मंगोलिया में भारतीय मुक्केबाज का धमाका: हवलदार विश्वनाथ सुरेश ने वर्ल्ड नंबर-1 को किया नॉकआउट

युवा से सीनियर तक लगातार गोल्ड जीतने वाले चेन्नई के बॉक्सर ने एशियन चैंपियनशिप में किया बड़ा उलटफेर

नई दिल्ली/मंगोलिया, न्यूज ऑफ द डे

भारतीय मुक्केबाजी के उभरते सितारे हवलदार विश्वनाथ सुरेश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ा धमाका कर दिया है। मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में चल रही एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-1 कजाकिस्तान के सान्झार ताशकेनबे को नॉकआउट पंच से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। यह जीत न सिर्फ उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है।

चेन्नई, तमिलनाडु के रहने वाले विश्वनाथ सुरेश ने पिछले कुछ सालों में तेजी से अपनी पहचान बनाई है। 50 किलोग्राम फ्लाईवेट कैटेगरी में वह इस समय देश के नंबर-1 मुक्केबाज हैं। 2026 की शुरुआत में ही उन्होंने एलीट मेंस नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर अपनी बादशाहत कायम की थी। फाइनल मुकाबले में उन्होंने ऋषि सिंह को 5-0 के एकतरफा फैसले से हराया था।

विश्वनाथ की सफलता की नींव उनके शानदार युवा करियर में ही रखी जा चुकी थी। उन्होंने 2022 में आईबीए यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप और एएसबीसी एशियन यूथ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। इसके बाद उन्होंने सीनियर स्तर पर भी लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।

साल 2024 में एशियन अंडर-22 चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद उन्होंने 2025 में चेन्नई में आयोजित बीएफआई फेडरेशन कप में गोल्ड जीतकर अपने फॉर्म को बरकरार रखा। उनकी तकनीक, स्पीड और रिंग में समझ उन्हें फ्लाईवेट कैटेगरी का खतरनाक खिलाड़ी बनाती है।

विश्वनाथ की खासियत उनकी फुर्ती और सटीक पंच हैं। वह मुकाबले के दौरान दूरी को शानदार तरीके से कंट्रोल करते हैं और तेज कॉम्बिनेशन से विरोधी को दबाव में ला देते हैं। यही वजह रही कि वर्ल्ड नंबर-1 ताशकेनबे जैसे अनुभवी बॉक्सर भी उनके सामने टिक नहीं पाए।

भारतीय सेना के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग ले रहे विश्वनाथ को बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और इंस्पायर SSCB का भी समर्थन मिल रहा है। उनकी लगातार प्रगति यह दिखाती है कि वह आने वाले समय में भारत के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मेडल जीतने की क्षमता रखते हैं।

युवा स्तर से लेकर सीनियर सर्किट तक गोल्ड की झड़ी लगाने वाले विश्वनाथ सुरेश अब भारत के लिए एक मजबूत पदक दावेदार बन चुके हैं। उलानबटार में मिली यह ऐतिहासिक जीत उनके करियर को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ भारतीय मुक्केबाजी को भी नई पहचान दिला सकती है।

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