Wednesday, 07 October 2026
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कॉरपोरेट बॉन्ड का टोकनाइजेशन: सेबी के पायलट प्रोजेक्ट का वास्तविक अर्थ

ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल रिकॉर्डिंग से बढ़ सकती है पारदर्शिता, लेकिन नियामकीय ढांचा अब भी स्पष्ट नहीं

नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हाल ही में कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की है। इस कदम का वित्तीय और तकनीकी क्षेत्र में स्वागत किया गया है, लेकिन अभी भी बहुत से लोगों के लिए यह स्पष्ट नहीं है कि इसका वास्तविक अर्थ क्या है और इससे क्या बदलाव आ सकते हैं।

इसे समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि कॉरपोरेट बॉन्ड क्या होता है। जब कोई कंपनी निवेशकों से पैसा उधार लेती है और उसे तय समय पर ब्याज सहित लौटाने का वादा करती है, तो उसे कॉरपोरेट बॉन्ड कहा जाता है। आमतौर पर इस तरह के रिकॉर्ड कागजों पर या किसी केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में सुरक्षित रखे जाते हैं।

कॉरपोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन का मतलब है कि इस रिकॉर्ड को ब्लॉकचेन जैसी साझा डिजिटल तकनीक पर दर्ज किया जाए। इससे कई लोग एक ही जानकारी को देख और सत्यापित कर सकते हैं, बिना किसी एक केंद्रीय संस्था पर पूरी तरह निर्भर हुए। यहां टोकन कोई नई संपत्ति नहीं होता, बल्कि मौजूदा बॉन्ड का डिजिटल रूप होता है। यानी जिसके पास टोकन होगा, उसके पास उस बॉन्ड का स्वामित्व भी होगा।

बिटकॉइन और ईथर जैसी क्रिप्टो परिसंपत्तियों से अलग, टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड किसी असली संपत्ति से जुड़ा होता है। यह उस कानूनी वादे का प्रतिनिधित्व करता है जिसके तहत कंपनी निवेशकों का पैसा लौटाने की जिम्मेदारी लेती है। हालांकि, दोनों एक ही अंतर्निहित तकनीक पर निर्भर करते हैं। डिजिटल वॉलेट, टोकन ट्रांसफर सिस्टम और ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था जैसी कई तकनीकें क्रिप्टो उद्योग द्वारा विकसित की गई हैं। इसलिए टोकनाइज्ड संपत्तियां और क्रिप्टो-संपत्तियां काफी हद तक समान बुनियादी ढांचे को साझा करती हैं।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में नियामक अब तक क्रिप्टो क्षेत्र को मुख्यधारा वित्तीय व्यवस्था से अलग रखने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन यदि पारंपरिक वित्तीय साधनों को टोकन के रूप में बदलना है, तो उस तकनीकी अनुभव और बुनियादी ढांचे की जरूरत पड़ेगी जिसे क्रिप्टो उद्योग ने वर्षों में विकसित किया है।

क्रिप्टो एक्सचेंज पहले ही डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा, टोकन ट्रेडिंग, ग्राहक सत्यापन और चौबीसों घंटे चलने वाले बाजार में लिक्विडिटी प्रबंधन जैसी चुनौतियों का समाधान कर चुके हैं। ऐसे में यदि टोकन आधारित बॉन्ड बाजार बनाया जाता है, तो क्रिप्टो उद्योग के अनुभव को नजरअंदाज करना व्यावहारिक नहीं होगा।

हालांकि, इस पायलट प्रोजेक्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह परमिशन्ड ब्लॉकचेन पर आधारित होगा या परमिशनलेस ब्लॉकचेन पर। सेबी की घोषणा में इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। परमिशन्ड ब्लॉकचेन एक बंद नेटवर्क होता है, जिसमें केवल अधिकृत लोगों को ही प्रवेश मिलता है। इसमें एक केंद्रीय संस्था तय करती है कि कौन शामिल हो सकता है और कौन नहीं। इससे बॉन्ड की खरीद-बिक्री के अवसर सीमित हो सकते हैं, छोटे निवेशकों की भागीदारी कम हो सकती है और वैश्विक टोकन बाजारों से जुड़ना भी मुश्किल हो सकता है।

सेबी की यह पहल निश्चित रूप से सही दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन यदि टोकनाइजेशन का पूरा लाभ उठाना है और इसे केवल पुराने सिस्टम का डिजिटल रूप नहीं बनाना है, तो नियामकों को इन महत्वपूर्ण सवालों पर गंभीरता से विचार करना होगा। इसके लिए क्रिप्टो उद्योग के साथ अधिक व्यावहारिक और सकारात्मक संवाद की भी आवश्यकता होगी।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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