प्रतिभागिता की। इस मौके पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. धरमवीर सिंह डॉ मोहम्मद मोनोब्रुल्लाह, डॉक्टर प्रज्ञा बदुरिया, वरीय वैज्ञानिक और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस बी सिंह ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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