Saturday, 22 August 2026
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World Asthma Day 2026: सांस से जुड़ी इस बीमारी को समझें, समय रहते पहचानें संकेत


नई दिल्ली: हर साल मई के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है।

यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि अस्थमा जैसी सांस की बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने का मौका है।

साल 2026 में भी इस दिन का मकसद यही है कि लोग समझें अस्थमा असल में क्या है, इसके संकेत कैसे दिखते हैं

और समय रहते इसे कैसे काबू में रखा जा सकता है।

अस्थमा ऐसी समस्या है जिसमें सांस लेना भारी हो जाता है।

इसे अनदेखा किया तो हालात गंभीर हो सकते हैं। इसलिए सही जानकारी हर किसी तक पहुंचना बहुत जरूरी है।

Global Initiative for Asthma (GINA) इस जागरूकता अभियान को दुनिया भर में चला रहा है ताकि लोग समय पर सतर्क हो सकें।

अस्थमा क्या है और कैसे होता है?

अस्थमा फेफड़ों की एक लंबी बीमारी है, जिसमें सांस की नलियां सूज जाती हैं और संकरी हो जाती हैं।

नतीजतन सांस लेने में तकलीफ होती है, सीने में जकड़न महसूस होती है और खांसी होती है।

यह समस्या अक्सर रात में या सुबह-सुबह ज्यादा परेशान करती है।

इसके कई ट्रिगर हो सकते हैं जैसे घर की धूल, धुआं, प्रदूषण, ठंडी हवा, एलर्जी या तनाव।

कई मामलों में यह परिवार में चलती आती है।

खासकर शहरों में बढ़ते प्रदूषण ने बच्चों और बुजुर्गों दोनों में अस्थमा के मामले बढ़ा दिए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया भर में करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं और सही इलाज न मिलने से स्थिति और खराब हो जाती है।

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अस्थमा के मुख्य लक्षण

अस्थमा के लक्षण हर व्यक्ति में थोड़े अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आम तौर पर ये दिखते हैं:

• बार-बार सांस फूलना
• सीने में जकड़न या दबाव महसूस होना
• लगातार खांसी, खासकर रात में
• सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना (Wheezing)

अगर ये लक्षण बार-बार नजर आएं तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें।

दिल्ली के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, अस्थमा को हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती है।

समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।

क्या अस्थमा पूरी तरह ठीक हो सकता है?

अस्थमा पूरी तरह जड़ से खत्म नहीं होता, लेकिन इसे अच्छी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।

डॉक्टर की बताई दवाइयों और इनहेलर का नियमित इस्तेमाल करने से मरीज बिना किसी परेशानी के दिन-रात गुजार सकता है।

Indian Chest Society के विशेषज्ञ कहते हैं कि इनहेलर से डरने की कोई बात नहीं है।

यह दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है और सबसे असरदार तरीका है।

सबसे अहम बात यह है कि मरीज अपनी बीमारी को अच्छे से समझे और उन चीजों से बचे जो उसके अस्थमा को बढ़ाती हैं।

बचाव ही सबसे अच्छा इलाज

अस्थमा को काबू में रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनानी पड़ती हैं:

• धूल-मिट्टी और प्रदूषण से बचें, बाहर जाते समय मास्क जरूर लगाएं
• घर को साफ-सुथरा रखें, खासकर बेडिंग और पर्दे
• धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें और दूसरों को भी रोकें
• ठंडी चीजों और अचानक मौसम बदलने से सावधानी बरतें
• रोजाना हल्का व्यायाम और योग करें

अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे प्राणायाम सांस की क्षमता बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं।

डॉक्टरों का मानना है कि नियमित चेकअप और दवा का सही इस्तेमाल अस्थमा को पूरी तरह नियंत्रित रख सकता है।

बच्चों में तेजी से बढ़ रहा अस्थमा

आजकल बच्चों में अस्थमा के मामले काफी बढ़ गए हैं।

प्रदूषण, कम शारीरिक गतिविधि और स्क्रीन टाइम इसका बड़ा कारण है।

बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं, “बच्चों को साफ हवा और खेलकूद की जरूरत है।

माता-पिता को उनके खान-पान और आसपास के माहौल पर खास ध्यान देना चाहिए।

अगर बच्चा बार-बार खांस रहा है या खेलते-खेलते जल्दी थक जाता है तो डॉक्टर से जरूर जांच कराएं।

जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत

World Asthma Day हमें याद दिलाता है कि छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी समस्या बन सकती हैं।

सही जानकारी और समय पर इलाज से अस्थमा को आसानी से मैनेज किया जा सकता है।

स्कूलों, अस्पतालों और समाज में इस दिन खास कार्यक्रम चलाए जाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस बीमारी को समझ सकें।

अस्थमा कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे डरना चाहिए।

इसे समझकर, सावधानी बरतकर और डॉक्टर की सलाह मानकर इसके साथ भी खुशहाल और सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

World Asthma Day का संदेश बहुत साफ है – सांस की कीमत समझिए और अपनी सेहत का ख्याल रखिए।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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